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Explainer: AI की रेस में चीन-अमेरिका से कैसे मुकाबला करेगा भारत? क्या हैं बड़ी चुनौतियां

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Jun 09, 2026 03:12 pm IST,  Updated : Jun 09, 2026 03:12 pm IST

AI के लिए भारत तेजी से उभरता हुआ बाजार है। हालांकि, वर्ल्ड बैंक के डायरेक्टर का कहना है कि अमेरिका और चीन के मुकाबले भारत एआई की रेस में पीछे है। उन्होंने कुछ चुनौतियों का जिक्र किया है, जिसे पार पाने के बाद भारत एआई की रेस में बना रह सकता है।

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एआई Image Source : UNSPLASH

AI की रेस में भारत में पिछले कुछ समय में तेजी से काम हुआ है। हालांकि, अभी भी भारत को चीन और अमेरिका जैसे एआई के सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे बाजार से मुकाबला करना है। हालांकि, इसके लिए भारत को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। पिछले दिनों वर्ल्ड बैंक के डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने बताया कि किस तरह भारत AI की रेस में चीन और अमेरिका जैसे देशों के साथ मुकाबला कर सकता है। ये दोनों देश एआई मॉडल से लेकर एडवांस चिप डेवलप कर रहे हैं। इनका मुकाबला करने के लिए भारत को कुछ रणनीतिक बदलाव करने पड़ेंगे।

ANI से बात करते हुए नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भारत की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि यहां कितने एडवांस AI मॉडल बनाए जाएं, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल किस तरह व्यवस्थागत समस्याओं को सुलझाने के लिए किया जाए। खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर बनाने के मामले में भारत फिलहाल वैश्विक लीडर्स से पिछड़ सकता है, लेकिन देश के पास कई ऐसे सेक्टर हैं, जहां की समस्याओं को सुलझाने के लिए एआई का इस्तेमाल व्यापक तौर पर किया जा सकता है।

वर्ल्ड बैंक के डायरेक्टर ने कहा कि देश की हेल्थकेयर सर्विसेज, एजुकेशन और बैंकिग सेक्टर्स में एआई का इस्तेमाल वैल्यू पैदा करने के लिए बड़ा अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत फिलहाल उन टेक्नोलॉजी का बड़ा प्लेयर नहीं है, जो मौजूदा समय में ग्लोबल इन्वेस्टर्स को अपनी और आकर्षित करे। उन्होंने कहा, "दुनिया एआई, सेमीकंडक्टर और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) के बारे में बात कर रही है, लेकिन अब तक हमारे पास ऐसा कुछ भी नहीं है।"

AI में भारत क्यों है पीछे?

नीलकंठ मिश्रा ने बताया कि एआई के सेक्टर में अमेरिका और चीन जैसे देशों की तुलना में भारत में रिस्क कैपिटल की उपलब्धा बेहद सीमित है। भारत की एआई कंपनियों को कुछ सौ मिलियन डॉलर का निवेश पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। वहीं, ग्लोबल एआई कंपनियां अरबों डॉलर लगा रही हैं।

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Image Source : UNSPLASHएआई

अमेरिका-चीन से कैसे होगा मुकाबला?

उन्होंने कहा कि देश के पास AI के इंप्लिमेंटेशन का बड़ा अवसर है। यहां इंटेलिजेंस के निर्माण से ज्यादा उसके उपयोग पर फोकस करने की जरूरत है। एआई के उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से लेकर एजुकेशन, बैंकिंग जैसे सेक्टर में इसकी आर्थिक वैल्यू निकलनी शुरू हो जाएगी। हालांकि, नीलकंठ मिश्रा ने माना कि सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत ने काफी अच्छा काम किया है। पिछले 4 साल में देश में जो भी काम हुआ है उस पर गर्व किया जा सकता है। हालांकि, अभी भी एडवांस चिप मेकिंग के मामले में भारत पीछे है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में ग्रोथ

केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत इस समय Nvidia समेत दुनिया के सबसे एडवांस चिप को डेवलप कर रहा है, जो दर्शाता है कि देश का सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से ग्रोथ कर रहा है। इस समय देश के 300 यूनिवर्सिटी में छात्रों को चिप डिजाइन करना सिखाया जा रहा है।

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Image Source : UNSPLASHएआई

केंद्र सरकार का सेमीकंडक्टर मिशन तारीफ के योग्य है, जिसका फायदा भी दिख रहा है। हालांकि, सेमीकंडक्टर निर्माण में दुनिया 1.8 नैनोमीटर तक पहुंच गई है, जबकि भारत में अभी भी 28 और 40 नैनोमीटर वाले चिप डिजाइन किए जा रहे हैं। वर्ल्ड बैंक डायरेक्टर के अनुसार सेमिकॉन 2.0 मिशन आने वाला है, जिसके बाद देश में 7 से 12 नैनोमीटर के चिप बनने शुरू हो जाएंगे। भारत में इनोवेशन इकोसिस्टम भी सुधरा है, लेकिन अभी भी अमेरिका और चीन जैसे देशों से मुकाबला करने में कई तरह की चुनौतियां हैं। इस इनोवेशन इकोसिस्टम को और बड़ा करने की जरूरत है।

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