थिंपू: भारत और भूटान अब ऊर्जा व कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मिलकर प्रगति का नया इतिहास रचने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भूटान के राजा जग्मे खेसार नामग्येल वांगचुक की जयंती समारोह में कहा कि भारत और भूटान न केवल सीमाओं से, बल्कि संस्कृति, मूल्यों और शांति से भी गहराई से जुड़े हैं। चांगलीमेथांग स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और कनेक्टिविटी बढ़ाने का आह्वान किया।
पीएम मोदी ने किया 1000 मेगावाट की जलविद्युत योजना का शिलान्यास
पीएम मोदी ने पूर्व राजा जग्मे सिंग्ये वांगचुक के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता ने भूटान को दुनिया का पहला 'कार्बन-नेगेटिव' देश बनाया। उन्होंने भूटान की 100% बिजली नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादित होने पर प्रसन्नता जताई। इस अवसर पर 1,000 मेगावाट की नई जलविद्युत परियोजना का शिलान्यास किया गया, जो भूटान की क्षमता में 40% वृद्धि लाएगी। साथ ही, लंबे समय से ठप एक अन्य परियोजना को पुनः आरंभ करने की घोषणा हुई। सौर ऊर्जा में सहयोग के लिए महत्वपूर्ण समझौते भी हस्ताक्षरित हुए।
भारत के साथ रेल नेटवर्क से जुड़ेगा भूटान
कनेक्टिविटी पर फोकस करते हुए पीएम ने गेलेफु और समद्रुप जोंगखार को भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ने की परियोजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "कनेक्टिविटी अवसर पैदा करती है, जो समृद्धि लाती है।" इसके अलावा, गेलेफु माइंडफुलनेस सिटी के विकास के लिए भारत का पूर्ण समर्थन और आव्रजन चौकी स्थापना की घोषणा की। सीमा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी तेजी से काम हो रहा है।
भारत भूटान को देगा 10 हजार करोड़ की सहायता
पीएम ने 2014 में अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में भूटान आने को भावुकता से याद किया। उन्होंने कहा, "हमारे संबंध सशक्त हैं; चुनौतियों का सामना साथ किया और अब प्रगति की राह पर हैं।" भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये की सहायता का उल्लेख किया। कार्यक्रम में पूर्व राजा की 70वीं जयंती मनाई गई, जहां पीएम मोदी ने उनके जीवन को ज्ञान, सादगी और सेवा का प्रतीक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये पहल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी। (भाषा)
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