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Explainer: साल 2025 से NEET-UG, JEE-Main, अन्य प्रवेश परीक्षाओं में क्या प्रमुख बदलाव होंगे? जानें यहां

 Published : Dec 23, 2024 03:34 pm IST,  Updated : Dec 23, 2024 03:51 pm IST

NEET-UG, JEE-Main समेत अन्य प्रवेश परीक्षाओं आगामी साल 2025 से महत्वपूर्ण बदलाव होने वाले हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या-क्या होंगे बदलाव?

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2025 से NEET-UG, JEE-Main, अन्य प्रवेश परीक्षाओं में होंगे कई बदलाव Image Source : INDIA TV

साल 2025 आने वाला है। आगामी साल से एनटीए समेत नीट यूजी, जेईई समेत कई परीक्षाओं में विभिन्न महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। शिक्षा मंत्रालय के द्वारा बनाई एक हाई लेवल कमेटी ने इस बारे में कई सुझाव दिए हैं। जून में गठित 7 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी ने इस साल NEET-UG में कथित उल्लंघनों, अनियमितताओं और पेपर लीक पर देशव्यापी आक्रोश के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पुनर्गठन और कामकाज की भी सिफारिश की थी। पैनल ने परीक्षा में कदाचार रोकने के लिए डिजी यात्रा के समान डिजी एग्जाम सिस्टम की भी सिफारिश की है।

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डिजी एग्जाम सिस्टम रोकने में करेगा मदद 

इसके तहत रिपोर्ट में कहा गया है, "उम्मीदवारों को हर बार एग्जाम देने के लिए अपना डाटा अपलोड करना होगा। आवेदन प्रक्रिया के दौरान इस जानकारी को वेरीफाई करना मुश्किल है, क्योंकि NTA कई TIAs को पूरा करता है- जो उम्मीदवार और जिस एकेडमिक प्रोग्राम में वे शामिल हो रहे हैं, उसके बीच कम्युनिकेशन गैप बना सकता है। इससे परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार और सिलेबस में नामांकित व्यक्ति के बीच डिफरेंस हो सकती हैं, ऐसे में डिजी एग्जाम सिस्टम इसे रोकने में मदद कर सकती है।"

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीते मंगलवार को कहा कि एनटीए अब केवल एंट्रेंस एग्जाम ही आयोजित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, भर्ती परीक्षाओं पर नहीं।

क्या होने हैं सुधार?

अक्टूबर में शिक्षा मंत्रालय को सौंपी गई ‘भारत में नेशनल एंट्रेंस टेस्टिंग में सुधार’ शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में, कमेटी ने कुछ सिफारिशें कीं, जिनमें सभी एंट्रेंस एग्जाम के लिए कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (सीबीटी) फॉर्मेट और उन स्थानों के लिए हाइब्रिड मॉडल शामिल हैं, जहां ऑनलाइन परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकती है; वहां हाइब्रिड मॉडल के मामले में प्रश्न पत्रों का डिजिटल ट्रांसफर; JEE की तरह नीट-यूजी के लिए मल्टी-स्टेज एग्जाम आयोजित करना; सीयूईटी-यूजी में विषय विकल्पों की संख्या कम करना; अस्थायी कर्मचारियों के बजाय एनटीए में स्थायी कर्मियों को नियुक्त करना और आउटसोर्स/प्राइवेट स्कूलों में सेंटर्स की संख्या को कम करना और इसके बजाय सरकारी संस्थानों में नए सेंटर बनाना।

एनटीए भारत में 15 प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करता है, जिसमें नीट-यूजी, जेईई-मेन्स, सीयूईटी-यूजी, यूजीसी-सीएसआईआर नेट और नेट आदि शामिल हैं।

क्यों उठे थे बदलाव के सुर?

जून में नीट-यूजी 2024 का रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद, देश के विभिन्न हिस्सों से अनियमितताओं, पेपर लीक और बढ़े हुए नंबर के आरोपों के साथ जोरदार हंगामा हुआ। साथ ही गोधरा और झारखंड से पेपर लीक करने में परीक्षा केंद्र कर्मियों की मिलीभगत की खबरें भी सामने आईं। मामला सीबीआई को सौंप दिया गया, जिसने अब तक कुल 45 आरोपियों के खिलाफ नीट (यूजी) पेपर चोरी मामले में पांच चार्जशीट दायर किए हैं। 

अब तक नीट-यूजी का आयोजन पेन और पेपर मोड में किया गया है। 

आरोप अदालतों और अंत में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, फिर सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार 2 अगस्त को अपना फैसला सुनाया, जिसमें दोबारा परीक्षा कराने से इनकार किया और एनटीए को परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह से पुनर्गठित करने के लिए कहा गया। इसके बाद सरकार ने हाई लेवल कमेटी गठित की।

पैनल ने और क्या दिए सुझाव?

कमेटी के पैनल ने सुझाव दिया है कि एनटीए एक सशक्त और जवाबदेह शासी निकाय का गठन करे। रिपोर्ट में कहा गया है, "एनटीए को इंटरनल-डोमेन स्पेस्फिक ह्यूमन रिसोर्स से लैस किया जाना चाहिए, जिन्हें भविष्य में टेस्टिंग प्रक्रिया का प्रभार संभालना चाहिए।" 

कमेटी ने एनटीए के लिए 10 जरूरी कार्यक्षेत्रों पर जोर दिया, जिनका नेतृत्व डायरेक्टर लेवल पद पर किया जाएगा। कमेटी ने सिफारिश की है, "दो अतिरिक्त महानिदेशकों को इन कार्यक्षेत्रों की देखरेख करनी चाहिए। एडीजी-1 को टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट्स और ऑपरेशन से संबंधित 5 कार्यक्षेत्रों की देखरेख करनी चाहिए, जबकि एडीजी-2 को टेस्ट सिक्योरिटी और निगरानी पर ध्यान देना चाहिए।" इसने यह भी कहा कि एनटीए और हर एक टेस्टिंग इंडेंटिंग एजेंसी को अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना चाहिए। 

रिपोर्ट में कहा गया है, "एनटीए को सुरक्षित परीक्षण प्रशासन तंत्र प्रदान करने के लिए राज्य/जिला अधिकारियों के साथ संस्थागत संबंध बनाने चाहिए। साथ ही, राज्य और जिला स्तर पर समन्वय समितियों को स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ स्थापित किया जाना चाहिए।"

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