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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: EOW ने चौथा पूरक आरोप पत्र दाखिल किया, 29 आबकारी अधिकारियों को बनाया आरोपी

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jul 07, 2025 11:43 pm IST,  Updated : Jul 07, 2025 11:43 pm IST

आर्थिक अपराध शाखा ने चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में 29 आबकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया है। इनमें से सात अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। ये अधिकारी उन जिलों में नियुक्त थे, जहां शराब बिक्री में गड़बड़ी की गई।

Representative Image- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : SORA AI

छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने सोमवार को चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी। इसमें 29 आबकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। 2100 करोड़ रुपये का शराब घोटाला राज्य में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था। ईओडब्ल्यू के एक बयान में कहा गया है कि राजधानी रायपुर की एक विशेष अदालत के समक्ष चार्जशीट दायर की गई, जिसमें जिला आबकारी अधिकारियों, सहायक आयुक्तों और उपायुक्त आबकारी और सहायक जिला आबकारी अधिकारियों सहित 29 आबकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। इनमें सात रिटायर हो चुके हैं। 

ईओडब्ल्यू के बयान के अनुसार जांच में जानकारी मिली है कि 2019 से लेकर 2023 के दौरान ये अधिकारी उन 15 बड़े जिलों में जिला प्रभारी अधिकारी या अन्य पदों पर कार्यरत थे, जहां शासकीय शराब की दुकानों में कर चुकाए गए शराब के समानांतर, बिना लेखांकन के और बिना शुल्क का भुगतान किए शराब की बिक्री की गई। वहीं कुछ अधिकारी इस अवैध शराब बिक्री के लिए राज्य स्तर पर समन्वय करते थे। 

15 जिलों में ज्यादा थी शराब की खपत

बयान में कहा गया है कि जांच के दौरान जानकारी मिली कि राज्य स्तर पर बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर, 15 ऐसे बड़े जिलों का चुनाव किया गया था, जिसमें देशी शराब की खपत अधिक थी। उन चिन्हित जिलों में ऐसे देशी शराब की दुकान, जिसमें शराब की खपत ज्यादा थी, उनमें आबकारी सिंडिकेट के निर्देश के मुताबिक डिस्टलरियों में अतिरिक्त शराब निर्माण कर, ट्रकों में भरकर शराब सीधे चुने हुए जिलों के अधिक बिक्री वाले देशी शराब दुकानों में भेजे जाते थे। इस तरह की शराब बिना किसी प्रकार का शासकीय शुल्क चुकाए, नियमतः डिस्टलरी से वेयर हाउस/शासकीय डिपो से मांग के आधार पर दुकानों में लायी गई वैध शराब के समानांतर बेची गई। 

बी-पीर्ट शराब से करोड़ों की कमाई

बयान में कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में सेल्समैन, सुपरवाइजर, निचले स्तर के आबकारी अधिकारी, दुकान प्रभारी अधिकारी और जिला प्रभारी आबकारी अधिकारी शामिल थे। इस तरह की शराब को 'बी-पार्ट शराब' कहा जाता था। इस शराब की बिक्री की राशि अलग से एकत्र की जाती थी और जिला स्तर पर जिला प्रभारी आबकारी अधिकारी के माध्यम से सिंडिकेट को सौंप दी जाती थी। बयान में कहा गया है कि लगभग दो सौ लोगों से लिए बयान और डिजिटल साक्ष्य के आधार पर जानकारी मिली कि तीन साल की अवधि में शासकीय शराब दुकानों में आरोपी अधिकारियों की शह पर लगभग 60,50,950 पेटी देशी शराब जिसकी कीमत 2174 करोड़ रुपये अनुमानित है, बेची गई है। 

3200 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो सकता है घोटाला

बयान के अनुसार, इसका एक निश्चित हिस्सा जिले में पदस्थ अधिकारी/कर्मचारियों के साथ-साथ दुकान के सेल्समैन और सुपरवाइजरों को भी मिलता था। बयान में कहा गया है कि पूर्व गणना के आधार पर यह ‘शराब घोटाला’ सभी तरह के कमीशन, दुकानों में बिना शुल्क चुकाए अतिरिक्त देशी शराब की बिक्री को जोड़कर लगभग 2161 करोड़ रुपये का माना जा रहा था। लेकिन इस नई जांच के आधार पर घोटाले की संपूर्ण राशि 3200 करोड़ रुपये से भी अधिक होने की संभावना है। इसमें कहा गया है कि विदेशी शराब पर सिंडिकेट द्वारा लिये गये कमीशन का गहन विश्लेषण ईओडब्ल्यू के द्वारा अलग से किया जा रहा है। 

अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार

सप्लीमेंट्री चार्जशीट के साथ राज्य की एजेंसी ने पांच आरोप पत्र दायर किए हैं तथा इस मामले में कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, विजय भाटिया सहित 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रवर्तन निदेशालय, इसमें धन शोधन के पहलू की जांच कर रहा है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह घोटाला 2019 और 2022 के बीच हुआ था, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का शासन था। (इनपुट- पीटीआई)

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