
वैसे तो शाहरुख को खेलों से भी गहरा लगाव था, लेकिन मांसपेशियों में खिंचाव के चलते उनको खेलों से दूर रहने की सलाह दे दी गई। निराशा के ऐसे ही दौर में एक दिन शाहरुख को पता चलता है कि दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में 82 लड़कियों और 10 लड़कों के साथ बैरी जॉन एक प्ले करने वाले है और उनको कुछ अच्छे कलाकारों की तलाश है और शाहरुख इस प्ले से जुड़ने का फैसला करते हैं और बाद में बैरीजॉन से एक्टिंग के गुण सिखने के साथ ही शाहरुख को यह अवसर भी मिल जाता है। मां ने आत्मविश्वास और बड़ा सपना देखना सिखाया, ब्रदर डिसूजा ने जिंदगी के पाठ तो बैरीजॉन ने शाहरुख को एक्टिंग की एबीसीडी सिखाई जिसके बदौलत शाहरुख खान सपनों के शहर मुंबई में बॉलीवुड में अभिनेता बनने का सपना पूरा करने की उड़ान भरने का साहस कर सके।
फौजी और सकर्स जैसे टीवी धारावाहिकों में अपनी पहचान बना रहे शाहरुख खान को सही रास्ता दिखाया विवेक वासवानी ने, जिन्होंने शाहरुख खान को न केवल मुंबई में संघर्ष के दिनों में अपने घर में रहने का ठिकाना दिया साथ ही फिल्म निर्माताओं से मिलवाया और फिल्म में चांस देने के लिए तैयार किया। हेमा मालिनी के निर्देशन में बनीं दिल आसना है फिल्म शाहरुख को सबसे पहले मिली थी, लेकिन दीवाना सबसे पहले रिलीज हुई थी और सुपरहिट रही थी। इस फिल्म में ऋषि कपूर, शाहरुख खान और दिव्या भारती मुख्य भूमिकाओं में थे।
फिल्म राजू बन गया जैंटलमैन के लिए शाहरुख खान को सईद अख्तर मिर्जा ने ब्रेक दिया और एक्ट्रेस जूही चावला को विवेक वासवानी ने यह कहकर फिल्म करने के लिए मनाया था कि नया लड़का है, बेहतरीन कलाकार है बिल्कुल आमिर की तरह, उस वक्त जूही चावला उभरती हुई अदाकारा थी लेकिन उन्होंने शाहरुख को टीवी धारावाहिक सकर्स में अभिनय करते हुए देखा था और वह शाहरुख खान के साथ फिल्म करने के लिए राजी हो गई। दरअसल यहीं वह सबसे खास बात है जिसके चलते शाहरुख खान जूही को अपना सबसे बेहतरीन दोस्त मानते हैं।