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Explainer: ट्रंप ने की मलेशिया के साथ बड़ी Trade Deal, अब जापान और दक्षिण कोरिया पर नजर; जानें क्या है USA की रणनीति?

 Published : Oct 26, 2025 01:10 pm IST,  Updated : Oct 26, 2025 01:12 pm IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किया है। अमेरिका और मलेशिया के बीच हुआ ये समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बाएं) और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (दाएं) ट्रेड डील पर- India TV Hindi
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बाएं) और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (दाएं) ट्रेड डील पर साइन करते हुए। Image Source : X@RAPIDRESPONSE47

Explainer: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरी कार्यकाल की पहली एशिया यात्रा के दौरान मलेशिया के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर किया है। यह डील न केवल दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिकी व्यापार को मजबूत करेगी, बल्कि चीन की बढ़ती आर्थिक आक्रामकता के खिलाफ एक रणनीतिक कदम भी साबित होगी। ट्रंप की नजर अब जापान और दक्षिण कोरिया पर है, जहां वे इसी तरह के समझौतों से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी वर्चस्व को पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। आइए, इसकी गहराई से समझते हैं कि यह डील क्या है, क्यों महत्वपूर्ण है और अमेरिका की समग्र रणनीति क्या है।

मलेशिया के साथ डील क्यों है खास?

ट्रंप ने रविवार को कुआलालंपुर में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए, उसके दो मुख्य हिस्से हैं। इसमें व्यापार विस्तार और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर सहयोग शामिल है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अनुसार मलेशिया अपने शुल्कों और गैर-शुल्क बाधाओं को संशोधित करेगा, जिससे कृषि, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार में "भारी वृद्धि" होगी। 2024 में दोनों देशों का व्यापार 87 अरब डॉलर का था, जिसमें अमेरिका का 25 अरब डॉलर का घाटा था। अब, सैकड़ों वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क कम होंगे, और मलेशिया ने उन्नत सेमीकंडक्टरों की चीन तस्करी रोकने का वादा किया है।


दुर्लभ भू-तत्वों पर अमेरिका की निगाह

इस समझौते का दूसरा हिस्सा दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेर अर्थ्स) पर केंद्रित है। इस पर अमेरिका की गहरी निगाह है। वजह यह भी है कि अब तक चीन वैश्विक रेर अर्थ्स का 80% हिस्से पर अपना नियंत्रण रखता है। उसने हाल ही में निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और डिफेंस टेक प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में यह समझौता इन खनिजों में "मुक्त और लचीला" व्यापार सुनिश्चित करेगा। मलेशिया के प्रधानमंत्री इब्राहिम अनवर ने इसे दो "राष्ट्रों के बीच संबंधों को व्यापार से आगे ले जाने वाला मील का पत्थर" कहा। 

 

ट्रंप ने मलेशिया पर लगाया था 19 फीसदी टैरिफ

यह समझौता ट्रंप द्वारा मलेशिया पर अगस्त में लगाए 19% शुल्क की चिंताओं को यह डील दूर करेगा। हालांकि ट्रंप ने मलेशिया पर 25 फीसदी शुल्क लगाने की धमकी दी थी। मलेशिया चिप्स का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है और वह अमेरिका को 0% चिप शुल्क की मांग कर रहा था। यह डील उसी दिशा में एक कदम है। मलेशिया की अर्थव्यवस्था तीसरी तिमाही में 5.2% बढ़ी, लेकिन 2026 में 4-4.5% रहने का अनुमान है। यह डील उसके इलेक्ट्रॉनिक्स और खनिज क्षेत्रों को बूस्ट करेगी। जबकि अमेरिका को वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला मिलेगी। 


ट्रंप की एशिया यात्रा का क्या है मकसद

ट्रंप ने अपने 5 दिवसीय यात्रा की शुरुआत थाईलैंड-कंबोडिया युद्ध विराम विस्तार से की। दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप की मलेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया के देशों की पहली यात्रा है। रविवार को ही उन्होंने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा युद्धविराम विस्तार की मेजबानी की, जो उनकी गर्मियों की शुल्क धमकी से संभव हुआ। इस दौरान कंबोडिया के साथ व्यापक ट्रेड डील और थाईलैंड के साथ खनिज समझौता (जो अभी आकांक्षात्मक है) भी साइन हुए। ये कदम दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) शिखर के दौरान उठाए गए, जहां ट्रंप ने कनाडा को भी शुल्क चेतावनी दी।


क्या है अमेरिका की रणनीति


दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी व्यापारिक पैठ को गहरा करके अमेरिका चीन को घेरने के फिराक में है। यह अमेरिका का 'ट्रंप मॉडल' है, जो ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति का केंद्र है। अब ट्रंप ने इसे कूटनीतिक हथियार बना लिया है। पहले कार्यकाल में USMCA और चाइना फेज-1 डील इसी से निकली। अब दूसरी कार्यकाल में इंडो-पैसिफिक पर ट्रंप का पूरा फोकस है। चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और रेर अर्थ्स एकाधिकार से अमेरिका चिंतित है। ट्रंप की रणनीति विभिन्न देशों पर शुल्क दबाव बढ़ा कर ट्रेड डील करना है। ट्रंप ने हाल ही में जापान पर 10-15% ऑटो शुल्क लगाने की धमकी दी है। साथ ही दक्षिण कोरिया पर चिप्स के समान पर टैरिफ की चेतावनी दी है। ताकि इन दोनों देशों के साथ भी ट्रंप इस धमकी के बहाने द्विपक्षीय डील्स को मजबूर कर सकें। 


खनिज गठबंधन बनाने का प्लान

अमेरिका क्वाड के जरिये US, जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया को मजबूत कर रेर अर्थ्स चेन बनाना चाहता है। इसमें अब मलेशिया-थाईलैंड जैसे साझेदार अफ्रीका-प्रशांत से वैकल्पिक स्रोत जोड़ेंगे। यह क्षेत्रीय एकीकरण को भी बढ़ावा देगा। चीन का प्रभाव कम करने के लिए आसियान को अमेरिकी बाजार से बांधना ट्रंप की अहम रणनीतियों में है। पूर्वी तिमोर को आसियान में प्रवेश कराना भी इसी कड़ी का हिस्सा है।


व्यापार घाटा कम करने पर फोकस

अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए एशिया से 500 अरब डॉलर का वार्षिक जुटाना चाहता है। ताकि घाटा घटाने के साथ रोजगार को भी वापस लाया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार"मलेशिया डील क्षेत्रीय डोमिनो प्रभाव पैदा करेगी।" जापान में ट्रंप ऑटो और टेक पर फोकस करेंगे, जहां 2024 का व्यापार 200 अरब डॉलर था। दक्षिण कोरिया में वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात ट्रेड वार का क्लाइमेक्स कर सकते हैं। जहां चिप्स और EV बैटरी पर बात होगी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट पहले ही चीनी उप-प्रधानमंत्री से मिल चुके हैं।

वैश्विक प्रभाव

ट्रंप की यह रणनीति अमेरिकी विनिर्माण को बूस्ट देगी, लेकिन वैश्विक महंगाई बढ़ा सकती है। हालांकि मलेशिया जैसे देश लाभान्वित होंगे, लेकिन छोटे निर्यातक प्रभावित हो सकते हैं। भारत जैसे सहयोगी K-चेन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ट्रंप का अप्रत्याशित स्टाइल (जैसे कनाडा विज्ञापन विवाद) जोखिम पैदा करता है। इस तरह ट्रंप की एशिया डिप्लोमेसी शुल्क से शांति और व्यापार खरीद रही है। जापान-कोरिया में सफलता मिली तो इंडो-पैसिफिक का नक्शा बदल जाएगा। तब चीन अकेला पड़ सकता है। मगर क्या इससे स्थायी शांति आएगी या नया ट्रेड वॉर शुरू हो जाएगा। 

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