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Russia Ukraine War: ट्रंप की बेरुखी के बाद फ्रांस बना यूक्रेन का नया खेवनहार, कीव को दे रहा खुफिया सैन्य जानकारी

 Published : Mar 06, 2025 06:54 pm IST,  Updated : Mar 06, 2025 06:54 pm IST

अमेरिका द्वारा यूक्रेन की मदद करने और खुफिया जानकारी देने से हाथ पीछे खींचे जाने के बाद अब फ्रांस उसका नया खेवनहार बना है। फ्रांस ने यूक्रेन को सभी तरह की खुफिया जानकारी उसकी संप्रभुता की रक्षा के लिए मुहैया कराना शुरू कर दिया है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और फ्रांस के समकक्ष इमैनुएल मैक्रों।- India TV Hindi
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और फ्रांस के समकक्ष इमैनुएल मैक्रों। Image Source : PTI

पेरिसः अमेरिका द्वारा यूक्रेन के साथ खुफिया सूचना साझा करने पर रोक लगाने की घोषणा किए जाने के बाद फ्रांस कीव का नया मददगार बना है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को हर खुफिया सैन्य जानकारी मुहैया कराने का वचन दिया। इसके बाद फ्रांसीसी सेना ने इस युद्धग्रस्त यूरोपीय देश को खुफिया सैन्य जानकारी उपलब्ध कराने लगा है। फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबेस्टियन लेकॉर्नू ने कहा, ‘‘हमारी खुफिया जानकारी संप्रभु है। हमारे पास ऐसी खुफिया जानकारी है जिसका लाभ हम यूक्रेन को दे रहे हैं।

’’ उन्होंने कहा कि यूक्रेन को सभी सैन्य सहायता निलंबित करने के अमेरिकी फैसले के बाद, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनसे अमेरिकी सहायता की कमी की भरपाई के लिए ‘‘विभिन्न फ्रांसीसी सहायता पैकेज में तेजी लाने’’ के लिए कहा। बता दें कि अमेरिका ने यूक्रेन की न सिर्फ सैन्य मदद रोकी, बल्कि उसकी दी जा रही खुफिया सैन्य जानकारी देने से भी इनकार कर दिया। इससे जेलेंस्की हताश हो रहे थे। मगर इस संकट की घड़ी में मैक्रों ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया है। 

यूक्रेन की स्थिति देखते हुए परमाणु प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने पर विचार करेगा यूरोप

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को कहा कि वह महाद्वीप को रूस के खतरों से बचाने के लिए फ्रांस की परमाणु प्रतिरोध क्षमता का उपयोग करने की संभावना पर यूरोपीय सहयोगियों के साथ चर्चा करेंगे। परमाणु प्रतिरोध सिद्धांत के अनुसार परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्रों पर हमला नहीं किया जाना चाहिए, विशेष रूप से परमाणु हमला क्योंकि जवाबी परमाणु हमले की आशंका भी बेहद अधिक होती है। फ्रांस यूरोपीय संघ का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश है। मैक्रों ने बृहस्पतिवार को एक विशेष यूरोपीय शिखर सम्मेलन से पहले टेलीविज़न पर अपने संबोधन में रूस को "फ्रांस और यूरोप के लिए खतरा" करार दिया।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति के अधीन होगा परमाणु हथियारों का इस्तेमाल

मैक्रों ने कहा कि उन्होंने ,‘‘हमारी (परमाणु प्रतिरोध) क्षमता के जरिए यूरोपीय महाद्वीप के हमारे सहयोगियों की सुरक्षा पर रणनीतिक बहस शुरू करने का निर्णय लिया है।’’ उन्होंने कहा कि फ्रांस के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल फ्रांसीसी राष्ट्रपति के हाथों में रहेगा। मैक्रों का यह कदम जर्मनी में हाल में हुए चुनाव में विजेता रहे फ्रेडरिक मर्ज़ की उस पहल के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने फ्रांस के साथ "परमाणु साझेदारी" पर चर्चा का आह्वान किया था। यूरोपीय संघ के नेता बृहस्पतिवार को ब्रुसेल्स में होने वाले शिखर सम्मेलन के दौरान अन्य विषयों के साथ-साथ परमाणु प्रतिरोध के मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे। मैक्रों ने कहा, ‘‘यूरोप का भविष्य वाशिंगटन या मॉस्को में तय नहीं होना चाहिए।’’ उ

बजट का 40 फीसदी हिस्सा सैन्य जरूरतों पर होगा खर्च

उन्होंने कहा कि रूस अब अपने बजट का 40 प्रतिशत हिस्सा सैन्य खर्च के लिए रख रहा है और 2030 तक 300,000 अतिरिक्त सैनिकों, 3,000 टैंकों और 300 जेट लड़ाकू विमानों के साथ अपनी सेना का विस्तार करने की योजना बना रहा है। मैक्रों ने सवाल किया, ‘‘कौन विश्वास कर सकता है कि आज का रूस, यूक्रेन पर रुक जाएगा?’’ फ्रांस के नेता ने कहा कि सहयोगियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद रूस फिर से यूक्रेन पर आक्रमण न करे। उन्होंने कहा कि इसका मतलब "यूक्रेनी सेना को दीर्घकालिक समर्थन" प्रदान करना और संभवतः यूरोपीय सेना को तैनात करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोप पर दबाव डाला है कि वह महाद्वीप की सुरक्षा का ज्यादा से ज्यादा भार खुद उठाए। ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अमेरिका हमेशा इसमें मौजूदा स्तर पर शामिल नहीं रहेगा। (एपी) 

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