नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री कल्कि कोचलीन ने काफी वक्त में बॉलीवुड में अपनी एक खास जगह बना ली है। उन्होंने 2009 में आई फिल्म 'देव.डी' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। स्वच्छंद-अपरंपरागत भूमिकाओं को निभाकर अपनी पहचान बनाने वाली कल्कि का कहना है कि हिंदी सिनेमा में महिला कलाकार अपने दम पर फिल्मों को संभालने में सक्षम हैं। कल्कि का कहना है कि आज के समय में बॉलीवुड फिल्मों की सफलता के लिए अभिनेत्रियां पुरुष कलाकारों पर आश्रित नहीं हैं।
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बॉलीवुड में अपने सात साल के करियर में महिला कलाकारों के किरदारों में आए बदलाव के बारे में कल्कि ने बताया, "मुझे लगता कि इस पहलू में बदलाव हुआ है। 'क्वीन' और 'पीकू' जैसी फिल्मों में महिला किरदारों को मुख्य भूमिकाओं में देखा गया है, जिसमें वे पुरुष कलाकारों पर आश्रित नहीं थी।" कल्कि ने एक साक्षात्कार में बयान दिया कि वह 'किंग्फिशर अल्ट्रा बेंगलोर डर्बी-2016' के लिए पिछले सप्ताह वहां मौजूद थी।
महिला केंद्रित फिल्मों को देखे जाने के चरण के बारे में पूछे जाने पर कल्कि ने कहा, "चरण और चलन इसलिए सामने आते हैं, क्योंकि उनकी उस वक्त जरूरत होती है और मुझे काफी खुशी महसूस होगी, जब इन चीजों की कोई जरूरत नहीं रह जाएगी। महिला आज के समय में सशक्त हैं। जब तक महिलाओं को पहचान की जरूरत होगी, यह चरण और चलन जारी रहेगा।"
थियेटर में भी सक्रिय कल्कि ने 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा', 'ये जवानी है दीवानी' और 'हेप्पी एंडिंग' जैसी फिल्में की हैं और इसमें अपने किरदारों को बेहतरीन रूप से प्रदर्शित किया। कल्कि से जब पूछा गया कि वह व्यावसायिक फिल्में करने में सक्रिय क्यों नहीं हैं? उन्होंने कहा, "मैं ऐसी फिल्में अधिक करना चाहूंगी, अगर मुझे इनके अधिक प्रस्ताव मिलें तो।" देश में व्यावसायिक फिल्मों की तरह समानांतर सिनेमा को लोकप्रियता न मिलने के बारे में पूछे जाने पर कल्कि ने कहा कि इस सवाल का जवाब वितरक प्रणाली में छुपा है।
कल्कि ने कहा, "समानांतर सिनेमा और कम बजट की फिल्मों को थियेटरों में व्यावसायिक फिल्मों की तरह अच्छी संख्या में वितरक नहीं मिलते। इसलिए उनके शो एक या दो दिन के होते हैं। जब तक वितरक छोटी फिल्मों को अधिक पेशकश नहीम करेंगे, हम इस तरह की फिल्मों से पैसे नहीं बना सकते।" अभिनेत्री को कोंकणा सेन शर्मा की आगामी फिल्म 'ए डेथ इन गुंज' में देखा जाएगा। कल्कि ने अभिनेत्री को एक बेहतरीन निर्देशक बताया।