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भारत-कनाडा तनाव के बाद पहली बार जयशंकर जाएंगे ओटावा, G7 देशों की बैठक में होंगे शामिल

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Nov 11, 2025 05:46 pm IST,  Updated : Nov 11, 2025 05:58 pm IST

कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में पैदा हुए भारत के साथ तनाव के बाद पहली बार विदेश मंत्री एस जयशंकर अब 12 नवंबर को कनाडा का दौरा करेंगे, जहां वह जी7 में हिस्सा लेंगे। साथ ही कनाडा की विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे।

एस जयशंकर, विदेश मंत्री। - India TV Hindi
एस जयशंकर, विदेश मंत्री। Image Source : AP

G7 Canada: भारत और कनाडा के बीच करीब 2 वर्षों से चल रहे तनाव के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर पहली बार 12 नवंबर को कनाडा का दौरा करेंगे। इस दौरान वह ओटावा में जी7 की बैठक में शामिल होंगे। वह बुधवार को कनाडा के ओंटारियो प्रांत का दौरा करेंगे।

 

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने दिया था निमंत्रण

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने डॉ. एस जयशंकर को जी7 में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया था। इसके बाद वह जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में आउटरीच पार्टनर्स के रूप में भाग लेने जा रहे हैं। यह बैठक कनाडा की 2025 जी7 अध्यक्षता के अंतर्गत होगी, जो नीगारा में आयोजित हो रही है। मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर जी7 से इतर द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे, जिसमें अनीता आनंद के साथ चर्चा प्रमुख होगी।

 

भारत-कनाडा के रिश्तों में दूर हो सकती है तल्खी

कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत के साथ रिश्ते बहुत खराब हो गए थे। मगर अब मौजूदा पीएम मार्क कार्नी के दौरान भारत-कनाडा के रिश्तों में सुधार आने लगा है। ट्रूडो के कार्यकाल में दोनों देशों के तनाव के बाद अब भारत और कनाडा के विदेश मंत्रियों की यह पहली बैठक होगी। ऐसे में दोनों देशों के संबंधों में आने वाले दिनों में और अधिक सुधार आने की उम्मीद है। 

भारत-कनाडा के संबंधों में क्यों आया था तनाव

 

भारत-कनाडा के संबंधों में पिछले वर्षों में खालिस्तान के मुद्दे पर तनाव आ गया था। खासकर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के बाद दोनों देशों के तनाव सबसे खराब दौर में पहुंच गए थे। हालांकि भारत ने कनाडा के समस्त आरोपों को खारिज कर दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के सत्ता से जाने के बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है। अनीता आनंद और जयशंकर के बीच हालिया फोन वार्ता ने व्यापार समझौते को पुनर्जीवित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। बैठक में वैश्विक मुद्दों जैसे यूक्रेन संकट, मध्य पूर्व तनाव और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा होगी, जहां भारत की भूमिका को रेखांकित किया जाएगा।

 

11 से 13 नवंबर तक चलेगा दौरा

जयशंकर का यह दौरा 11 से 13 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान वह जी7 सदस्यों- फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका- के मंत्रियों से मुलाकात करेंगे। कनाडा की ओर से घोषित प्रतिभागियों में भारत सहित इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया जैसे पार्टनर शामिल हैं। विश्व सिख संगठन (डब्ल्यूएसओ) ने जयशंकर के दौरे पर सिख समुदाय की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है, लेकिन मंत्रालय ने इसे द्विपक्षीय संवाद का हिस्सा बताया। यह यात्रा भारत की 'वसुधैव कुटुंबकम' नीति को मजबूत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार वार्ता फिर से शुरू हो सकती है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद होगी। जयशंकर की यह यात्रा वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत को दर्शाती है।

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