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Explainer: क्या हरियाणा में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगी AAP? जानें, क्या कहता है इतिहास

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Sep 11, 2024 07:51 am IST,  Updated : Sep 11, 2024 11:49 am IST

कांग्रेस के साथ गठबंधन पर बात नहीं बनने के बाद आम आदमी पार्टी ने हरियाणा चुनावों में पूरी ताकत के साथ अकेले ही उतरने का फैसला किया है। आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि इससे किसे फायदा हो सकता है और कौन नुकसान उठा सकता है।

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हरियाणा चुनावों में सुनीता केजरीवाल AAP की तरफ से अहम भूमिका में नजर आ रही हैं। Image Source : PTI

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को 20 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी और तीसरी लिस्ट जारी कर दी। पार्टी ने कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर कोई सहमति न बन पाने के कारण अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था और सोमवार को 20 उम्मीदवारों की अपनी पहली लिस्ट जारी की थी। इस तरह आम आदमी पार्टी हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। अब सवाल ये उठता है कि क्या ये कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है? क्या बीजेपी को इससे फायदा होगा? आइए, समझने की कोशिश करते हैं।

हरियाणा में होगा त्रिकोणीय मुकाबला?

सियासी जानकारों की मानें तो भले ही आम आदमी पार्टी हरियाणा चुनावों में पूरी ताकत से मैदान में उतरती नजर आ रही हो, लेकिन वह अभी भी बीजेपी और कांग्रेस से काफी पीछे है। हरियाणा में अधिकांश सीटों पर मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होने की संभावना है। इसके अलावा दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी जैसे छोटे-छोटे दल भी कुछ हद तक असर रखते हैं लेकिन वे भी शायद ही मुख्य लड़ाई में नजर आएं। हालांकि यह जरूर है कि आम आदमी पार्टी की हरियाणा के चुनावों में दावेदारी ने कई सीटों पर सियासी माहौल को दिलचस्प बना दिया है।

कांग्रेस को नुकसान, बीजेपी को फायदा!

हरियाणा चुनावों में आम आदमी पार्टी के पूरी ताकत से उतरने का कांग्रेस को नुकसान पहुंच सकता है। पड़ोसी राज्य पंजाब में सरकार बनाने के बाद से ही AAP के हौसले बुलंद हैं और अपने नेता अरविंद केजरीवाल के जेल में होने के बावजूद उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी के बाकी नेता प्रचार-प्रसार में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। सियासी पंडितों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के प्रचार अभियान को जितनी गति मिलेगी, बीजेपी विरोधी वोट उतना ही बंटेगा जिससे कांग्रेस को नुकसान और भगवा दल को फायदा होगा। हो सकता है कि AAP इन चुनावों में कोई चमत्कार न कर पाए, लेकिन कांग्रेस की संभावनाओं को जरूर नुकसान पहुंचा सकती है।

क्या कहता है AAP Vs कांग्रेस का इतिहास?

दिल्ली से लेकर पंजाब तक, गोवा से गुजरात तक, हर चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की कीमत पर ही अपनी जमीन तैयार की है। इन राज्यों में से जहां दिल्ली और पंजाब में पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल करते हुए कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया, वहीं गोवा और गुजरात में कांग्रेस की बुरी गति के पीछे का बड़ा कारण बनी। इन सभी राज्यों में आम आदमी पार्टी की वजह से बीजेपी की संभावनाओं पर या तो कोई असर नहीं पड़ा, या उसे जबरदस्त फायदा हुआ। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस का वोट बैंक छिटककर काफी हद तक आम आदमी पार्टी के पाले में चला गया।

क्या हरियाणा में भी दोहराया जाएगा इतिहास?

अब सवाल यह उठता है कि क्या हरियाणा में भी AAP और कांग्रेस के बीच मुकाबले का पुराना इतिहास दोहराया जाएगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर AAP हरियाणा में मजबूती से लड़ाई लड़ती है तो यह कांग्रेस के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। गोवा और गुजरात में यह देखा जा चुका है कि भले ही AAP ने इन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बहुत ज्यादा सीटें न जीती हों, लेकिन सेंध कांग्रेस के वोट बैंक में ही लगी है। गोवा में 2022 में हुए चुनावों में AAP को 6.8 फीसदी वोट मिले थे जबकि गुजरात में उसे 12.92 फीसदी लोगों ने वोट किया था। इन दोनों ही चुनावों में जहां कांग्रेस का वोट शेयर घटा था वहीं बीजेपी के वोट बढ़े थे।

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