केप टाउन: अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे डच झंडे वाले क्रूज़ जहाज एमवी होंडियस पर दुर्लभ और खतरनाक हंता वायरस का प्रकोप सामने आया है। पिछले एक महीने में जहाज पर 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग बीमार पड़े हैं। कुछ संक्रमित यात्रियों को इलाज के लिए यूरोप भेजा गया है। दुनिया के कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां अब उन यात्रियों और लोगों का पता लगाने में जुटी हैं, जो इस जहाज से उतरने के बाद अपने-अपने देशों लौट चुके हैं या उनके संपर्क में आए थे। फिलहाल जहाज पर 140 से ज्यादा यात्री और क्रू सदस्य मौजूद हैं और जहाज स्पेन के कैनरी द्वीप की ओर बढ़ रहा है।
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आखिर क्या है Hantavirus?
हंता वायरस एक ऐसा संक्रमण है जो आमतौर पर चूहों और इसके जैसे दूसरे जीवों यानी कि 'रोडेंट्स' से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, बहुत कम मामलों में यह इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है। हालांकि WHO का कहना है कि आम लोगों के लिए इसका खतरा फिलहाल कम माना जा रहा है, क्योंकि यह वायरस आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में पाया गया वायरस एंडीज वायरस है, जो हंता वायरस का वही प्रकार है जिसमें इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की आशंका मानी जाती है। यह वायरस मुख्य रूप से अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है।

क्रूज शिप पर कैसे फैला संक्रमण?
1 अप्रैल: अर्जेंटीना से शुरू हुई क्रूज की यात्रा
एमवी होंडियस ने अर्जेंटीना के दक्षिणी शहर उशुआइया से अपनी यात्रा शुरू की। जहाज को अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक महासागर के कई दूरदराज के द्वीपों पर रुकना था।
6 अप्रैल: क्रूज शिप पर पहला यात्री बीमार
यात्रा के दौरान 70 वर्षीय एक डच यात्री को बुखार, सिरदर्द और हल्का दस्त होने लगा। WHO के मुताबिक, जहाज पर चढ़ने से पहले वह अपनी पत्नी के साथ उशुआइया में घूमने गए थे और अर्जेंटीना व चिली के दूसरे इलाकों की यात्रा भी की थी।
11 अप्रैल: क्रूज शिप पर हुई यात्री की मौत
कुछ ही दिनों बाद उस डच यात्री की हालत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में तकलीफ हुई और जहाज पर ही उसकी मौत हो गई। उस समय मौत की असली वजह का पता नहीं चल सका।
15 अप्रैल: नए यात्री जहाज पर चढ़े
जहाज जब दक्षिण अटलांटिक के ब्रिटिश क्षेत्र ट्रिस्टन दा कुन्हा पहुंचा, तब 6 नए लोग जहाज पर सवार हुए। मृत डच यात्री का शव अभी भी जहाज पर ही रखा हुआ था।
24 अप्रैल: शव उतारा गया, कई यात्री उतरे
जहाज जब सेंट हेलेना द्वीप पहुंचा तो मृत यात्री का शव वहां उतारा गया। उसकी पत्नी और 2 दर्जन से ज्यादा यात्री भी वहीं उतर गए।
25 अप्रैल: डच यात्री की पत्नी की हालत बिगड़ी
डच यात्री की पत्नी, जिसमें बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे थे, सेंट हेलेना से दक्षिण अफ्रीका के लिए एक कमर्शियल फ्लाइट में बैठी। उस विमान में कुल 88 यात्री और क्रू सदस्य थे। यह साफ नहीं है कि जहाज से उतरे और कितने लोग उसी फ्लाइट में थे।
26 अप्रैल: डच यात्री की पत्नी की हुई मौत
दक्षिण अफ्रीका पहुंचने के बाद महिला एयरपोर्ट पर दूसरी फ्लाइट पकड़ने की कोशिश कर रही थी। तभी वह अचानक गिर पड़ी और उसकी मौत हो गई।
27 अप्रैल: क्रूज शिप का तीसरा यात्री बीमार
इसी बीच जहाज सेंट हेलेना छोड़ चुका था। जहाज पर एक ब्रिटिश यात्री की तबीयत खराब हो गई। उसे पहले असेंशन द्वीप ले जाया गया और बाद में दक्षिण अफ्रीका पहुंचाया गया। वहां उसे अस्पताल के ICU में भर्ती किया गया। उसमें तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया जैसे लक्षण पाए गए।
28 अप्रैल: एक और यात्री की तबीयत हुई खराब
अफ्रीका के पश्चिमी तट के पास स्थित केप वर्डे की ओर बढ़ते जहाज पर एक जर्मन महिला यात्री भी बीमार पड़ गई।

मई में सामने आया वायरस का सच
2 मई: तीसरी मौत और पहली पुष्टि
जर्मन महिला की जहाज पर मौत हो गई। यह इस वायरस की वजह से हुई तीसरी मौत थी। उसी दिन दक्षिण अफ्रीकी स्वास्थ्य अधिकारियों को ICU में भर्ती ब्रिटिश यात्री की रिपोर्ट मिली, जिसमें हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। पहली बार साफ हुआ कि जहाज पर फैल रही बीमारी हंता वायरस है।
3 मई: 3 मौतों के बाद WHO सक्रिय
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि वह क्रूज़ जहाज पर संदिग्ध हंता वायरस प्रकोप की जांच और निगरानी कर रहा है। उस समय जहाज केप वर्डे के समुद्री क्षेत्र में पहुंच चुका था।
4 मई: दूसरी मृतका में भी वायरस की पुष्टि
दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों ने उस डच महिला के शव की भी जांच कराई, जिसकी एयरपोर्ट पर मौत हुई थी। उसकी रिपोर्ट भी हंता वायरस पॉजिटिव आई। इसके बाद WHO ने इसे आधिकारिक तौर पर प्रकोप माना।
5 मई: केप वर्डे में हुई भारी विवाद
जहाज और केप वर्डे प्रशासन के बीच इस बात को लेकर विवाद हो गया कि बीमार लोगों को उतारने और बाकी यात्रियों को बाहर जाने की अनुमति दी जाए या नहीं। केप वर्डे ने स्वास्थ्यकर्मियों को जहाज पर भेजा, लेकिन किसी को उतरने की अनुमति नहीं दी। जहाज पर दो क्रू सदस्य, जिनमें जहाज का डॉक्टर भी शामिल था, गंभीर रूप से बीमार पाए गए। एक अन्य व्यक्ति को निगरानी में रखा गया।
6 मई: मरीजों को यूरोप भेजा गया
तीनों बीमार लोगों को जहाज से निकालकर यूरोप के विशेष अस्पतालों में भेजा गया। इनमें से 2 की रिपोर्ट हंता वायरस पॉजिटिव आई। इसके बाद जहाज स्पेन के कैनरी द्वीप के लिए रवाना हो गया, क्योंकि स्पेन ने उसे स्वीकार करने की सहमति दे दी थी। उधर, स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने बताया कि सेंट हेलेना में पहले जहाज से उतर चुके एक व्यक्ति की जांच भी पॉजिटिव आई है। इसके साथ ही पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर पांच हो गई।
7 मई: कई देशों में निगरानी और जांच
अब स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, नीदरलैंड, फ्रांस, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के स्वास्थ्य विभाग उन यात्रियों को आइसोलेट कर रहे हैं, जो जहाज से उतरकर घर लौट चुके हैं। साथ ही उन लोगों की भी पहचान की जा रही है, जो इन यात्रियों के संपर्क में आए थे। स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

क्रूज शिप पर तेजी से क्यों फैला वायरस?
पूरे मामले को देखकर यह साफ है कि भले ही यह वायरस इंसानों से इंसानों में आसानी से नहीं फैलता लेकिन क्रूज शिप जैसी बंद जगह पर इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है। चूंकि क्रूज शिप से उतरने के बाद कई लोगों ने यात्रा के अन्य साधनों का भी इस्तेमाल किया, इसलिए कई अन्य लोगों में वायरस के फैलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां अब जहाज से उतर चुके सभी यात्रियों और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी कर रही हैं।