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अमेरिका ने भारत में नया राजदूत नियुक्त किया, जानिए कौन हैं सर्जियो गोर, ट्रंप ने इस भूमिका के लिए क्यों चुना?

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Aug 23, 2025 06:55 am IST,  Updated : Aug 23, 2025 07:31 am IST

सर्जियो गोर लंबे अर्से से डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक और व्यक्तिगत विश्वासपात्र रहे हैं। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जबकि भारत और अमेरिका के संबंध नाजुक दौर में चल रहे हैं।

Donald trump, Sergio Gor- India TV Hindi
डोनाल्ड ट्रंप और सर्जियो गोर Image Source : X@RSHEREME

वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी राजनीतिक सहयोगी सर्जियो गोर को भारत में अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जबकि भारत और अमेरिका के संबंध नाजुक दौर में चल रहे हैं। गोर की नियुक्ति का ऐलान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए किया। सर्जियो गोर भारत में अमेरिकी राजदूत के साथ ही दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत भी होंगे। वे वर्तमान में व्हाइट हाउस के प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस के डायरेक्टर हैं। गोर भारत में 26वें अमेरिकी राजदूत होंगे।

लंबे अर्से से डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद हैं सर्जियो गोर

बता दें कि सर्जियो गोर लंबे अर्से से डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक और व्यक्तिगत विश्वासपात्र रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अहम भूमिका निभाई और ट्रंप के समर्थन एक बड़े पॉलिटिकल एक्शन कमेटी का नेतृतव किया। ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया। गोर ने ट्रंप प्रशासन के लिए कर्मचारियों के चयन में अहम भूमिका निभाई। ट्रम्प ने पारंपरिक राजनयिकों को काफ़ी हद तक दरकिनार कर दिया है और कूटनीति के लिए अपने करीबी मित्रों पर निर्भर रहे हैं।

ट्रंप से सोशल मीडिया पर पोस्ट में क्या लिखा?

ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रूथ पर एक पोस्ट में गोर की नियुक्ति का ऐलान करते हुए लिखा- मुझे यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि में सर्यिजो गौर को भारत के लिए अमेरिका का अगला राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत नियुक्त कर रहा हूं। व्हाइट हाउस के प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस के डायरेक्टर के तौर पर  संघीय सरकार के प्रत्येक विभाग में लगभग 4,000 अमेरिका फर्स्ट पैट्रिट्स की नियुक्ति की। इससे हमारे विभाग और विभिन्न एजेंसियों के 95 फीसदी से ज्यादा पद भरे जा चुके हैं।

Donald Trump, social media
Image Source : TRUTH SOCIAL MEDIAडोनाल्ड ट्रंप, सोशल मीडिया पोस्ट

ट्रंप ने आगे लिखा. "सर्जियो एक बहुत अच्छे दोस्त हैं, जो कई वर्षों से मेरे साथ हैं। उन्होंने मेरे ऐतिहासिक राष्ट्रपति अभियानों पर काम किया, मेरी बेस्टसेलिंग पुस्तकों को प्रकाशित किया, और हमारे आंदोलन का समर्थन करने वाले सबसे बड़े सुपर पैक्स में से एक का संचालन किया। प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस के डायरेक्टर के तौर पर अमेरिकी लोगों से प्राप्त अभूतपूर्व जनादेश को पूरा करने में महत्वपूर्ण रही है। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि मेरे पास कोई ऐसा व्यक्ति हो जिस पर मैं अपने एजेंडे को पूरा करने और अमेरिका को फिर से महान बनाने में हमारी मदद करने के लिए पूरी तरह भरोसा कर सकूं। सर्जियो एक अद्भुत राजदूत बनेंगे। बधाई हो सर्जियो!"

गोर की भारत के राजदूत के तौर पर नियुक्ति को एक अहम कदम माना जा रहा है। अमेरिका 1990 के बाद से भारत को उभरते हुए साझेदार के तौर पर प्राथमिकता देता रहा है। लेकिन हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के फैसले से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ा है। ट्रम्प ने रूस से ऊर्जा ख़रीदने के लिए भारत पर दबाव बनाने के लिए  टैरिफ़ बढ़ाने का फ़ैसला किया है। इसके बाद बदली हुई परिस्थितियों में सर्जियो गोर की भारत के राजदूत के तौर पर नियुक्ति काफी अहम मानी जा रही है। क्योंकि ट्रंप के टैरिफ पॉलिसी के बाद भारत, रूस और चीन की नजदीकियां बढ़ने लगी हैं। 

सर्जियो गोर के सामने होंगी ये प्रमुख चुनौतियां

  1. सर्जियो गोर ऐसे समय में भारत के राजदूत बने हैं जब उन्हें इन दोनों देशों के बीच ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से उपजे तानव, भू-राजनीतिक जटिलताओं का सामना करना पड़ेगा और अपनी स्वयं की राजनयिक अनुभवहीनता जैसी बाधाओं से पार पाना होगा। गोर की नियुक्ति को राष्ट्रपति ट्रंप के "अमेरिका फर्स्ट" एजेंडे को सीधे तौर पर लागू करने के एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
  2. अमेरिका ने भारतीय आयातों पर टैरिफ बढ़ाने की योजना बनाई है, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया है। गोर के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन व्यापारिक विवादों को सुलझाना और एक ऐसे समझौते पर पहुँचना होगी जो दोनों पक्षों को मंजूर हो।
  3. गोर को केवल भारत में राजदूत ही नहीं, बल्कि दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत की भी जिम्मेदारी दी गई है। यह क्षेत्र जियो पॉलिटिक्स के तौर पर बेहद संवेदनशील है। भारत के रूस के साथ ऐतिहासिक और मजबूत रक्षा संबंध हैं, विशेषकर रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका अपनी नाखुशी जाहिर कर चुका है। गोर को भारत-रूस संबंधों के इस पहलू को सावधानी से साधना होगा, साथ ही चीन के बढ़ते प्रभाव और पाकिस्तान से संबंधित मुद्दों पर भी अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व करना होगा।
  4. सर्जियो गोर को विदेश नीति और विशेष रूप से भारत से संबंधित मामलों में बहुत कम अनुभव है। उनकी पृष्ठभूमि एक राजनीतिक संचालक और राष्ट्रपति के वफादार के रूप में रही है, न कि एक परंपरागत राजनयिक के रूप में। नई दिल्ली के जटिल राजनीतिक और नौकरशाही हलकों में पैठ बनाना और भारत की विविध सांस्कृतिक और रणनीतिक बारीकियों को समझना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
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