बीजिंग: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि मॉस्को ईरान में एनरिच्ड यूरेनियम की समस्या को सुलझाने में भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह भूमिका कई तरह से निभाई जा सकती है जिसमें अत्यधिक एनरिच्ड यूरेनियम को ईंधन-ग्रेड यूरेनियम में रीप्रोसेस करना भी शामिल है। लावरोव ने कहा कुछ भी जो ईरान को स्वीकार्य हो रूस उस तरह से काम करने के लिए तैयार है। लावरोव ने अपनी चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में पत्रकारों से ये बात कही है।
पहले क्या हुआ था?
रूस 2015 में ईरान और छह परमाणु शक्तियों के बीच हुए उस समझौते का हिस्सा था जिसमें तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने और उसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए खोलने के बदले में प्रतिबंधों से राहत देने की पेशकश की गई थी। इस समझौते के तहत मॉस्को ने ईरान से बड़ी मात्रा में एनरिच्ड यूरेनियम हटा दिया था। जब ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका एकतरफा रूप से इस समझौते से पीछे हट गया था तब क्रेमलिन ने ईरान को राजनीतिक समर्थन दिया था।
रूस ने पहले भी दिया था बयान
लावरोव से पहले भी रूस की ओर से कहा गया था कि वह अमेरिका के साथ शांति समझौते के हिस्से के तौर पर ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को लेने के लिए तैयार है। यह बयान तब आया था जब पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल हो गई थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों को बताया था कि यह प्रस्ताव राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से सीधे वाशिंगटन तक पहुंचाया गया है। राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ फोन पर बात भी की थी और उन्हें आश्वासन दिया था कि मॉस्को मध्य पूर्व में राजनयिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जानें IAEA के प्रमुख क्या बोले?
इस बीच यहां यह भी बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी (IAEA) के प्रमुख ने बुधवार को कहा है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते में तेहरान की परमाणु गतिविधियों का सत्यापन विस्तृत तरीके से होना चाहिए। IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए एक संपूर्ण सत्यापन व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया है। ट्रंप प्रशासन पहले ही कह चुका है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते हैं।
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