Shehbaz Sharif Diwali Greetings Backfires: क्या आपने कभी देखा है कि कोई नेता किसी त्योहार पर शुभकामनाएं दे और यही बात उसके गले की फांस बन जाए। लेकिन, ठीक ऐसा ही हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दिवाली के मौके पर शुभकामनाएं दी। शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दीवाली को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत बताया। जैसे ही एक्स पर शरीफ ने शुभकामना मैसेज पोस्ट किया सोशल मीडिया पर पाकिस्तान और भारत दोनों तरफ से प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने शरीफ की ट्रोलिंग शुरू कर दी। किसी ने आंकड़े गिनाए, किसी ने तंज कसा तो किसी ने शरीफ को सच्चाई का आईना दिखा दिया।
ट्रेंड करने लगा #HindusInPakistan और #DiwaliInPakistan
सोशल मीडिया पर जैसे ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का दीवाली विश वाला पोस्ट आया, #HindusInPakistan और #DiwaliInPakistan ट्रेंड करने लगा। एक यूजर्स ने तल्ख अंदाज में लिखा, 1947 से 20 प्रतिशत हिंदू थे। 2025 में केवल 2.3 फीसदी बचे हैं। शायद 2040 तक, दिवाली की शुभकामनाएं केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही भेजी जाएंगी।
पाकिस्तान में पहले थे 15 फीसदी हिंदू
शरीफ की दिवाली शुभकामनाओं को लेकर आक्रोश पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की वजह से देखने को मिला है। 2023 में पाकिस्तान की कुल 240,458,089 (24 करोड़ से अधिक) आबादी में से केवल 38 लाख हिंदू हैं, जबकि आंकड़े बताते हैं कि वो पाकिस्तानी आबादी का 1.63 प्रतिशत हैं। हमेशा से ऐसा नहीं था। पाकिस्तान 3,000 साल से भी पहले सिंधु घाटी सभ्यता के समय से हिंदुओं की एक समृद्ध आबादी का घर था। इस सभ्यता के 2 बड़े शहर, हड़प्पा और मोहनजोदड़ो वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांतों में स्थित थे। 1947 में विभाजन के बाद, हिंदुओं की संख्या 15 प्रतिशत से घटकर अब लगभग 2 प्रतिशत के आसपास रह गई है। ऐतिहासिक रूप से बड़ी हिंदू आबादी वाले प्रमुख शहरों में तो और भी अधिक गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, लाहौर में 1941 में हिंदू/सिख समुदाय की आबादी लगभग 40 प्रतिशत थी लेकिन आज यह एक प्रतिशत से भी कम रह गई है।
पाकिस्तान में कोई हिंदू बचा है क्या?
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने पाकिस्तान को पीएम शहबाज शरीफ पर हिंदुओं के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। यूजर ने शरीफ के लंबे संदेश पर तंज करते हुए लिखा, इतना लंबा संदेश देखना अच्छा है, लेकिन शब्द खाली लगते हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, आप अंधकार पर प्रकाश की बात करते हैं, लेकिन आपकी व्यवस्था के तहत पाकिस्तान में हिंदू और भी अंधेरे में हैं। जबरन धर्म परिवर्तन, मंदिरों पर हमले और अपहरण जारी हैं। एक अन्य ने कमेंट कर कहा कि पाकिस्तान में कोई हिंदू बचा है? एक अन्य ने लिखा कि पाकिस्तान के हिंदुओं को सीधे व्हाट्सएप करें, वहां शायद ही कोई बचा हो।
हिंदू महिलाओं का किया जाता है अपहरण
पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या में यह गिरावट कई कारणों से है, जिनमें सबसे प्रमुख है देश में उनके साथ होने वाला कानूनी और सामाजिक भेदभाव। कानूनी तौर पर, केवल मुसलमान ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री पद के लिए पात्र हैं। इसके अलावा, ईशनिंदा कानून में मौत की सजा का प्रावधान है और इसका इस्तेमाल पाकिस्तान में गैर-मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता रहा है। इसके अलावा, गैर-मुसलमानों के लिए पारिवारिक कानून मौजूद नहीं हैं। हर साल हजारों हिंदू महिलाओं का अपहरण कर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित किया जाता है।

मंदिरों को किया गया नष्ट
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में वैश्विक गुलामी सूचकांक के अनुमान के अनुसार, 3 मिलियन से अधिक पाकिस्तानी कर्जदार हैं। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि जमींदार गरीब हिंदुओं को ऐसे कर्ज देकर इस तरह से फंसाते हैं जिन्हें वो जानते हैं कि कभी चुकाया नहीं जा सकता। फिर उन्हें और उनके परिवारों को कर्ज चुकाने के लिए काम करना पड़ता है। महिलाओं का अक्सर यौन शोषण किया जाता है। पाकिस्तान में हिंदुओं की दुर्दशा यहीं खत्म नहीं होती। हिंदू मंदिर भी मलबे में तब्दील हो गए हैं। आज, पाकिस्तान में 300 से भी कम हिंदू मंदिर बचे हैं। विभाजन के बाद से हजारों मंदिर नष्ट किए जा चुके हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
जुलाई 2023 में, कराची के सोल्जर बाजार में स्थित मरी माता मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि लगभग 150 साल पहले बने मंदिर का ढांचा पुराना और खतरनाक हो चुका है। भारत सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2022 में पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के 241 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 में घटकर 103 हो गए लेकिन 2024 में थोड़ा बढ़कर 112 हो गए।

मुनीर के नफरती बोल
देखने वाली बात यह भी है कि पीएम शरीफ को हिंदुओं को बधाई देते हैं लेकिन उनके सेना प्रमुख आसिम मुनीर के विचार अलग हैं। अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से कुछ दिन पहले, मुनीर ने अपने देश के लोगों से कहा था कि वो अपने बच्चों को बताएं कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि वो "हिंदुओं से अलग" हैं। मुनीर ने कहा था, "आपको अपने बच्चों को पाकिस्तान की कहानी बतानी होगी ताकि वो यह ना भूलें कि हमारे पूर्वज जीवन के हर पहलू में हमें हिंदुओं से अलग समझते थे।" मुनीर ने यह भी कहा था "हमारे धर्म अलग हैं, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। हम दो राष्ट्र हैं।"
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