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Explainer: क्या होता अगर ओजोन परत न होती? Ozone Layer को बचाने के 5 असरदार उपाय

 Published : Sep 16, 2025 07:57 am IST,  Updated : Sep 16, 2025 08:04 am IST

ओजोन परत सूर्य की हानिकारक UV किरणों से पृथ्वी को बचाती है। ओजोन परत के बिना त्वचा कैंसर, फसल क्षति और पारिस्थितिक असंतुलन जैसे गंभीर खतरे होते।

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ओजोन लेयर में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। तस्वीर में सितंबर 2000 (बाएं) और सितंबर 2018 के बीच के अंतर को दिखाया गया है। Image Source : AP

International Day for the Preservation of the Ozone Layer: ओजोन परत (Ozone Layer) पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद एक विशेष परत है, जो सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV rays) से हमें बचाती है। यह परत स्ट्रैटोस्फीयर में, धरती से करीब 15 से लेकर 35 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर पाई जाती है। ओजोन गैस (O3) से बनी यह परत सूरज की खतरनाक यूवी-बी और यूवी-सी किरणों को सोख लेती है, जिससे पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रहता है। आज Ozone Day 2025 के मौके पर हम इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे।

अगर ओजोन परत न होती तो क्या होता?

अगर ओजोन परत न होती, तो सूरज की पराबैंगनी किरणें बिना किसी रुकावट के धरती तक पहुंचतीं। इसके कई गंभीर परिणाम होते:

  1. स्वास्थ्य पर असर: यूवी किरणों के संपर्क में आने से त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ओजोन परत में 1% की कमी से त्वचा कैंसर के मामले 3-6% तक बढ़ सकते हैं।
  2. पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव: यूवी किरणें पौधों की वृद्धि को प्रभावित करती हैं, जिससे फसलों का उत्पादन कम हो सकता है। यूवी किरणों की वजह से समुद्री जीवन खतरे में पड़ सकता है। समुद्री खाद्य श्रृंखला का आधार प्लवक इन किरणों की वजह से खत्म हो सकते हैं।
  3. जलवायु परिवर्तन: ओजोन परत की कमी से जलवायु पर भी असर पड़ता, क्योंकि यह वायुमंडल में गर्मी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है।
  4. वायु प्रदूषण: यूवी किरणें स्मॉग और अन्य हानिकारक प्रदूषकों को बढ़ावा देती हैं, जिनकी वजह से सांस की बीमारियों में इजाफा होता है। अगर ओजोन लेयर न होती तो लोगों को सांस की गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता।

ओजोन परत को नुकसान कैसे होता है?

ओजोन परत को सबसे ज्यादा नुकसान क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलोन्स, और अन्य रसायनों से होता है, जो रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, और एरोसोल स्प्रे में इस्तेमाल होते हैं। ये रसायन ओजोन अणुओं को तोड़ देते हैं, जिससे परत पतली होती है। 1980 के दशक में अंटार्कटिका के ऊपर 'ओजोन छिद्र' की खोज ने दुनिया का ध्यान इस समस्या की ओर खींचा।

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Image Source : APसौर ऊर्जा के इस्तेमाल से ओजोन परत को बचाने में योगदान दिया जा सकता है।

ओजोन परत को बचाने के 5 असरदार उपाय

ओजोन परत को बचाने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है। NASA और यूनाइटेड नेशंस एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP) के दिशानिर्देशों के आधार पर ओजोन परत को बचाने के लिए ये 5 उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  1. CFC युक्त उत्पादों का उपयोग कम करें: रेफ्रिजरेटर, एसी, और स्प्रे कैन में CFC-मुक्त विकल्प चुनें। खरीदते समय 'ओजोन-फ्रेंडली' लेबल की जांच करें। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) के तहत कई देशों ने CFCs पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन अवैध इस्तेमाल अभी भी एक चुनौती है।
  2. एनर्जी एफिशिएंसी को बढ़ावा दें: बिजली की खपत कम करने से अप्रत्यक्ष रूप से ओजोन परत की रक्षा होती है, क्योंकि बिजली उत्पादन में कई बार ओजोन-हानिकारक गैसें निकलती हैं। LED बल्ब, बिजली की कम खपत करने वाले उपकरण, और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करें।
  3. लोगों में जागरूकता फैलाएं: लोगों को ओजोन परत के महत्व और इसे बचाने के तरीकों के बारे में जागरूक करें। इसके बारे में आजकल सोशल मीडिया के जरिए भी जानकारी को फैलाया जा सकता है।
  4. गाड़ियों का कम से कम इस्तेमाल करें: वाहनों से निकलने वाली गैसें, जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओजोन परत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि सार्वजनिक परिवहन, साइकिल, या कारपूलिंग का इस्तेमाल करें।
  5. जितना संभव हो पेड़-पौधे लगाएं: पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं और वायु प्रदूषण को कम करते हैं, जो ओजोन परत की रक्षा में मदद करता है। इसलिए जहां तक संभव हो, पेड़-पौधे जरूर लगाएं।

ओजोन लेयर के बिना मुश्किल होगी जिंदगी

ओजोन लेयर पृथ्वी का सुरक्षा कवच है, जिसके बिना जीवन की कल्पना मुश्किल है। इसे बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' जैसे समझौते लागू किए गए हैं, जिनके कारण 1980 के बाद से ओजोन छिद्र में सुधार देखा गया है। UNEP के अनुसार, अगर सही कदम उठाए जाते रहे, तो 2060 तक ओजोन परत पूरी तरह ठीक हो सकती है। लेकिन इसके लिए सबको मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाने होंगे।

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