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पप्पू यादव ने 9 जुलाई को बुलाया बिहार बंद, चुनाव से पहले खेला ये ‘मास्टरस्ट्रोक’!

 Reported By: Nitish Chandra Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jul 04, 2025 02:19 pm IST,  Updated : Jul 04, 2025 02:32 pm IST

बिहार में चुनाव आयोग की विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर पप्पू यादव ने 9 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान किया है। विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यकों और पिछड़ों को वोटर सूची से हटाने की साजिश बता रहे हैं।

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पप्पू यादव। Image Source : PTI

पटना: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इस प्रक्रिया के विरोध में 9 जुलाई 2025 को बिहार बंद और चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अपने इस कदम के जरिए पप्पू यादव ने बिहार चुनावों से ऐन पहले 'मास्टरस्ट्रोक' खेलने की कोशिश की है।

क्यों शुरू हुआ यह पूरा विवाद?

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का आदेश दिया, जो 25 जून से 25 जुलाई 2025 तक चलेगा। इस प्रक्रिया के तहत, बिहार के लगभग 8 करोड़ मतदाताओं को अपनी नागरिकता और पात्रता साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे, जैसे जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मूल निवास प्रमाण पत्र, या 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई सरकारी दस्तावेज। कांग्रेस, RJD और AIMIM समेत कई विपक्षी दलों का दावा है कि यह प्रक्रिया अलोकतांत्रिक है और इसका उद्देश्य गरीब, दलित, पिछड़े, और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को सूची से हटाना है। तेजस्वी यादव ने इसे 'लोकतंत्र पर हमला' करार दिया है।

पप्पू यादव ने इस मुद्दे पर क्या कहा?

पप्पू यादव ने इस पूरे मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, '9 जुलाई को हम पूरा बिहार बंद करेंगे। हम चुनाव आयोग के कार्यालय को घेरेंगे। हम आज हाई कोर्ट जा रहे हैं, मामला दायर करेंगे। हम इस पूरी लड़ाई में कांग्रेस के साथ हैं। NDA सरकार हमारे लोकतांत्रिक अधिकार छीन रही है। वोट देना हर आदमी का मौलिक अधिकार है। यह सरकार चुनाव आयोग के माध्यम से गरीबी दलित और अति पिछड़ा के वोट देने के अधिकार को छीनना चाहती है। चुनाव आयोग तो RSS का कार्यालय है। यहां RSS के कहने पर ही वोटर लिस्ट तैयार होती है।'

पप्पू यादव ने क्यों ठोकी ताल?

पप्पू यादव, जो बिहार की राजनीति में एक मुखर नेता के रूप में जाने जाते हैं, इस मुद्दे को उठाकर कई स्तरों पर लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अपनी जन अधिकार पार्टी का कांग्रेस में विलय कर चुके पप्पू यादव इस आंदोलन के जरिए बिहार की जनता, खासकर युवाओं, दलितों, और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी लोकप्रियता और प्रासंगिकता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। पप्पू यादव पहले भी ज्वलंत मुद्दों को उठा चुके हैं और कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि उन्हें इसका लाभ लोकसभा चुनावों में मिला था, जब वह निर्दल लड़कर भी जीत गए थे।

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