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बिहार में दिवाली-छठ और चुनाव का पैटर्न कब से हुआ हिट? हर बार 'सुशासन बाबू' का कैसे बजा डंका

 Written By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Oct 08, 2025 02:46 pm IST,  Updated : Oct 10, 2025 09:42 am IST

बिहार में इस बार चुनाव छठ के ठीक बाद यानी 6 नवंबर और 11 नवंबर को हैं। जबसे चुनाव छठ या दिवाली के आस पास होते हैं और सीएम नीतीश ही बनते रहे हैं। तो क्या इस बार भी छठ के बाद चुनाव नीतीश के लिए लकी साबित होगा?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार- India TV Hindi
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार Image Source : FILE PHOTO (SOCIAL MEDIA)

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया गया है, जो दिवाली और छठ के तुरंत बाद होने वाला है। रिजल्ट भी झटपट आ जाएगा यानी 14 नवंबर को। बिहार के चुनावी इतिहास के बारे में बात करें तो साल 2000 और इससे पहले बिहार में विधानसभा के चुनाव फरवरी में होते थे, लेकिन 2005 में इसका पैटर्न बदला और चुनाव अक्टूबर-नवंबर के महीने में होने लगे। इस पैटर्न के पीछे की वजह शायद ये रही होगी कि अक्टूबर-नवंबर त्योहार का महीना होता है और दिवाली छठ में बिहार के लोग कहीं भी रहें त्योहार में घर जरूर आते हैं। छठ महापर्व पर हर साल देश के किसी कोने विदेशों में रहने वाले बिहारी घर आते हैं।

छठ पूजा में चुनाव का पैटर्न नीतीश के लिए लकी

छठ के आस-पास चुनाव कराने की परंपरा की शुरुआत साल 2005 में हुई थी, जब बिहार में एक ही साल में दो बार चुनाव हुए थे। इस साल पहली बार हुए चुनाव के लिए मतदान फरवरी में तीन चरणों में हुए थे। पहले चरण की वोटिंग तीन फरवरी, दूसरे चरण की वोटिंग 15 फरवरी और तीसरे चरण की वोटिंग 23 फरवरी को हुई थी। इस चुनाव में लालू की राजद को 75, नीतीश की जदयू को 55, और भाजपा को 37 सीटों पर जीत मिली। फिर इसी साल दूसरी बार विधानसभा चुनाव हुए थे जो चार चरणों में हुए थे। 

एक साल में जब दो बार हुए थे विधानसभा चुनाव 

एक साल में दो बार हुए चुनाव के पीछे की वजह ये थी कि पहली बार हुए चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाने के कारण कोई भी राजनीतिक पार्टी सरकार नहीं बना पाई थी और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में फिर से विधानसभा चुनाव हुए और दूसरी बार हुए वोटों का आंकड़ा बदल गया और जदयू को 88, भाजपा को 55, जबकि राजद को 54 सीटों पर जीत मिली और यहीं से नीतीश कुमार की सीएम की कुर्सी कंफर्म हो गई। यानी छठ दिवाली के आसपास होने वाला चुनाव नीतीश के लिए फायदेमंद रहा और तब नीतीश ने शानदार जीत के साथ बीजेपी के साथ मिल कर बिहार में सरकार बनाई थी।

दिवाली-छठ और चुनाव का पैटर्न हो गया हिट

उसके बाद से अबतक हुए विधानसभा चुनावों में यही मिजाज देखने को मिला। साल 2010 का विधानसभा चुनाव जो अक्टूबर में हुआ और छह चरणों में 21, 24 और 28 अक्टूबर और 1, 9 और 20 नवंबर को हुआ था और इस साल छठ पूजा 9 नवंबर से 12 नवंबर के बीच हुई थी। इस बार का नतीजा भी एनडीए के लिए शानदार रहा, बंपर जीत दर्ज करने के बाद फिर से नीतीश कुमार सीएम बने।  

2005, 2010 के बाद आया साल  2015 का विधानसभा चुनाव जो पांच चरणों में हुआ और पहले चरण का मतदान 12 अक्टूबर को, दूसरे चरण का मतदान 16 अक्टूबर को, तीसरे चरण का मतदान 18 अक्टूबर को, चौथे चरण का मतदान एक नवंबर को और पांचवें चरण का मतदान पांच नवंबर को संपन्न हुआ था। इस बार छठ पूजा 15 नवंबर से 18 नवंबर के बीच हुई थी। मतों की गिनती 24 नवंबर को हुई थी। फिर से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने।

इस बार भी नीतीश होंगे सीएम?

साल 2020 में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग तीन चरणों में हुई थी, पहला चरण 28 अक्टूबर को, दूसरा चरण तीन नवंबर को और तीसरा चरण सात नवंबर को हुआ था। फिर नीतीश कुमार ही सीएम बने और इस बार यानी साल 2025 में एक बार फिर उसी पैटर्न पर चुनाव हो रहे हैं और दिवाली, छठ पूजा के बाद पहले चरण की वोटिंग छह नवंबर और दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को है। एनडीए ने फिर से इस बार के चुनाव में नीतीश को ही सीएम फेस बनाया है। छठ और दिवाली का त्योहार क्या इस बार भी नीतीश कुमार के लिए लकी साबित होगा और वे फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे। 

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