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Explainer: NPS को इन बड़ी वजहों के चलते निवेश पोर्टफोलियो में करना चाहिए शामिल, जानें फायदे और सबकुछ

 Published : Jun 25, 2024 10:07 am IST,  Updated : Jun 25, 2024 10:07 am IST

नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस, एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना है, जिसे पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की तरफ से डिज़ाइन किया गया है, ताकि आपको रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने में मदद मिल सके। पीएफआरडीए ही इसे रेगुलेट भी करता है।

केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 को इस खास योजना को शुरू किया था।- India TV Hindi
केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 को इस खास योजना को शुरू किया था। Image Source : INDIA TV

बेशक आप आज अपनी वित्तीय जरूरतों को अच्छी तरह पूरी कर पा रहे हैं, क्योंकि आप आज नौकरी या अपना कारोबार कर रहे हैं। लेकिन  जब आप रिटायर होंगे, तो आपके काम न करने वाले सालों का क्या होगा? आपने इस बारे में कुछ सोचा है? क्या आपने ऐसी कोई प्लानिंग की है जो आपको भरोसेमंद रिटायरमेंट के लिए तनाव-मुक्त आय देगी? अगर आपने अब तक ऐसा नहीं किया है तो अभी ही न सिर्फ सोचिए बल्कि इसपर काम करना शुरू कर दीजिए। आप अपनी प्लानिंग में नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस को जगह दे सकते हैं। इसमें निवेश की कुछ खास वजहें ऐसी हैं जिसके चलते आपको अपने निवेश पोर्टफोलियो में एनपीएस को शामिल करना चाहिए।

क्या है नेशनल पेंशन सिस्टम?

नेशनल पेंशन सिस्टम, एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना है, जिसे पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की तरफ से डिज़ाइन किया गाय है और रेगुलेट (विनियमित) किया जाता है, ताकि आपको रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने में मदद मिल सके।  अगर आप 18 से 70 साल की आयु के एक भारतीय नागरिक हैं तो कोई भी इसमें निवेश शुरू कर सकता है। इसमें 60 वर्ष की आयु में भी निवेश करना शुरू कर सकता है और 75 वर्ष की आयु में लाभ उठा सकता है। नेशनल पेंशन सिस्टम या एनपीएस कंपनियों, कर्मचारी और स्व-रोजगार करने वालों के लिए एक अच्छा निवेश ऑप्शन है। केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 को इस खास योजना को शुरू किया था।

NPS में निवेश क्यों करना चाहिए,जानिए ये खास वजहें

बात जब नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश की आती है तो आप दूसरे निवेश विकल्पों की तरफ भी देखते हैं। जैसे- फिक्स्ड डिपॉजिट, पीपीएफ, ईपीएफ आदि। इन सबके मुकाबले, एनपीएस में ज्यादा बेनिफिट मिलते हैं। आइए, यहां पांच वजहों पर फोकस करते हैं जिनकी वजह से नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करना बनता है।

टैक्स बेनिफिट मिलता है शानदार

नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करने का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बेनिफिट यह है कि इसमें टैक्स छूट का फायदा मिलता है। चाहे आप वेतनभोगी हों या आपका खुद का कारोबार है, इस एक निवेश से आपको मिलने वाले टैक्स लाभ काफी आकर्षक हैं। आयकर अधिनियम की धारा 80CCD(1), 80CCD(2), और 80CCD(1B) के तहत राष्ट्रीय पेंशन योजना में नियोक्ता और कर्मचारी के योगदान के लिए टैक्स योग्य आय से कटौती का दावा किया जा सकता है। इसी तरह, आयकर की धारा 80CCD(1) स्व-योगदान को कवर करता है और कर्मचारी अपने वेतन (मूल + महंगाई भत्ता) का 10% तक दावा कर सकते हैं, जबकि स्व-नियोजित व्यक्ति अपनी सकल कुल आय का अधिकतम 20% दावा कर सकते हैं, जो ₹1,50,000 की अधिकतम सीमा के अधीन है।  सब्सक्राइबर 80CCD(1B) के तहत ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा ₹50,000 का अतिरिक्त व्यक्तिगत योगदान भी दावा कर सकते हैं। यह लाभ सिर्फ एनपीएस में किए गए सब्सक्रिप्शन के लिए ही है।

सब्सक्राइबर 80CCD(1B) के तहत ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा ₹50,000 का अतिरिक्त व्यक्तिगत योगदान भी दावा
Image Source : PIXABAYसब्सक्राइबर 80CCD(1B) के तहत ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा ₹50,000 का अतिरिक्त व्यक्तिगत योगदान भी दावा कर सकते हैं।

निकासी पर कर लाभ

रिटायरमेंट तक पहुंचने पर, सब्सक्राइबर कॉर्पस का 60% निकाल सकता है और शेष 40% को वार्षिकी (एन्युइटी) में फिर से निवेश करना होता है। 60% निकासी पूरी तरह से टैक्स फ्री है। एन्युइटी में निवेश किया गया 40% भी टैक्स फ्री है। कुछ दूसरी टैक्स बचत निवेश योजनाओं के विपरीत इसमें जीरो कैपिटल गेन्स होगा। अगर कॉर्पस राशि ₹5,00,000 से कम है, तो पूरी राशि टैक्स फ्री निकाली जा सकती है। CAMS के मुताबिक, जब आप एन्युइटी से पेंशन पाना शुरू करते हैं, तो यह राशि आपकी कुल इनकम पर लागू टैक्स स्लैब के मुताबिक, टैक्स योग्य होती है।

कम लागत और रेगुलेटेड निवेश

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के रूप में, एनपीएस आपको अपने योगदान को संशोधित करने की परमिशन भी देता है। अकाउंट को बनाए रखने के लिए सालाना आवश्यक न्यूनतम योगदान ₹1,000 है, जो इसे सबसे सुविधाजनक निवेश विकल्पों में से एक बनाता है। अपने निवेश को आगे बढ़ाने के विकल्प के साथ, और योगदान करने के लिए कोई निश्चित तारीख नहीं होने के चलते, NPS एक लचीली निवेश योजना भी है।

NPS आपको अपनी वित्तीय बाधाओं और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर अपनी एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी (परिसंपत्ति आवंटन रणनीति) चुनने की आजादी देता है। एनपीएस में आपका योगदान इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और प्रतिभूतियाँ, कॉर्पोरेट ऋण और वैकल्पिक निवेश निधि आदि में विभाजित है। सब्सक्राइबर या तो हर फंड प्रकार के लिए आवंटन का प्रतिशत चुन सकते हैं, या ऑटो चॉइस का चयन कर सकते हैं और अपनी जोखिम वरीयता - आक्रामक, मध्यम और रूढ़िवादी चुन सकते हैं। साथ ही वह अपने फंड को अलग-अलग एसेट क्लास में उसके मुताबिक एलोकेट कर सकते हैं। एसेट आवंटन में सबसे बड़ा लाभ आपके आवंटन को साल में चार बार तक अनुकूलित करने का विकल्प है।

एनपीएस अकाउंट से पहली निकासी अकाउंट खोलने के 3 साल बाद ही की जा सकती है।
Image Source : FILEएनपीएस अकाउंट से पहली निकासी अकाउंट खोलने के 3 साल बाद ही की जा सकती है।

आंशिक निकासी की सुविधा

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली एक रिटायरमेंट फंड है, अगर जरूरत होती है, तो कोई ग्राहक कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी का लाभ उठा सकता है। ग्राहक की योगदान राशि का 25% तक निकासी कर सकता है। पूरे जीवन काल में 3 बार तक निकासी कर सकता है। साथ ही पहली निकासी अकाउंट खोलने के 3 साल बाद ही की जा सकती है। हालांकि यह निकासी सिर्फ पेंशन नियामक यानी पीएफआरडीए द्वारा लिस्टेड विशेष मकसद के लिए की जा सकती है। जैसे बच्चों की उच्च शिक्षा, बच्चों की शादी, आवासीय संपत्ति का निर्माण या खरीद, और निर्दिष्ट बीमारियों का इलाज आदि की जिम्मेदारी आ पड़ी हो।

बेहतर रिटर्न की बिल्कुल कर सकते हैं उम्मीद

नेशनल पेंशन सिस्टम निश्चित ब्याज के साथ नहीं आता है, क्योंकि यह म्यूचुअल फंड की तरह बाजार से जुड़ा हुआ है। इसके आलाव, चूंकि यह PFRDA द्वारा विनियमित है, इसलिए पेंशन फंड को स्मॉल-कैप कंपनियों या विदेशी कंपनियों में निवेश नहीं किया जा सकता है।

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