दिल्ली में डीयू की छात्रा पर एसिड अटैक की झूठी कहानी का पर्दाफाश हो चुका है। लड़की के पिता ने बताया है कि उसकी बेटी घर से टॉयलेट क्लीनर लेकर गई थी और वही अपने हाथों में डाल लिया। इसके बाद एसिड अटैक की बात कही और इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंची। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि एक बाइक में सवार तीन लोगों ने उस पर हमला किया था। उसने खुद को बचाने के लिए हाथ आगे किए। चेहरा बच गया, लेकिन हाथ झुलस गए। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पुलिस का कहना है कि जब लड़की ने गाड़ी का नंबर तक बता दिया तो उन्हें संदेह हुआ। आमतौर पर लड़कियां हमलावर को भी ठीक से नहीं देख पाती हैं, लेकिन यहां पीड़िता ने तीनों हमलावरों के नाम बताए। उसे यह भी बता था कि कौन गाड़ी चला रहा था, कौन पीछे बैठा था और कौन बीच में था। इनमें से किसके हाथ में बोतल थी और किसने एसिड फेंका। इस वजह से पुलिस ने पीड़िता से ही पूछताछ शुरू की।
घटनास्थल पर जाकर हुआ संदेह
पुलिस जांच करने के लिए घटनास्थल पर पहुंची तो दीवार पर एसिड का कोई निशान नहीं मिला। पीड़िता के हाथ के अलावा पूरे शरीर पर कहीं एक बूंद तक नहीं गिरी थी। इसके बाद पुलिस का शक गहरा गया। आरोपियों से पूछताछ की गई तो पूरे मामले का खुलासा हो गया। घटना के समय दो आरोपी मेरठ और मुख्य आरोपी करोलबाग में था। मुख्य आरोपी ने बताया कि लड़की के पिता अकील के यहां उसकी बीवी काम करती थी, जिसके साथ अकील ने दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने दो दिन पहले ही एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद अकील ने उसके पति को फंसाने के लिए साजिश रची।
लड़की ने जिन दो अन्य लड़कों पर आरोप लगाया था। उनके परिवार के साथ अकील का जमीन विवाद चल रहा था। इसी वजह से अकील ने एसिड अटैक का प्लान बनाया और अपनी लड़की को मोहरा बनाकर तीनों लड़कों को फंसा दिया।
कैसे की प्लानिंग?
अकील के प्लान के अनुसार लड़की घर से अपने भाई के साथ निकली थी। उसके पास टॉयलेट क्लीनर था। लड़की के भाई ने उसे कॉलेज के पास छोड़ा। इसके बाद उसने ई-रिक्शा पकड़ा। वह घटना स्थल पर पहुंची और अपने हाथ में टॉयलेट क्लीनर एसिड डालकर अस्पताल पहुंच गई। इसके बाद उसने एसिड अटैक की कहानी सुनाई। हालांकि, पुलिस को शक हुआ तो जांच में हकीकत सामने आ गई।
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