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सूरज ना हो तो क्या होगा? कभी सोचा है आपने...जानिए इस गैस से भरे धधकते गोले के बारे में खास बातें

 Written By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Sep 25, 2023 11:38 pm IST,  Updated : Sep 26, 2023 10:31 pm IST

सूर्य, जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। हिंदू शास्त्र- पुराणों और वेदों में इसे देवता माना गया है। प्रातःकाल में उगते सूरज की उपासना करना और इसके साथ ही डूबते सूर्य को भी अर्घ्य देने की परंपरा रही है। जानिए सूरज के बारे में कुछ रोचक तथ्य-

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गैस से भरा धधकता गोला है सूरज Image Source : FILE PHOTO

EXPLAINER: पृथ्वी पर जीवन होने का सबसे बड़ा कारण सूर्य है। कभी आपने सोचा है कि सूर्य अगर न हो तो क्या होगा। आपका ये जवाब होगा कि सूर्य ना हो तो दुनिया में अंधेरा छा जाएगा। तो आपका सोचना सच है। सूर्य है तो सबकुछ है अगर सूरज ना हो तो धरती पर सबकुछ खत्म हो जाएगा। सूर्य के कारण ही पेड़ पौधों में प्रकाश संश्लेषण होता है, जिससे हमें ऑक्सीजन मिलता है। ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों में सूर्य को राजा माना गया गया है और विज्ञान भी मानता है कि सूर्य के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। वैदिक काल से ही भारत में सूर्य की उपासना की परंपरा रही है।

 

 सूर्य को भले ही पूजें लेकिन यह धधकता हुआ एक तारा है जो हमारे सौरमंडल में सबसे बड़ा है। इस आग के धधकते गोले में 70 प्रतिशत से अधिक हाइड्रोजन और 26 प्रतिशत तक हीलियम गैस मौजूद हैं, क्योंकि हाइड्रोजन के परमाणु घने वातावरण में फ्यूजन की क्रिया करते हैं और हीलियम बनाते हैं। इस प्रक्रिया में वह ऊर्जा छोड़ते हैं जिससे बड़ी मात्रा में प्रकाश उत्सर्जित होता है और सूर्य जलता हुआ दिखाई देता है। लेकिन सूर्य पर कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन भी प्रचुर मात्रा हैं। 

सूर्य आकार में इतना बड़ा है कि इसमें हमारी पृथ्वी जैसे सैकड़ों या उससे भी अधिक ग्रह समा सकते हैं। सूर्य का व्यास करीब 13 लाख 90 हजार किलोमीटर है। पृथ्वी के मुकाबले देखा जाए तो यह लगभग 109 गुना बड़ा है लेकिन क्या आप जानते हैं हमारे ब्रह्मांड में सूर्य जैसे खरबों या उससे भी अधिक पिंड मौजूद हैं।

सूरज आग का धधकता गोला है, उसका तापमान जानते हैं

सूर्य का जो प्रकाश हमें धरती पर मिलता है, इसे हमतक पहुंचने में 8 मिनट 16.6 सेकंड का समय लगता है और आग के धधकते इस गोले के अन्दर का तापमान 14,999,726 डिग्री सेल्सियस होता है। यही वजह है कि उसके करीब पहुंचना आसान ही नहीं नामुमकिन सा लगता है। अनुमान है कि यह आग का गोला करीब 4.6 अरब साल पुराना है। साथ ही इसका जीवन 10 अरब साल या उससे अधिक हो सकता है और यह पृथ्वी से करीब 13 लाख गुना बड़ा है और इसका गुरुत्वाकर्षण बल भी पृथ्वी से 27 गुना ज्यादा है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारी आकाशगंगा में करीब 5 फीसदी तारे ऐसे हैं, जो सूर्य के मुकाबले ज्यादा चमकदार और बड़े हैं। सूर्य केवल गैसों से बना हुआ एक पिंड है, ये पृथ्वी या किसी और ग्रह की तरह ठोस नहीं है यहां सिर्फ गैस है। इसका गुरुत्वाकर्षण ही पूरे सौर मंडल को अपनी-अपनी कक्षा में बनाए रखता है यानी इसके चारो ओर बड़े से बड़े पिंड से लेकर किसी अंतरिक्ष यान के मलबे के एक छोटे से हिस्से को अंतरिक्ष में एक कक्षा में बनाए रखने में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की अहम भूमिका होती है।

सूर्य में अधिकतम तपामान उसके केंद्र में होता है, जहां का तापमान 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस होता है। सूर्य अत्यधिक गर्म और आवेश युक्त कणों के गैस से बना हुआ है जिसे प्लाज़्मा कहते हैं। ये प्लाज़्मा सूर्य के भूमध्य रेखा पर इसका एक चक्कर पृथ्वी के 25 दिनों में पूरा होता है जबकि ध्रुवों पर 36 पृथ्वी दिवस लगते हैं। 

सूर्य के चारों ओर धूल के घेरे हैं

सूर्य की ऊपरी सतह फ़ोटोस्फ़ीयर, इसके ऊपर क्रोमोस्फ़ीयर और कोरोना होता है। यहीं पर परमाणु फ़्यूजन से विशाल विफ़ोट होते रहते हैं और इसके उर्जा से युक्त कण पृथ्वी पर पहुंचते हैं। सूर्य के चारों ओर धूल के कई घेरे मौजूद हैं जिन्हें सोलर डस्ट रिंग कहते हैं, जिनसे अनुमान लगाया जाता है कि जब 4.6 अरब वर्ष पूर्व सौर मंडल बना होगा उस समय सूर्य के चारो ओर गैस की डिस्क रही होगी।

सूर्य अपनी जगह पर घूमता रहता है, वह कहीं नहीं जाता। हमराी पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। हमारी पृथ्वी अपनी धुरी पर भी घूमती है जिस वज़ह हम 24 घण्टे में से लगभग 12 घण्टे सूर्य के सामने होते हैं, जिसे दिन कहते हैं और शेष घण्टे सूर्य के पीछे जब हमें सूर्य नहीं दिखाई देता इसे रात कहते हैं। 

दुनिया के ऐसे देश, जहां खास हैं दिन-रात

क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसी जगह भी है जहां सूरज 6 महीने चमकता है और 6 महीने नहीं उगता। ये देश है अंटार्कटिका जहां सिर्फ दो मौसम सर्दी और गर्मी ही होते हैं।ये हिस्‍सा पूरे 6 महीने अंधेरे में डूबा रहता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, धरती के इस हिस्‍से में 6 महीने दिन और 6 महीने रात रहने का कारण पृथ्वी का अपनी धुरी पर टेढ़ी होकर घूमना है।

पृथ्वी पर किरिबाती का टाइम जोन सबसे पहले आता है. यह UTC+14 है। सालभर के अधिकतम समय किरिबाती में ही सबसे पहले सूर्योदय होता है। इस स्थान को लैंड ऑफ द मिडनाइट सन कहा जाता है। वहीं, नॉर्वे एक ऐसा देश है जहां सूर्यास्त नहीं होता है क्योंकि यह आर्कटिक सर्कल में स्थित है। 

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