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ट्रंप प्रशासन ने शिक्षा विभाग में छंटनी मामले में निचली अदालत के फैसले को दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, की ये मांग

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Jun 06, 2025 09:33 pm IST,  Updated : Jun 06, 2025 10:29 pm IST

ट्रंप प्रशासन ने शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर छंटनी के मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ट्रंप प्रशासन ने इस मामले में निचली अदालत के उस फैसले पर इमरजेंसी स्टे लगाने की मांग की है।

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। - India TV Hindi
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। Image Source : AP

वॉशिंगटन:ट्रंप प्रशासन ने शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर छंटनी के मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट  का दरवाजा खटखटाया है। ट्रंप प्रशासन ने इस मामले में निचली अदालत के उस फैसले पर इमरजेंसी स्टे लगाने की मांग की है, जिसमें शिक्षा विभाग के लगभग 1,400 कर्मचारियों की बहाली का आदेश दिया गया था। ये कर्मचारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विवादास्पद योजना के तहत हटाए गए थे, जिसका उद्देश्य शिक्षा विभाग को कमजोर करना है।

जिला न्यायाधीश ने जारी की थी निषेधाज्ञा

यह अपील 6 जून (शुक्रवार) को न्याय विभाग की ओर से सॉलिसिटर जनरल डी जॉन सॉयर द्वारा दायर की गई। इसमें बोस्टन में स्थित अमेरिकी जिला न्यायाधीश मयोंग जॉन द्वारा पिछले महीने जारी की गई प्रारंभिक निषेधाज्ञा (injunction) को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट क्यों गया ट्रंप प्रशासन

जज जॉन के आदेश ने न केवल इन बड़े पैमाने पर हुई छंटनियों को पलट दिया, बल्कि विभाग को सीमित करने के उन व्यापक प्रयासों पर भी रोक लगा दी, जो कि ट्रंप की शिक्षा नीति का एक अहम हिस्सा मानी जा रही थी। फर्स्ट यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने निचली अदालत के फैसले को रोकने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में दखल की मांग की है।

जज ने दी थी ये चेतावनी

ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाने वाले जज जॉन पहले ही यह चेतावनी दे चुके थे कि इतने बड़े पैमाने पर की गई छंटनी से विभाग की कार्यक्षमता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और यह उसके कानूनी दायित्वों को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि न्याय विभाग का तर्क है कि न्यायपालिका अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जा रही है। सॉलिसिटर जनरल सॉयर ने कहा कि यह निषेधाज्ञा कार्यपालिका की नीति को अदालत की राय से बदलने की कोशिश है, जबकि संविधान के अनुसार प्रशासनिक सुधारों को लागू करने की शक्ति कार्यपालिका के पास है।

सॉयर के अनुसार, यह छंटनी ट्रंप की योजना का हिस्सा है, जिसके तहत शिक्षा विभाग को अधिक चुस्त बनाया जाना है और इसके कई विवेकाधीन कार्यों को राज्य सरकारों को सौंपने की योजना है। प्रशासन का कहना है कि यह नीति पूरी तरह वैध और संविधान के अनुरूप है।

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