बाराचट्टी: बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। बाराचट्टी विधानसभा सीट बिहार की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है। यह गया जिले में आती है। 2020 के विधानसभा चुनावों में यह सीट हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने जीती थी। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) की उम्मीदवार ज्योति देवी ने राष्ट्रीय जनता दल की समता देवी को 6318 वोटों के अंतर से हराया था। इस सीट पर इस साल विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। इस बार बिहार की सियासत में काफी कुछ नया होने वाला है। एक तरफ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज मैदान में है, वहीं दूसरी तरफ आरजेडी से निष्कासित तेज प्रताप यादव भी चुनाव में उतरने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
क्या हैं साल 2020 और 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजे?
बिहार के 243 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक बाराचट्टी भी है। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां से HAM की ज्योति देवी जीती थीं। ज्योति देवी को कुल 72491 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रही राजद की समता देवी को कुल 66173 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर रहीं लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) की उम्मीदवार रेणुका देवी को 11244 वोट मिले थे।
साल 2015 के विधानसभा चुनावों में राजद की समता देवी ने जीत हासिल की थी। तब उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) की सुधा देवी को 19126 वोटों के मार्जिन से हराया था। तब समता देवी को कुल 70909 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहीं सुधा देवी को कुल 51783 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर रहे बसपा के उम्मीदवार हरेंद्र प्रसाद को 7999 वोट मिले थे।
कैसा होगा साल 2025 का चुनाव?
1957 में अलग विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद से बराचट्टी में 1996, 2003 के उपचुनाव सहित 18 चुनाव हो चुके हैं। कांग्रेस और राजद ने 4-4 बार जीत दर्ज की, समाजवादी धारा की तीन अलग‑अलग पार्टियां एक‑एक बार, जनता दल और जेडीयू 2-2 बार, जबकि जनता पार्टी, इंडियन पीपुल्स फ्रंट और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) एक‑एक बार विजयी रहे। 2015 और 2020 दोनों चुनावों में उसने जीत दर्ज की। 2020 का चुनाव रोचक रहा जिसमें शीर्ष चारों प्रत्याशी महिलाएं थीं। HAM की ज्योति देवी ने राजद की समता देवी को हराया था।
देखना ये होगा कि इस बार बिहार की जनता किस पार्टी पर अपने भरोसे की मुहर लगाती है। वैसे इस बार का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि नई सियासी पार्टी जनसुराज भी अपना भाग्य आजमा रही है।