नई दिल्ली: कंगना रनौत कभी अपने माता-पिता के लिए 'अवांछित' संतान थीं, लेकिन आज वह सबकी दुलारी हैं। उन्होंने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर फिल्म जगत में करियर को चुना और यहां एक अलग मुकाम बनाया, खुद को साबित किया। शुरू से ही विद्रोही स्वभाव की कंगना का कहना है कि अब वह मातृत्व के बारे में सोचने लगी हैं।
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कंगना (29) ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मैं पूरी आत्मनिर्भर हूं, लेकिन जब आप अपने उम्र के दूसरे दशक के आखिरी वर्षो में होते हैं तो कहीं न कहीं आपके अंदर मातृत्व की भावना जागने लगती है और आप इसे बहुत ज्यादा महसूस करने लगते हैं कि 'मुझे बच्चे चाहिए'।’ इस ऐक्ट्रेस ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह ऐसी बातें करेंगी लेकिन अब इसे साझा नहीं करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। वह किसी दिन ऐसा होता देखने की उम्मीद कर रही हैं।
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फिल्म 'गैंगस्टर: अ लव स्टोरी' (2006) से फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाली कंगना ने 'क्वीन', 'तनु वेड्स मनु' और 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्सं' से दर्शकों का दिल जीता है। तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली ऐक्ट्रेस आगामी फिल्मों 'रंगून', 'रानी लक्ष्मी बाई' और 'सिमरन' में नजर आएंगी। यह पूछे जाने पर कि क्या बॉलीवुड ने उन्हें सहनशील और धैर्यवान बनाया है तो उन्होंने कहा कि बिल्कुल ऐसा है। उन्हें खुद को अभिव्यक्त करना पसंद है।
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कंगना रीबॉक के 'फिट टू फाइट' अवॉर्ड्स समारोह के लिए यहां आई थीं। उन्होंने यहां विभिन्न क्षेत्रों की ऐसी महिलाओं को सम्मानित किया, जिन्होंने तमाम चुनौतियों से पार पाकर अपने-अपने क्षेत्रों में एक खास मुकाम हासिल किया। कंगना ने बताया कि उनके लिए चुस्त-दुरुस्त रहना बहुत मायने रखता है और जब वह किन्हीं कारणों से ज्यादा दिनों तक एक्सर्साइज या मेडिटेशन नहीं कर पातीं और डाइट के अनुसार अपना खाना नहीं खातीं तो वह अंदर से खालीपन व उदासी अनुभव करती हैं।