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केजरीवाल सरकार का बड़ा फैसला, अस्पतालों से मुक्त होंगे अटैच किए गए होटल

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jul 29, 2020 11:59 am IST,  Updated : Jul 29, 2020 12:03 pm IST

दिल्ली में हालात काबू होते देख कर अब सीएम अरविंद केजरीवाल ने उन होटल्स को मुक्त करने की फैसला लिया है, जिन्हें कोरोना की वजह से टेक ओवर किया गया था।

केजरीवाल सरकार का बड़ा फैसला, अस्पतालों से मुक्त होंगे अटैच किए गए होटल- India TV Hindi
केजरीवाल सरकार का बड़ा फैसला, अस्पतालों से मुक्त होंगे अटैच किए गए होटल Image Source : PTI/FILE

नई दिल्ली: दिल्ली में कोरोना वायरस के एक्टिव मामलों की संख्या कम होती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन मिलने वाले कोरोना मरीजों की संख्या में भी कमी आई है। दिल्ली में हालात काबू होते देख कर अब सीएम अरविंद केजरीवाल ने उन होटल्स को मुक्त करने की फैसला लिया है, जिन्हें कोरोना की वजह से टेक ओवर किया गया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "कुछ होटल्स को COVID-19 बेड की संख्या बढ़ाने के लिए अस्पतालों से जुड़ा गया था। सुधार की स्थिति और पिछले कई दिनों से खाली पड़े सभी होटल्स के बिस्तरों को देखते हुए, अब इन होटलों को मुक्त किया जा रहा है।" 

दरअसल, दिल्ली के निजी अस्पतालों ने राजधानी में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में दिख रही गिरावट और खुद को हो रहे वित्तीय नुकसान के मद्देनजर केजरीवाल सरकार से कुछ कोविड-19 केन्द्रों को गैर कोविड केंद्रों में तब्दील करने का आग्रह किया था। कई अस्पतालों का कहना था कि उनके यहां कोविड-19 रोगियों के लिये तय बिस्तरों में से आधे से ज्यादा बिस्तर खाली पड़े हैं क्योंकि काफी संख्या में रोगियों को घरों में पृथक रखा गया है।

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कोविड-19 रोगियों के लिये 650 बिस्तर हैं, जिनमें से 551 खाली हैं। दूसरे अस्पतालों का भी यही हाल है। बत्रा अस्पताल में 502 में से 465 और वेंकटेश्वर अस्पताल में 429 में से 397 बिस्तर खाली पड़े हैं। इसी तरह, मैक्स अस्पताल की शालीमार बाग शाखा में 350 में से 220 और साकेत शाखा में 216 में से 162 बिस्तर खाली हैं।

दिल्ली-एनसीआर में संचालित फोर्टिस हेल्थकेयर के एक प्रवक्ता ने कहा कि कोरोना वायरस रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराने के मामलों में धीरे-धीरे कमी आ रही है और फोर्टिस के अधिकतर अस्पताल या तो पूरी तरह या आंशिक रूप से कोविड-19 केंद्रों के रूप में काम कर रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा कि गंभीर मामलों को छोड़कर अन्य सर्जरी और उपचार मौटे तौर नहीं किये जा रहे हैं, लिहाजा गैर-कोविड बिस्तरों पर रोगियों की संख्या कम है। 

प्रवक्ता ने कहा , ''जरूरत है कि अस्पतालों को अब उनके अनुकूल काम करने दिया जाए। हमने दिल्ली सरकार से सभी अस्पतालों में ऐच्छिक सर्जरी और गैर-कोविड सेवाएं फिर से शुरू करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।'' बता दें कि दिल्ली कोरोना ऐप के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी के निजी और सरकारी अस्पतालों में कोविड-19 रोगियों के लिये कुल 15,538 बिस्तर हैं, जिनमें से केवल 2,783 बिस्तरों पर ही रोगी हैं।

दिल्ली हार्ट एंड लंग इंस्टिट्यूट (डीएचएलआई) के अध्यक्ष केके सेठी के अनुसार अस्पताल का एक पूरा तल कोविड-19 रोगियों के लिये है, लेकिन कई बिस्तर खाली पड़े हैं। इसके अलावा, दूसरी समस्याओं से जूझ रहे रोगी वायरस की चपेट में आने के डर से अस्पतालों में नहीं आ रहे। उन्होंने कहा कि इससे नुकसान बढ़ गया है और संचालन लागत भी पहले के मुकाबले बढ़ गई है। उन्होंने कहा, ''हम बैंकों से कर्ज ले रहे हैं और यह कर्ज अब करोड़ों रुपये का हो गया है।''

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