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हिटलर का नाम सुनकर जिंदगी भर क्यों पछताता रहा ब्रिटिश सैनिक? जानें, आखिर क्या हुआ था उस दिन

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Apr 30, 2026 08:45 am IST,  Updated : Apr 30, 2026 08:45 am IST

प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सैनिक हेनरी टैंडी ने 28 सितंबर 1918 को मार्कोइंग में एक घायल जर्मन सैनिक को गोली मारने के बजाय जाने दिया। बाद में दावा किया गया कि वह सैनिक एडोल्फ हिटलर था।

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हेनरी टैंडी और एडोल्फ हिटलर। Image Source : PUBLIC DOMAIN/RICHARD HARVEY

प्रथम विश्वयुद्ध से जुड़ी कई हैरतअंगेज कहानियां आज भी हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। ब्रिटिश सैनिक हेनरी टैंडी की कहानी भी इसी तरह की कहानियों में से एक है। हेनरी टैंडी का जन्म 1891 में इंग्लैंड के वार्विकशायर में हुआ था। उन्होंने युद्ध में असाधारण साहस दिखाया था और विक्टोरिया क्रॉस, मिलिट्री मेडल तथा डिस्टिंग्विश्ड कंडक्ट मेडल जैसे कई बड़े सम्मान प्राप्त किए। टैंडी कई बार घायल हुए, लेकिन हर बार वापस लौटकर लड़ाई में शामिल होते रहे। उन्होंने अपने साथियों की जान बचाई और दुश्मन के कई हमलों को नाकाम किया। लेकिन कहा जाता है कि जंग के बीच उन्होंने एक ऐसे शख्स की जान बख्श दी थी, जो आगे चलकर मानवता के लिए एक बड़ा नासूर बन गया।

हिटलर ने टैंडी को धन्यवाद कहा और चला गया

28 सितंबर 1918 को फ्रांस के मार्कोइंग क्षेत्र में उन्होंने इस शिद्दत से जंग लड़ी कि उन्हें ब्रिटेन का सर्वोच्च सैन्य सम्मान विक्टोरिया क्रॉस मिला। लेकिन खास बात यह है कि इस जंग को उनके विक्टोरिया क्रॉस से ज्यादा किसी और चीज के लिए याद किया जाता है। उस दिन लड़ाई लगभग खत्म हो रही थी। थके-हारे और घायल जर्मन सैनिक पीछे हट रहे थे। टैंडी ने एक घायल जर्मन सैनिक को अपनी नजरों के सामने देखा। वह निहत्था था और चलने में भी मुश्किल हो रही थी। टैंडी ने राइफल उठाई, निशाना साधा, लेकिन गोली नहीं चलाई। जर्मन सैनिक ने टैंडी की तरफ देखा, धन्यवाद में सिर हिलाया और चला गया। टैंडी ने जंग में कई बार ऐसे घायल दुश्मनों को जाने दिया था। बाद में दावा किया गया कि वह घायल जर्मन सैनिक कोई और नहीं बल्कि जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर था।

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Image Source : PUBLIC DOMAIN/RICHARD HARVEYवह पेंटिंग जिसे देखकर हिटलर को कथित घटना याद आई थी।

हिटलर ने चेम्बरलेन से किया था घटना का जिक्र

इस कहानी को और मजबूती मिली जब 1923 में बनी फॉर्चुनिनो मटानिया की पेंटिंग हिटलर तक पहुंची। पेंटिंग में एक ब्रिटिश सैनिक घायल साथी को उठाए दिखाया गया था, जिसे टैंडी माना गया। हिटलर ने कथित तौर पर इस पेंटिंग को देखकर अपनी युद्ध की यादें ताजा कीं। 1938 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री नेविल चेम्बरलेन जब हिटलर से मिलने गए, तब हिटलर ने पेंटिंग की ओर इशारा कर कहा कि एक ब्रिटिश सैनिक ने उसे गोली मारने के बजाय छोड़ दिया था। हिटलर ने उनसे टैंडी को अपनी शुभकामनाएं भेजने की गुजारिश की और चेम्बरलिन ने कहा कि वह ब्रिटेन वापस जाकर टैंडी तक उसका संदेश पहुंचा देंगे। धीरे-धीरे यह कहानी लोकप्रिय हो गई कि टैंडी ने हिटलर की जान बचाई। 

हिटलर से मुलाकात पर टैंडी का क्या कहना था?

हालांकि कई इतिहासकार इस कहानी को किंवदंती मानते हैं। जर्मन सेना के रिकॉर्ड बताते हैं कि 28 सितंबर 1918 को हिटलर छुट्टी पर जर्मनी में था या उसका यूनिट मार्कोइंग से काफी दूर था। चेम्बरलेन-हिटलर मुलाकात के आधिकारिक दस्तावेजों में भी टैंडी का कोई जिक्र नहीं है। पेंटिंग वास्तव में 1914 के युद्ध की घटना पर आधारित थी, न कि 1918 की। टैंडी ने खुद कभी पूरी तरह पुष्टि नहीं की। 1939 में उन्होंने कहा कि शायद वे हिटलर से मिले हों, लेकिन याद नहीं। फिर भी, 1940 में कोवेंट्री बमबारी के दौरान उन्होंने हिटलर को जिंदा छोड़ देने पर  पछतावे का इजहार किया। टैंडी ने कहा कि अगर उन्हें पता होता कि वह सैनिक इतना खतरनाक साबित होगा, तो शायद वे गोली चला देते।

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