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'ईरान के खिलाफ बड़ी लड़ाई खत्म, लेकिन शांति अभी दूर', अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान

 Published : May 06, 2026 06:48 am IST,  Updated : May 06, 2026 06:48 am IST

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' खत्म हो चुका है, लेकिन स्थायी शांति अभी दूर है। बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी काफी हद तक बंद है, जहाज फंसे हैं और तनाव जारी है।

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अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो। Image Source : AP

वॉशिंगटन: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका के बड़े सैन्य अभियान अब खत्म हो चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं कहा कि यह संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो गया है या भविष्य में फिर से शुरू नहीं होगा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी', जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ हमले के साथ शुरू हुआ था, अब समाप्त हो चुका है क्योंकि इसके सभी उद्देश्य पूरे कर लिए गए हैं।

'हम किसी नए टकराव के पक्ष में नहीं'

रुबियो ने हाल के दिनों में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को दोबारा खोलने के प्रयासों के दौरान हुई झड़पों को 'रक्षात्मक कार्रवाई' बताया। उन्होंने कहा, 'हम किसी नए टकराव के पक्ष में नहीं हैं, हम शांति का रास्ता चाहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि शांति के लिए जरूरी है कि ईरान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी मांगों को माने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले, जो दुनिया की तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम रास्ता है।

जहाजों की आवाजाही अब भी चुनौती

अमेरिका की कोशिशों के बावजूद अब तक केवल 2 व्यापारिक जहाज ही इस रास्ते से गुजर पाए हैं, जबकि सैकड़ों जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। जहाज मालिक अभी भी खतरे को लेकर चिंतित हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण तरीके से जहाजों को सुरक्षित निकालना चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि करीब एक महीने पहले हुआ 'सीजफायर' अभी खत्म नहीं हुआ है।

'चीन के हित में है कि ईरान रास्ता खोले'

रुबियो ने उम्मीद जताई कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी सरकार ईरान पर दबाव डालेगी कि वह जलडमरूमध्य को बंद न करे। उन्होंने कहा, 'चीन की अर्थव्यवस्था इस रास्ते से होने वाले तेल और गैस व्यापार पर काफी निर्भर है, इसलिए यह उसके हित में है कि ईरान रास्ता खोले।' रुबियो ने कहा कि कई देश इस जलमार्ग को खोलने में मदद करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास जरूरी सैन्य संसाधन नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'ज्यादातर देशों के पास नौसेना या पर्याप्त क्षमता नहीं है। इसलिए यह जिम्मेदारी अमेरिका पर आती है।'

फारस की खाड़ी में 23 हजार नाविक फंसे

रुबियो ने बताया कि फारस की खाड़ी में करीब 23,000 नागरिक नाविक फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा, 'वे अलग-थलग हैं, भूखे हैं और बेहद असुरक्षित स्थिति में हैं। अब तक कम से कम 10 नाविकों की मौत हो चुकी है।' फारस की खाड़ी में फंसे ये नाविक 87 देशों से हैं। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका की कार्रवाई आक्रामक नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम तब तक गोली नहीं चलाते जब तक हम पर हमला न हो। अगर हमारे सैनिकों को खतरा हुआ तो हम जवाब देंगे, लेकिन हमारी कार्रवाई रक्षात्मक है।'

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