अगर आप भी सिनेमा के शौकीन हैं और आपकी तलाश किसी ऐसी कहानी पर जाकर रुकती है जो दिमाग की नसों को झकझोर दे तो आपके लिए एक शानदार खबर है। साउथ फिल्म इंडस्ट्री ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब बात रोंगटे खड़े कर देने वाले क्राइम थ्रिलर की आती है तो उनका कोई मुकाबला नहीं है। हाल ही में कन्नड़ भाषा की बहुप्रतीक्षित साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज 'राक्षस' ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दस्तक दे चुकी है। यह सीरीज केवल एक साधारण पुलिस जांच की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सफर है जो आपको रहस्य, डर और मनोवैज्ञानिक तनाव की गहराइयों में ले जाता है। निर्देशक सुहान प्रसाद की यह कलाकृति कर्नाटक की मलप्रभा नदी के किनारे और ऐतिहासिक यल्लम्मा मंदिर के आसपास की रहस्यमयी घटनाओं पर आधारित है, जहां की शांत लहरों के पीछे एक खौफनाक सच छिपा हुआ है।
कहानी की शुरुआत मलप्रभा नदी के तट पर मिलने वाले आधे सड़े हुए शवों से होती है, जो देखने में किसी वीभत्स मंजर से कम नहीं लगते। शुरुआत में गांव के लोग और प्रशासन इन मौतों को मगरमच्छ के हमलों का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कहानी में एक डार्क मोड़ आता है। गांव की मिट्टी में रचे-बसे अंधविश्वास और स्थानीय मान्यताओं के बीच फंसे इस केस की कमान संभालते हैं सब-इंस्पेक्टर हनमप्पा, जिनका किरदार दिग्गज अभिनेता विजय राघवेन्द्र ने पूरी शिद्दत से निभाया है। हनमप्पा को पूरा यकीन है कि इन मौतों के पीछे कोई जानवर नहीं, बल्कि एक बेहद चालाक और क्रूर इंसानी दिमाग है। विजय राघवेन्द्र का अभिनय इतना सजीव है कि आप उनके साथ उस केस की घुटन और तनाव को महसूस करने लगते हैं।
जैसे-जैसे हनमप्पा कातिल की तलाश में आगे बढ़ते हैं, उनकी निजी जिंदगी बिखरने लगती है। केस की जटिलताओं और कातिल के मनोवैज्ञानिक खेल में वे इस कदर उलझ जाते हैं कि अपनी गर्भवती पत्नी के साथ उनके रिश्ते में दरार आने लगती है। सीरीज में केवल अपराध ही नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के मानसिक द्वंद्व को भी खूबसूरती से पिरोया गया है। क्या वह उस 'राक्षस' को पकड़ पाएगा जो अंधविश्वास की आड़ में अपना खेल खेल रहा है? या फिर वह खुद इस रहस्यमयी जाल का हिस्सा बन जाएगा? यही सवाल दर्शकों को अंत तक अपनी स्क्रीन से चिपकाए रखता है।
तकनीकी रूप से यह सीरीज एक मास्टरपीस नजर आती है। सुहान प्रसाद और अपूर्व कुमार के निर्देशन में बना हर एक दृश्य सस्पेंस को बढ़ाता है। सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर एक ऐसा माहौल तैयार करते हैं जो आपको हर वक्त सतर्क रहने पर मजबूर कर देता है। विजय राघवेन्द्र के अलावा मयूरी क्यातारी, अप्पन्ना रामदुर्गा, अविनाश और जहांगीर एमएस जैसे कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से किरदारों में जान फूंक दी है। निर्माण की कमान तरुण सुधीर ने संभाली है, जिन्होंने सुनिश्चित किया है कि सीरीज की क्वालिटी ग्लोबल स्टैंडर्ड की हो।
यदि आप सोच रहे हैं कि इसे कहाँ देखा जाए, तो 'राक्षस' वर्तमान में ZEE5 पर स्ट्रीम हो रही है। हालांकि यह मूल रूप से कन्नड़ भाषा में है, लेकिन अन्य भाषाओं के दर्शकों के लिए सबटाइटल्स की सुविधा मौजूद है। सात एपिसोड की इस सीरीज का पहला एपिसोड मुफ्त में उपलब्ध है, ताकि आप इस डार्क वर्ल्ड की झलक देख सकें और तय कर सकें कि आपका दिल इतना मजबूत है या नहीं। रिलीज के साथ ही इसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है, जिसका अंदाजा इसकी 9.6 IMDb रेटिंग से लगाया जा सकता है। यह रेटिंग समय के साथ बदल सकती है, लेकिन शुरुआती रुझान बताते हैं कि यह सीरीज एक कल्ट क्लासिक बनने की राह पर है। अगर आप 'असुर' या 'पाताल लोक' जैसे डार्क कंटेंट के शौकीन हैं, तो इस वीकेंड 'राक्षस' आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
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