Wednesday, January 21, 2026
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सीएम विष्णु देव साय ने शुरू की जल संरक्षण की पहल, राजनांदगांव की महिला सरपंच को सराहा

सीएम साय ने बताया कि राजनांदगांव की महिला सरपंच ने सूखे हुए हैंडपंपों को पुनर्जीवित किया। उनके इस प्रयास की सराहना केंद्र सरकार ने भी की और इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की।

Edited By: Shakti Singh
Published : Oct 09, 2025 09:28 pm IST, Updated : Oct 09, 2025 09:30 pm IST
Vishno deo Sai- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT सीएम विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को कहा कि जल है तो कल है, और जल से ही कल संवरेगा। जल संरक्षण के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा, तभी हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख पाएंगे। रायपुर के ओमाया गार्डन में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए सीएम साय ने जल कलश पर जल अर्पित कर जल संचयन का संदेश दिया।

सुजलाम भारत के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनेक अवसरों पर जल संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। जल संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता की कमी इस संकट को और गहरा कर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में लोग अपने-अपने ढंग से जल संचयन के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मंचों के माध्यम से सभी अपने अनुभव साझा कर पाएंगे, जो अंततः नीति निर्माण में भी निर्णायक सिद्ध होंगे।

राजनांदगांव की महिला सरपंच की कहानी सुनाई

मुख्यमंत्री साय ने अपने राजनांदगांव प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि एक महिला सरपंच ने स्वप्रेरणा से सूख चुके हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उनके इस अभिनव प्रयास की सराहना केंद्र सरकार द्वारा भी की गई और इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरण हमें प्रेरित करते हैं। हम सभी को मिलकर जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से प्राप्त होने वाले सुझाव और इनपुट आगामी कार्ययोजनाओं के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।

धरती को सिंचित करने का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पृथ्वी के प्रतीक स्वरूप स्थापित कलश में केलो नदी का पवित्र जल अर्पित किया और जल संरक्षण एवं संचयन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” और हमारी पावन नदियां धरती को सींचकर जीवनदायिनी बनाती हैं। इन्हीं नदियों से हमारी संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व की पहचान जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ की नदियां (महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, केलो) प्रदेश की जीवनरेखाएं हैं। ये नदियां न केवल धरती को उर्वर बनाती हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और जीवन के हर क्षेत्र को संजीवनी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी रूपी कलश में केलो नदी का जल अर्पण इस बात का प्रतीक है कि हमें जल की हर बूंद का सम्मान करना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सहेजकर रखना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण के इस संकल्प को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि छत्तीसगढ़ की धरती सदैव हरियाली और समृद्धि से लहलहाती रहे।

300 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन

जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम की संकल्पना की गई है। विभिन्न विभागों को एक-एक थीम पर संगोष्ठी आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल संचयन विषय पर इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 300 से अधिक लोगों ने अपना पंजीयन कराया है। ये लोग जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं। जल संरक्षण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। पिछले एक वर्ष में जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों ने जल संचयन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अब तक साढ़े तीन लाख संरचनाओं का निर्माण हुआ है, जिससे भू-जल स्तर बढ़ा है।

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