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संघर्ष विराम के दौरान ईरान ने तेजी से बढ़ाया मिसाइलों और ड्रोन का भंडार, IRGC जनरल मुसावी का चौंकाने वाला दावा

 Published : Apr 19, 2026 05:52 pm IST,  Updated : Apr 19, 2026 06:08 pm IST

ईरानी सेना के कमांडर ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ युद्ध विराम के दौरान आईआरजीसी ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को कई गुना बढ़ा लिया है। ईरान का यह दावा अमेरिका और इजरायल का होश उड़ाने वाला है।

ईरान की मिसाइल। - India TV Hindi
ईरान की मिसाइल। Image Source : AP

Iran US War: अमेरिका से 2 हफ्ते के युद्ध विराम के दौरान ईरान ने अपने ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं में तेज बढ़ोत्तरी की है।  ईरान की सरकारी प्रेस टीवी के अनुसार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर जनरल मुसावी ने दावा किया है कि संघर्षविराम के इस दौर में ईरान अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को युद्ध से पहले की तुलना में कहीं तेज गति से मजबूत कर रहा है।

जनरल मुसावी के दावे से हड़कंप

जनरल मुसावी ने कहा, “संघर्षविराम के दौरान ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को अपग्रेड करने और उन्हें नई आपूर्ति से भरने का काम युद्ध से पहले की तुलना में बहुत तेजी से किया है। वहीं दुश्मन अपने गोला-बारूद के स्टॉक को फिर से बनाने में काफी संघर्ष कर रहा है। उसे हथियारों की आपूर्ति धीरे-धीरे विदेश से आयात करनी पड़ रही है।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच नाजुक संघर्षविराम चल रहा है। साथ ही दोनों पक्षों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। 

अब युद्ध शुरू हुआ तो दुश्मन को मिलेगा और कड़ा जवाब

ईरान का दावा है कि वह इस संघर्ष विराम अवधि का फायदा उठाकर उसने अपनी सैन्य क्षमता को काफी हद तक बढ़ा लिया है। जनरल मुसावी ने आगे कहा कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन यूनिट्स अब पहले से कहीं अधिक तैयार हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि युद्ध फिर से शुरू हुआ तो ईरान दुश्मन को पहले से भी ज्यादा मजबूत जवाब देने में सक्षम होगा। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस संघर्षविराम का उपयोग अपनी सैन्य कमजोरियों को दूर करने और नए हथियारों का भंडारण करने के लिए कर रहा है। वहीं इजरायल और अमेरिका जैसे देशों को अपने स्टॉक को फिर से भरने में समय और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें हथियार मुख्य रूप से विदेश से मंगवाने पड़ रहे हैं। यह बयान ईरान की रणनीति को साफ तौर पर दर्शाता है। ईरान न केवल हार्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, बल्कि अपनी मिसाइल और ड्रोन तकनीक को भी लगातार उन्नत कर रहा है। 

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