बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज है। नेताओं की बयानबाजी शुरू हो गई है। जनसभाओं का दौर शुरु हो गया है। बिहार की खास सीटों की बात करें तो कुम्हरार सीट इनमें से एक है। बिहार की राजधानी पटना के शहरी इलाके में बसी कुम्हरार विधानसभा सीट राज्य की प्रमुख शहरी विधानसभा सीट है।
पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है ये सीट
2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई यह सीट पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। पूरी तरह से शहरी क्षेत्र वाली विधानसभा सीट है। पहले इसे पटना सेंट्रल के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब कुम्हरार के नाम से मशहूर है।
प्राचीन पाटलिपुत्र की याद दिलाती है ये सीट
यह क्षेत्र प्राचीन पाटलिपुत्र की याद दिलाता है, जहां मौर्य साम्राज्य का केंद्र रहा। यहां पटना नगर निगम के 8 वार्ड और ग्रामीण ब्लॉक का एक आउटग्रोथ क्षेत्र शामिल है, जहां ट्रैफिक, कचरा प्रबंधन, बुनियादी सुविधाएं और रोजगार जैसे मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं।
जानिए इस सीट का जातीय समीकरण
साल 2011 की जनगणना के अनुसार, कुल आबादी लगभग 4.33 लाख है, जिसमें 100% शहरी आबादी है। अनुसूचित जाति (SC) की हिस्सेदारी 7.07% और अनुसूचित जनजाति (ST) की 0.34% है। 2024 के मतदाता सूची के मुताबिक, यहां 4.37 लाख से अधिक मतदाता हैं और 377 मतदान केंद्र हैं।
कुम्हरार सीट शहरी केंद्र होने के कारण विभिन्न समुदायों का मिश्रण है। कायस्थ वोटरों की मजबूत संख्या बीजेपी जैसी पार्टियों के लिए फायदेमंद साबित होती है। इसके अलावा, भूमिहार समुदाय की भी उपस्थिति है, जो ऊपरी जाति का हिस्सा है और विकास मुद्दों पर वोटिंग पैटर्न निर्धारित करता है। OBC समुदायों में अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) की अच्छी संख्या है, जबकि मुस्लिम मतदाता लगभग 11-12% हैं, जो विपक्षी दलों की ओर अपनी झुकाव रखते हैं। SC मतदाता 7-8% के आसपास हैं, जो महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इस सीट पर बीजेपी की मजबूत पकड़
पिछले तीन बार के चुनावों में यहां से बीजेपी की लगातार जीत हो रही है। कुम्हरार विधानसभा सीट के पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2010, 2015 और 2020) में बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत रखी है। यह सीट 2010 से बीजेपी का अभेद्य किला बनी हुई है। नीचे मुख्य नतीजे दिए गए हैं...
बीजेपी के उम्मीदवार ने आरजेडी के प्रत्याशी को हराया
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी के उम्मीदवार अरुण कुमार सिन्हा ने आरजेडी के उम्मीदवार धर्मेंद्र कुमार को हराया था। अरुण कुमार सिन्हा को 81,400 वोट मिले थे। आरजेडी के उम्मीदवार धर्मेंद्र कुमार को 54,937 वोट मिले थे।
अरुण कुमार सिन्हा ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराया
साल 2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी के उम्मीदवार अरुण कुमार सिन्हा को 87,792 वोट मिले थे। बीजेपी उम्मीदवार ने कांग्रेस के प्रत्याशी अकील हैदर को हराया था।
2010 में अरुण कुमार सिन्हा ने 67808 वोटो से दर्ज की जीत
2010 के विधानसभा चुनाव में अरुण कुमार सिन्हा को 83,425 वोट मिले थे। बीजेपी के उम्मीदवार ने लोजपा उम्मीदवार मोहम्मद कमाल परवेज को 67808 वोटों से हराया था। 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में ये काफी बड़ी जीत थी।