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हैकाथॉन से मिलेगा IIT कानपुर में एडमिशन, बनेंगे साइबर वॉरियर्स, नया कोर्स शुरू

 Published : Jun 12, 2026 11:26 pm IST,  Updated : Jun 12, 2026 11:26 pm IST

IIT कानपुर ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 4 साल का नया कोर्स शुरू किया है, जिसमें चयन हैकाथॉन के जरिए होगा। पहले दो साल पढ़ाई और अगले दो साल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। देश में बढ़ते साइबर हमलों और डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों को देखते हुए यह पहल की गई है।

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IIT कानपुर ने साइबर सुरक्षा पर 4 साल का स्पेशल कोर्स शुरू किया है। Image Source : IITK.AC.IN

कानपुर: देश में हाल ही में नीट परीक्षा पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में गड़बड़ियों के बाद साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऑनलाइन सिस्टम बढ़ने के साथ साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ रहा है। इसी वजह से अब देश में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और साइबर विशेषज्ञ तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में IIT कानपुर ने साइबर सुरक्षा पर 4 साल का खास कोर्स शुरू किया है। इस कोर्स में छात्रों का चयन सामान्य परीक्षा से नहीं होगा, बल्कि एक हैकाथॉन के जरिए किया जाएगा।

कोर्स को 2 हिस्सों में बांटा गया

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हैकाथॉन में छात्रों को साइबर सिस्टम की कमजोरियां पहचानने और उन्हें चुनौती देने वाले काम दिए जाएंगे। जो छात्र इसमें सफल होंगे, उन्हें IIT कानपुर में एडमिशन मिलेगा। इस कोर्स को 2 हिस्सों में बांटा गया है। पहले 2 साल में छात्रों को साइबर सुरक्षा की पढ़ाई कराई जाएगी और उन्हें असली जिंदगी में आने वाली साइबर समस्याओं के बारे में समझाया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी जाएगी। अगले 2 साल में छात्रों को नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े कामों में अनुभव दिया जाएगा, जहां वे असली साइबर खतरों से निपटना सीखेंगे और नए तरीके भी विकसित करेंगे।

IIT कानपुर के डायरेक्टर ने क्या कहा?

IIT कानपुर के डायरेक्टर मणींद्र अग्रवाल ने कहा है कि आज लगभग सभी काम ऑनलाइन हो गए हैं और साइबर हमले आम हो गए हैं। ऐसे में देश को बड़ी संख्या में साइबर विशेषज्ञों और एथिकल हैकर्स की जरूरत है, इसलिए यह नया कोर्स शुरू किया गया है। इस बीच यह भी सामने आया है कि CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में खामी दिखाने वाले छात्र निसर्ग अधिकारी को IIT कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन सेंटर में नौकरी दी गई है, जो साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रतिभा को आगे बढ़ाने की एक मिसाल मानी जा रही है।

साइबर चुनौतियों से निपटने की तैयारी

देश में साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक के क्षेत्र में नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी भी अहम काम कर रही है। यहां साइबर अपराधों की जांच, डिजिटल सबूतों की पहचान और आधुनिक तकनीकों पर काम होता है। यहां पुलिस, सरकारी अधिकारी और सुरक्षा विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस यूनिवर्सिटी में लगभग 70 देशों से लोग प्रशिक्षण लेने आते हैं। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ तैयार करना और इस क्षेत्र में शोध को आगे बढ़ाना है ताकि आने वाले समय की साइबर चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

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