सिनेमाई दुनिया के सितारों के बच्चों को आपने अक्सर ही अपने पेरेंट्स की राह पर चलकर फिल्मी दुनिया में संघर्ष करते देखा होगा। लेकिन ऐसे कम ही फिल्मी सितारे हैं जिनके बच्चों ने अपने पेरेंट्स की राह पर चलने से मना कर दिया अपने लिए नया मुकाम हासिल किया। साउथ सिनेमा का एक ऐसा ही स्टार है जिसके बेटे ने ग्लैमर की दुनिया को नहीं बल्कि पढ़ाई के रास्ते को चुना और देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी पास कर IAS अधिकारी का तमगा हासिल किया। साल 2020 में UPSC में 75वीं रैंक लाने वाले ये स्टारकिड कोई और नहीं बल्कि श्रुतंजय नारायण है। कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर कृष्णमूर्ति नारायण जिन्हें चिन्नी जयंत के नाम से भी जाना है के बेटे श्रुतंजय नारायण ने साल 2020 में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी और आईएएस अधिकारी बने थे।
कौन हैं चिन्नी जयंत?
चिन्नी जयंत का असली नाम कृष्णमूर्ति नारायण है और साउथ सिनेमा की दुनिया के बड़े नाम हैं। रजनीकांत से लेकर कई फिल्मी सितारों की फिल्मों में अपनी कॉमेडी से धमाल मचाने वाले एक्टर चिन्नी जयंत ने 1980 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी। साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म 'काई कोडुक्कम काई' में चिन्नी जयंत ने पहली बार कैमरे का सामना किया था। इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक चिन्नी जयंत ने 74 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। रजनीकांत, नागार्जुन से लेकर साउथ सिनेमा के कई बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर कर चुके हैं।
बेटा हीरो नहीं बना आईएएस अधिकारी
बता दें कि चिन्नी जयंत के बेटे ने अपने पिता की तरह फिल्मी दुनिया में अपना करियर नहीं बनाया। बल्कि लीक से हटकर पढ़ाई में मन लगाया और पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद मास्टर्स की डिग्री हासिल की और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। पहली बार जब परीक्षा दी तो निराशा हाथ लगी। लेकिन चिन्नी जयंत के बेटे श्रुतंजय ने भी हार नहीं मानी और रोजाना 10-11 घंटे मेहनत करते रहे। 2 साल की कड़ी मेहनत काम आई और श्रुतंजय ने साल 2020 में अपने दूसरे ही अटेंप्ट में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। इतना ही नहीं श्रुतंजय ने पूरे देश में 75वीं रैंक हासिल की और आज एक आईएएस अधिकारी हैं।
श्रुतंजय ने खुद बताया था सफलता का राज
बता दें कि सिनेमाई विरासत को पीछे छोड़ आईएएस अधिकारी बने श्रुतंजय खुद भी अपनी सफलता का राज यूपीएससी एस्पेरेंट्स के साथ शेयर कर चुके हैं। श्रुतंजय ने बताया था कि वे जब यूपीएससी की परीक्षा में पहली बार फेल हो गए तो उन्होंने स्टार्टअप करने का सोचा था। इतना ही नहीं उस पर काम भी शुरू कर दिया था। स्टार्टअप के साथ ही श्रुतंजय ने अपनी यूपीएससी की तैयारी भी जारी रखी और अगले ही साल फिर से अटेंप्ट दिया। जिसके लिए श्रुतंजय रोजाना 10-11 घंटे पढ़ाई किया करते थे। दूसरे ही अटेंप्ट में श्रुतंजय ने कमाल कर दिया और आईएएस अधिकारी बन गए। आज श्रुतंजय की ये सफलता की जर्नी एक मिसाल है।