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दिल्ली: मदद मांगने थाने पहुंचा इंटरफेथ कपल, पुलिस ने दोनों को जबरन अलग कर दिया, HC ने मांगा जवाब

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jul 25, 2025 11:55 pm IST,  Updated : Jul 25, 2025 11:55 pm IST

दिल्ली पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने एक इंटरफेथ कपल को जबरन अलग कर दिया। जबकि, कपल उनके पास मदद मांगने पहुंचा था। हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस से जवाब मांगा है।

Delhi high court- India TV Hindi
दिल्ली हाई कोर्ट Image Source : DELHI HIGH COURT

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक इंटरफेथ कपल की शिकायत पर दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। कपल ने शिकायत में कहा है कि वह दोनों अलग-अलग धर्म से हैं और उन्हें कई तरह की धमकियां मिल रही थीं। इससे परेशान होकर वह दिल्ली पुलिस के पास मदद मांगने गए, लेकिन पुलिस ने दोनों को जबरन अलग कर दिया। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने संबंधित डीसीपी को मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच करने और शुक्रवार को ही आश्रय गृह में महिला से संपर्क करने का निर्देश दिया। महिला को कथित तौर पर उसके प्रेमी से अलग करने के बाद पुलिस ने आश्रय गृह में रखा है।

न्यायाधीश ने पुलिस अधिकारी को महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसकी इच्छाओं को दर्ज करने का निर्देश दिया। खासकर यह कि क्या वह पुरुष के साथ रहना चाहती है। याचिका के अनुसार, उत्तर प्रदेश के रहने वाले इस जोड़े ने 22 जुलाई को पुलिस सुरक्षा के लिए दिल्ली के दक्षिण-पूर्व जिले के डीसीपी से संपर्क किया था।

प्रेमी जोड़े का आरोप

प्रेमी जोड़े का आरोप है कि पुलिस ने सुरक्षा प्रदान करने या जोड़ों के लिए सुरक्षित घर में रहने की अनुमति देने के बजाय, महिला को जबरन अलग कर दिया गया। महिला का मेडिकल टेस्ट हुआ और बाद में 24 जुलाई को सुबह लगभग 3 बजे उसे एक महिला आश्रय गृह में हिरासत में ले लिया गया। उसने बार-बार ऐसा न करने की अपील की, लेकिन पुलिस ने उसकी बात नहीं मानी। पुरुष वर्तमान में दिल्ली में काम करता है, जबकि महिला 22 जुलाई को दिल्ली आई थी।

हाईकोर्ट का आदेश

न्यायाधीश ने डीसीपी को व्यक्तिगत रूप से सत्यापन के बाद स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायाधीश ने कहा, "उपर्युक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, यह न्यायालय संबंधित डीसीपी को निर्देश देता है कि वह स्वयं सत्यापित एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें, जिसमें 23 और 24 जुलाई, 2025 की घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों का विवरण हो, जिसमें याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर की गई कार्रवाई भी शामिल हो।" न्यायाधीश ने डीसीपी को मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच करने और शुक्रवार को ही महिला आश्रय गृह में महिला से संपर्क करने का निर्देश दिया।

8 अगस्त से पहले मांगी रिपोर्ट

न्यायाधीश ने कहा, "वह उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और उसकी इच्छाओं को दर्ज करेंगे, विशेष रूप से यह कि क्या वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है। यदि वह इसकी पुष्टि करती है, तो दिल्ली पुलिस मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, याचिकाकर्ता और महिला दोनों को आज ही एक सुरक्षित घर में स्थानांतरित करने की उचित व्यवस्था की जाएगी।" न्यायाधीश ने पुलिस को अगली सुनवाई की तारीख 8 अगस्त से पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

2018 से रिश्ते में हैं दोनों

याचिका के अनुसार, दंपति कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से और बिना किसी हस्तक्षेप के विवाह करने के अपने अधिकार का प्रयोग करना चाहते थे। इसमें दावा किया गया है कि दंपति 2018 से एक रिश्ते में थे। याचिका में दावा किया गया है, "उनके अंतरधार्मिक संबंधों को पारिवारिक विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, वे संपर्क में रहे और कानूनी तरीकों से अपनी शादी को औपचारिक रूप देने का फैसला किया।"

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