अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। ये फतवा ईरान के शीर्ष शिया धर्मगुरु ग्रैंड अयातुल्ला नासर मकरम शिराज़ी की ओर से जारी किया गया है। बता दें कि हाल ही में इजरायल ने ईरान के ऊपर बड़े स्तर पर हमला किया था। अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर बम बरसाएं थे। इन हमलों में ईरान के सैकड़ों लोगों, सैन्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों की मौत हुई है। इसके बाद इजरायल-ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ था। अब ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ फतवे से हर कोई हैरान है। आखिर ये फतवा होता क्या है? इसे कौन जारी करता है? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब इस एक्सप्लेनर के माध्यम से।
ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ फतवे में क्या कहा गया?
ईरान के शीर्ष शिया धर्मगुरु की ओर से जारी किए गए फतवे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को अल्लाह का दुश्मन कहा गया है और उन्हें नेस्तनाबूद करने की धमकी दी गई है। फतवे में कहा गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह खामेनेई को धमकी देने या उनकी हत्या की कोशिश करने वालों को अल्लाह के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा।
फतवा क्या होता है?
दरअसल, फतवा एक अरबी शब्द है और इसे शरिया कानून के तहत जारी किया जाता है। फतवा किसी मुद्दे पर मुफ्ती द्वारा जारी किया गया धार्मिक निर्णय या राय है। जानकारी के मुताबिक, फतवे को कोई मौलाना या मौलवी नहीं जारी कर सकता है। फतवा सिर्फ मुफ्ती की ओर से जारी किया जा सकता है जिनके पास कुरान, हदीस, इस्लाम और शरिया के बारे में गहरी जानकारी हो। जानकारी के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति इस्लाम के नियमों का पालन नहीं करता और उसके खिलाफ कोई काम करता है तो शरिया कानून के तहत उसके ऊपर फतवा जारी किया जाता है।

भारत में कितना असरदार है फतवा?
जो देश इस्लामिक शरिया कानून के आधार पर चलते हैं वहां पर फतवे का असर नागरिकों पर पड़ने की संभावना ज्यादा होती है। भारत में भी दारुल उलूम देवबंद की ओर से कई बार फतवे जारी किए जाते हैं। हालांकि, भारत में फतवों को कानून की ओर से मान्यता नहीं दी गई है। इस कारण यहां फतवे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं। आम तौर पर भारत में फतवे सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर मार्गदर्शन देने के लिए जारी किए जाते हैं। हालांकि, कई बार इन पर विवाद भी हुए हैं। भारत की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा था कि शरीयत अदालतों की ओर से जारी होने वाले फतवों को कानूनी मान्यता नहीं होती है। इसलिए फतवा बाध्यकारी नहीं हैं।
फतवे को लेकर क्या कहते हैं भारत के मुस्लिम जानकार?
फतवे के बारे में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना मदनी ने India TV को बताया है कि "फतवा कोई जारी नहीं कर सकता है। एक अथॉरिटी होती है जिनके पास कोई सवाल जाता है और वो उसका जवाब देते हैं। आपसे एक सवाल हुआ, राय मांगी गई, ये मांगने वाले और उसके बीच की बात है। जिनके पास एजुकेशन होती है वही फतवा जारी कर सकते हैं। वो फतवे की प्रैक्टिस करते हो तब फतवा दे सकते हैं। मैं मौलवी हूं लेकिन फतवा जारी नहीं कर सकता। उसके लिए मुफ्ती होना जरूरी है। मुफ्ती भी ऐसा जो कि प्रैक्टिसिंग हो। फतवा भी सवाल करने वाले के जवाब में होता है। वो सवाल और जवाब के बीच में एक रिलेशन होता है। सवाल जैसा हो उसके मुताबिक जवाब दिया जाता है। एक फतवा जो किसी एक सवाल के जवाब में दिया गया वो सब जगह फिट नहीं होता। उसके लिए दूसरा सवाल होगा और दूसरे सवाल का दूसका जवाब होगा। फतवा एक मजहबी चीज है और ये सियासत के मामले में दिया ही नहीं जा सकता। ये धार्मिक चीजों के बारे में होता है।"

कब दिखा ईरान के फतवे का असर?
ईरान की ओर से जारी किए गए फतवों में भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी के मामले की काफी चर्चा होती है। सलमान रुश्दी की ओर से लिखी गई एक किताब को लेकर काफी विवाद हुआ था। रुश्दी पर पैगंबर मोहम्मद साहब के अपमान का आरोप लगा था। इसके बाद साल 1989 में ईरान द्वारा रुश्दी के खिलाफ मौत का फतवा जारी किया गया था। फतवे के बाद सलमान रुश्दी को दशकों तक छुपकर रहना पड़ा था। हालांकि, साल 2022 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में सलमान रुश्दी पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में उनकी जान तो बच गई लेकिन उन्हें अपनी एक आंख गंवानी पड़ी।
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