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अफगानिस्तान में तालिबान के नए शासन को औपचारिक मान्यता देने वाला रूस बना पहला देश, प्रतिबंधित संघठनों की सूची से हटाया

 Published : Jul 04, 2025 07:35 am IST,  Updated : Jul 04, 2025 07:45 am IST

अफगानिस्तान की सत्ता में आए तालिबान को रूस ने औपचारिक मान्यता दे दी है। ऐसा करने वाला रूस दुनिया का पहला देश बन गया है, जिसने तालिबान को ये मान्यता दी है।

तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव।- India TV Hindi
तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव। Image Source : AP

मॉस्को: रूस गुरुवार को अफगानिस्तान के शासन को औपचारिक मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान में उसकी सरकार को औपचारिक रूप से अभी तक अन्य किसी भी देश ने मान्यता नहीं दी है। मगर अब रूस ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। इसके साथ ही मॉस्को ने तालिबान को अपने प्रतिबंधित संगठनों की सूची से भी हटा दिया।

तालिबान ने रूस के फैसले पर क्या कहा?

रूसी विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि उसे अफगानिस्तान के नव नियुक्त राजदूत गुल हसन हसन से राजनयिक मान्यता-पत्र प्राप्त हुआ है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अफगान सरकार को औपचारिक मान्यता देना “उत्पादक द्विपक्षीय सहयोग” को बढ़ावा देगा। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया और तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह "दूसरे देशों के लिए एक अच्छा उदाहरण" है। 

अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग करता आ रहा है तालिबान

अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में आने के बाद से ही तालिबान अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग कर रहा है। अमेरिका और नाटो बलों की वापसी के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता संभाली थी। उन्होंने अफगानिस्तान में इस्लामी कानून की अपनी कठोर व्याख्या भी लागू की है। अब तक किसी भी देश ने तालिबान प्रशासन को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी थी, हालांकि तालिबान ने कई देशों के साथ उच्च-स्तरीय वार्ताएं की हैं और चीन तथा संयुक्त अरब अमीरात सहित कुछ देशों के साथ राजनयिक संबंध भी बनाए हैं।

महिलाओं पर तालिबान का बैन

अफगानिस्तान की सत्ता में आने के बाद से तालिबान सरकार विश्व मंच पर काफी हद तक अलग-थलग रही है, खासकर महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भी ऐसा हुआ है। हालांकि तालिबान ने पहले सत्ता में आने पर 1996 से 2001 के शासन की तुलना में अधिक उदार शासन का वादा किया था, लेकिन 2021 में सत्ता संभालने के तुरंत बाद उन्होंने महिलाओं और लड़कियों पर कई प्रतिबंध लागू कर दिए। महिलाओं को अधिकांश नौकरियों और सार्वजनिक स्थानों जैसे पार्क, स्नानगृह और जिम  में जाने से रोक दिया गया है, जबकि लड़कियों को छठी कक्षा के बाद की शिक्षा से भी वंचित कर दिया है।

पुतिन ने सर्गेई की सलाह पर किया फैसला

हाल के दिनों में रूसी अधिकारियों ने अफगानिस्तान को स्थिर करने में मदद करने के लिए तालिबान से जुड़ने की आवश्यकता पर बल दिया है और अप्रैल में तालिबान पर लगा प्रतिबंध हटा लिया। अफगानिस्तान में रूस के राजदूत दिमित्री झिर्नोव ने सरकारी चैनल वन टेलीविजन पर प्रसारित अपने बयान में कहा कि तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता देने का निर्णय राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की सलाह पर लिया। झिर्नोव ने कहा कि यह निर्णय रूस की "अफगानिस्तान के साथ पूर्ण संबंधों के विकास के लिए ईमानदार कोशिश" को दर्शाता है। (एपी) 

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