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गोपालगंज में 53 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज, एक सप्ताह बाद शुरू होगी विभागीय कार्रवाई

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jan 18, 2025 04:19 pm IST,  Updated : Jan 18, 2025 04:19 pm IST

गोपालगंज से पहले मुजफ्फरपुर में 134 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इन पुलिस अधिकारियों का तबादला हो चुका है, लेकिन अब तक इन्होंने केस की फाइल नए पुलिस अधिकारी को नहीं सौंपी है।

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बिहार पुलिस के जवान (प्रतीकात्मक तस्वीर) Image Source : X/BIHAR POLICE

बिहार के गोपालगंज जिले में 53 से अधिक पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि इस अधिकारियों ने ट्रांसफर के बाद केस फाइल नए अधिकारी को ट्रांसफर नहीं की है। इस वजह से कई मामले लंबे समय से अटके पड़े हैं। इसी वजह से इन अधिकारियों के खिलाफ ट्रांसफर के बाद भी उनके स्थान पर आने वाले अधिकारी को केस फाइल नहीं सौंपने, कई मामलों की जांच में बाधा डालने के आरोप में मामले दर्ज किए गए हैं। 

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिले के चार थानों में 53 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।  गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने बताया कि अगर वे अगले एक सप्ताह में मामलों को सौंपने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जाएगी। 

मुजफ्फरपुर में 134 पुलिस अधिकारियों पर दर्ज हुआ था मामला

जिला पुलिस से जुड़े सूत्रों ने कहा कि यह पाया गया कि कई मामलों में जांच लटकी हुई है, क्योंकि तत्कालीन जांच अधिकारियों (कुल 53) का तबादला हो गया और उन्होंने फाइलें अन्य अधिकारी को नहीं सौंपीं। सभी 53 पुलिस अधिकारियों पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले मुजफ्फरपुर जिले में 134 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उनके नए पदभार ग्रहण करने वाले स्थानों पर दस्तावेज ले जाने, 900 से अधिक मामलों की जांच में बाधा डालने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

मुजफ्फरपुर में 943 केस फाइल को लेकर दर्ज हुआ था मामला

पिछले महीने मुजफ्फरपुर में 134 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इन पुलिसकर्मियों पर 943 मामलों की जांच में बाधा बनने का आरोप था। संबंधित अधिकारियों ने ट्रांसफर के बाद 943 केस की फाइल नए अधिकारियों को नहीं सौंपी थी। इस कारण पांच से दस साल से अधिक समय से सैकड़ो केस पेंडिंग पड़े हुए हैं और पीड़ित न्याय के लिए दौड़ते-दौड़ते थक कर घर बैठ गए। (इनपुट- पीटीआई भाषा)

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