Baisi Assembly Election 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। दो चरणों में 6 नवंबर और 11 नवंबर को चुनाव के लिए वोटिंग होगी। सभी दल मतदाताओं को लुभाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने कई नई योजनाओं की घोषणा कर जनता को साधने का प्रयास किया है। इस चुनाव में कुछ और पार्टियां भी चुनावी मैदान में उतर रही हैं, जिनमें प्रशांत किशोर की नई पार्टी 'जन सुराज' और अरविंद केजरीवाल की 'आम आदमी पार्टी' (आप) प्रमुख हैं। इन नई पार्टियों के आने से मुकाबला और भी रोचक होने की उम्मीद है।
अगर हम बिहार की बैसी विधानसभा सीट की बात करें, तो यह पूर्णिया जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र है। यह किशनगंज लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है और अपने राजनीतिक उतार-चढ़ाव एवं बदलते समीकरणों के लिए जाना जाता है। इस सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है, जहां विभिन्न पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिला है। यहां पर दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोटिंग होगी।
2020 के बिहार चुनाव में यहां से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के नेता सैयद रुकनुद्दीन अहमद ने जीत हासिल की थी, जो 2022 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए। वे उन चार AIMIM विधायकों में से थे, जिन्होंने अपनी पार्टी छोड़कर RJD का दामन लिया था।
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बैसी सीट पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उम्मीदवार सैयद रुकनुद्दीन अहमद ने जीत दर्ज की थी, जिन्हें 68,416 वोट मिले थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार विनोद कुमार को 16,373 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार विनोद कुमार को 52,043 वोट मिले थे। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व विधायक अब्दुस सुभान तीसरे स्थान पर रहे थे।
2020 बिहार विधानसभा चुनाव के अनुसार, बिहार की बैसी सीट पर कुल 2,66,574 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें पुरुष 1,39,772 और महिला मतदाताओं की संख्या 1,26,802 थी।
बैसी विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1952 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 1957 का चुनाव हुआ और एक बार फिर यह सीट कांग्रेस ने जीती। 1962 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से हसीबुर्रहमान ने जीत दर्ज की। 1967 से 1977 तक यह सीट अस्तित्व में नहीं थी।
1980 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सैयद मोइनुद्दीन अहमद ने जीत हासिल की। इसके बाद 1985 के चुनाव में अब्दुस सुभान ने लोकदल के टिकट पर चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने यहां से 1990 के चुनाव में जनता दल के उम्मीदवार के तौर पर अपनी जीत बरकरार रखी। वहीं, 1995 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की और सैयद मोइनुद्दीन अहमद ने चुनाव जीता।
इस साल इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के संतोष कुशवाहा ने जीत का परचम लहराया। वहीं, 2015 के चुनाव में RJD ने वापसी की और अब्दुल सुभान ने एक बार फिर से जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी के विनोद कुमार को हराया।
यह चुनाव बैसी के चुनावी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश की और पार्टी के प्रत्याशी सैयद रुकनुद्दीन अहमद ने जीत दर्ज की, जो बाद में आरजेडी में शामिल हो गए।
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