1. Hindi News
  2. विदेश
  3. अमेरिका
  4. ऋण सीमा को लेकर बाइडेन और मैक्कार्थी ने अपनाया ये नया रवैया, क्या अब बच पाएगी "अमेरिका की डूबती नैया"?

ऋण सीमा को लेकर बाइडेन और मैक्कार्थी ने अपनाया ये नया रवैया, क्या अब बच पाएगी "अमेरिका की डूबती नैया"?

 Published : May 28, 2023 11:13 am IST,  Updated : May 28, 2023 11:13 am IST

अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडेन और केविन मैक्कार्थी एक समझौते पर सहमत हो गए हैं। आइएमएफ को उम्मीद है कि इससे कर्ज में डूबे अमेरिका की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

जो बाइडेन, अमेरिका के राष्ट्रपति- India TV Hindi
जो बाइडेन, अमेरिका के राष्ट्रपति Image Source : PTI

कर्ज में डूब रहे अमेरिका को बचाने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रतिनिधि सभा के स्पीकर केविन मैक्कार्थी के बीच शनिवार देर रात आखिरकार करार हो गया है। देश की वैधानिक ऋण सीमा बढ़ाने पर ‘सैद्धान्तिक सहमति’ बन गई है। दोनों नेता संघीय खर्च को सीमित करने और अमेरिका को संभावित चूक से बचाने के लिए ‘समझौते’ पर तैयार हो गए हैं। हालांकि, इस समझौते तक पहुंचने के लिए जो रियायतें या शर्तें तय की गई हैं उससे डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पक्षों के नाराज होने का खतरा है। अब देखना होगा कि यह समझौता अमेरिका की डूबती नैया को बचा पाता है या नहीं।

वार्ताकारों ने रिपब्लिकन की खाद्य टिकट के प्राप्तकर्ताओं के लिए काम की बढ़ती जरूरतों पर सहमति जताई है, जिसपर डेमोक्रेट ने हंगामा खड़ा किया है। 5 जून की समयसीमा से पहले संसद की मंजूरी के लिए दोनों पक्षों का इस समझौते पर सहमत होना जरूरी है। मैकार्थी ने कहा कि डेमोक्रेट राष्ट्रपति और रिपब्लिकन स्पीकर दोनों के बीच शनिवार शाम फोन पर बातचीत के बाद समझौते के लिए सहमति बनी है। देश और दुनिया को बेसब्री से अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को खतरे में डालने वाले राजनीतिक गतिरोध के समाधान का इंतजार था।

बाइडेन ने समझौते को अमेरिका के लिए बताया अच्छा

बाइडेन ने शनिवार रात बयान में कहा, ‘‘इस करार तक पहुंचने के लिए ‘समझौता’ करना पड़ा है। इसका मतलब है कि हर किसी को वह नहीं मिलेगा जो वह चाहता है।’’ बाइडेन ने इस समझौते को अमेरिका के लोगों के लिए एक अच्छी खबर बताते हुए कहा कि इससे देश एक ऐसी चूक से बच सकता है जो उसे आर्थिक मंदी में ले जा सकती थी। साथ ही समझौता नहीं होने पर सेवानिवृत्ति खाते प्रभावित होते और लाखों की संख्या में लोगों को नौकरी गंवानी पड़ती।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। US से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश