1. Hindi News
  2. Explainers
  3. चीन ने समंदर में बैलिस्टिक मिसाइल क्यों दागी? अमेरिका को कैसे दिया संदेश? जानें इसके रणनीतिक मायने

चीन ने समंदर में बैलिस्टिक मिसाइल क्यों दागी? अमेरिका को कैसे दिया संदेश? जानें इसके रणनीतिक मायने

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 10, 2026 07:58 am IST,  Updated : Jul 10, 2026 08:03 am IST

चीन ने दक्षिण प्रशांत में पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर अपनी बढ़ती परमाणु क्षमता और न्यूक्लियर ट्रायड का प्रदर्शन किया है। इसे अमेरिका के लिए रणनीतिक संदेश माना जा रहा है।

China ballistic missile test, South Pacific missile launch, Nuclear Triad China- India TV Hindi
चीन ने मिसाइल परीक्षण करके पूरी दुनिया को टेंशन दे दी है। Image Source : AP

Highlights

  • चीन ने मिसाइल परीक्षण से अमेरिका को रणनीतिक संदेश दिया।
  • प्रशांत देशों ने परीक्षण पर चिंता और नाराजगी जताई।
  • चीन ने कहा, सभी संबंधित देशों को पहले ही सूचना दी गई थी।

बैंकॉक: चीन ने हाल ही में दक्षिण प्रशांत महासागर में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसे सामान्य सैन्य अभ्यास नहीं माना जा रहा, क्योंकि यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल सिस्टम का दुर्लभ परीक्षण था। इस कदम की कई देशों ने आलोचना की, जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस परीक्षण का सबसे बड़ा संदेश अमेरिका के लिए था। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह घटना पूरे दक्षिण प्रशांत क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है।

चीन ने कहां से दागी थी बैलिस्टिक मिसाइल?

सोमवार को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने दक्षिण प्रशांत महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। बताया गया कि यह मिसाइल परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी या न्यूक्लियर सबमरीन से दागी गई थी। इससे पहले भी चीन ने 2 साल पहले प्रशांत महासागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ऐसा ही परीक्षण किया था। हालांकि इस बार का परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देश लगातार बड़ी शक्तियों से अपने इलाके को सैन्य प्रतिस्पर्धा का मैदान न बनाने की अपील कर रहे हैं।

क्यों माना जा रहा अमेरिका के लिए संदेश?

न्यूक्लियर पॉलिसी एक्सपर्ट और कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के वरिष्ठ फेलो टोंग झाओ के अनुसार, इस परीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह था कि चीन अब एक मजबूत सैन्य शक्ति बन चुका है और उसकी रणनीतिक परमाणु क्षमता लगातार बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि,

'चीन यह दिखाना चाहता था कि उसकी परमाणु ताकत केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समुद्र और हवा, तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने में सक्षम है।'

आखिर क्या है 'न्यूक्लियर ट्रायड'?

इस परीक्षण के जरिए चीन ने अपनी न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता का प्रदर्शन किया। न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब है कि किसी देश के पास तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार लॉन्च करने की क्षमता हो:

  1. जमीन (Land-based missiles)
  2. समुद्र (Submarine-based missiles)
  3. हवा (Aircraft-based weapons)

जब किसी देश के पास ये तीनों विकल्प होते हैं, तो उसकी परमाणु शक्ति और भी मजबूत मानी जाती है।

क्या होती है 'सेकेंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी'?

ऑस्ट्रेलिया के क्रॉफर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के शोधकर्ता डोमिनिक मेघर के मुताबिक, इस परीक्षण से चीन ने अपनी 'सेकेंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी' भी दिखाई। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी देश पर पहले परमाणु हमला हो जाए, तब भी वह जवाबी परमाणु हमला करने में सक्षम रहे। पनडुब्बी से मिसाइल दागने की क्षमता इसी वजह से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि समुद्र में मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाना कठिन होता है।

China ballistic missile test, South Pacific missile launch, Nuclear Triad China
Image Source : APअभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि चीन ने कौन सी मिसाइल दागी है।

नए मिसाइल परीक्षण पर चीन ने क्या कहा?

चीन का कहना है कि यह उसकी वार्षिक सैन्य कवायद का हिस्सा था और भविष्य में भी इस तरह के परीक्षण किए जा सकते हैं। नेशनल ब्यूरो ऑफ एशियन रिसर्च के विशेषज्ञ के. ट्रिस्टन टैंग का मानना है कि इसे एक अकेली घटना नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह चीन की दीर्घकालिक सैन्य रणनीति का हिस्सा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन लगातार परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (IISS) की रिपोर्ट के मुताबिक, 

'पिछले 5 सालों में चीन ने अमेरिका की तुलना में ज्यादा तेजी से न्यूक्लियर सबमरीन बनाने की दिशा में काम किया है। इससे उसकी समुद्री सैन्य क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।'

परीक्षण के बाद प्रशांत देशों की चिंता क्यों बढ़ी?

दक्षिण प्रशांत महासागर केवल सामरिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह मछलियों और खनिज संपदा से भी समृद्ध क्षेत्र है। इसी वजह से यहां दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच प्रभाव बढ़ाने की होड़ बनी रहती है। लेकिन इस क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों के लिए परमाणु गतिविधियां पुराने दर्द को भी याद दिलाती हैं। अतीत में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस प्रशांत क्षेत्र में कई परमाणु परीक्षण कर चुके हैं। इन परीक्षणों के कारण वहां के लोगों को पर्यावरण प्रदूषण, कैंसर, जन्मजात विकार और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई द्वीपीय देशों का कहना है कि इन परीक्षणों का असर आज भी उनकी नई पीढ़ियों में दिखाई देता है। इसी वजह से प्रशांत क्षेत्र के देशों में परमाणु गतिविधियों को लेकर विशेष संवेदनशीलता है।

क्या चीन ने किया रारोटोंगा संधि का उल्लंघन?

जिस क्षेत्र में यह मिसाइल गिरी, वह साउथ पैसिफिक न्यूक्लियर फ्री जोन का हिस्सा है। यह क्षेत्र 1986 की रारोटोंगा संधि के तहत बनाया गया था, जिसमें पूरे क्षेत्र को परमाणु हथियारों से मुक्त रखने का लक्ष्य रखा गया है। चीन ने 1987 में इस संधि से जुड़े प्रोटोकॉल की पुष्टि की थी। इसके तहत उसने इस क्षेत्र में परमाणु हथियारों का परीक्षण न करने और संधि से जुड़े देशों के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने या उसकी धमकी न देने का वादा किया था।  इसी वजह से इस मिसाइल परीक्षण पर कई देशों ने सवाल उठाए।

सोलोमन द्वीप के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

सोलोमन द्वीप के प्रधानमंत्री मैथ्यू वेले ने कहा कि चीन उनका अच्छा मित्र है, लेकिन मित्र ऐसा काम नहीं करते। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां उनके क्षेत्र के लिए अच्छी नहीं हैं और इससे पूरे प्रशांत क्षेत्र में चिंता बढ़ती है। एक्सपर्ट डोमिनिक मेगर के मुताबिक, अमेरिका आज भी प्रशांत क्षेत्र में परमाणु मिसाइलों का परीक्षण करता है, लेकिन वह रारोटोंगा संधि वाले क्षेत्र से बाहर परीक्षण करता है। यही वजह है कि चीन के इस परीक्षण को लेकर ज्यादा विवाद पैदा हुआ।

ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान हुए नाराज

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने कहा कि उन्हें इस परीक्षण की पर्याप्त अग्रिम सूचना नहीं दी गई। जापान ने भी आरोप लगाया कि परीक्षण पर्याप्त पारदर्शिता के बिना किया गया। ये तीनों देश लंबे समय से प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित रहे हैं। हाल के वर्षों में चीन ने कई छोटे प्रशांत देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते किए हैं। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ भी क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में ऑस्ट्रेलिया ने वानुअतु, फिजी और पापुआ न्यू गिनी के साथ रक्षा और सुरक्षा समझौते किए हैं। इस समय ऑस्ट्रेलिया और सोलोमन द्वीप भी एक बड़ी संधि पर बातचीत कर रहे हैं।

China ballistic missile test, South Pacific missile launch, Nuclear Triad China
Image Source : APऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज चीन के इस परीक्षण से बुरी तरह भड़के हुए हैं।

चीन पर क्यों भड़क गए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री?

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने भड़कते हुए इस मिसाइल परीक्षण को चीन की 'उकसाने वाली कार्रवाई' बताया। उन्होंने कहा कि इतनी कम सूचना देकर किया गया यह परीक्षण पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। वहीं, चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने संबंधित देशों को पहले ही सूचना दे दी थी। मंत्रालय के मुताबिक, इससे यह साबित होता है कि चीनी सेना ने पूरी पारदर्शिता और खुलेपन के साथ यह कदम उठाया।

इस बारे में अंतरराष्ट्रीय नियम क्या कहते हैं?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि कोई मानक माना जाए तो वह हेग कोड ऑफ कंडक्ट (Hague Code of Conduct) है। इसमें बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण से कम से कम 24 घंटे पहले सूचना देने की अपेक्षा की जाती है। हालांकि यह कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता नहीं है और चीन इसका सदस्य भी नहीं है।

China ballistic missile test, South Pacific missile launch, Nuclear Triad China
Image Source : APचीन ने यह मिसाइल न्यूक्लियर सबमरीन से दागी थी।

चीन ने आखिर कौन-सी मिसाइल दागी?

अब तक इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव के अनुसार, चीन ने गुआंगडोंग प्रांत के पास समुद्री क्षेत्र से JL-2 पनडुब्बी आधारित बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो अपेक्षाकृत पुरानी मिसाइल मानी जाती है। दूसरी ओर, चीन की सरकारी मीडिया से जुड़े एक्सपर्ट्स का दावा है कि यह JL-3 मिसाइल थी, जिसकी मारक क्षमता JL-2 से कहीं अधिक है। एक्सपर्ट शाओ योंगलिन के अनुसार, JL-3 इतनी लंबी दूरी तक मार कर सकती है कि पश्चिमी प्रशांत से दागे जाने पर वह पूर्वी प्रशांत तक लक्ष्य को निशाना बना सकती है।

चीन के इस परीक्षण पर क्यों है दुनिया की नजर?

दक्षिण प्रशांत में चीन के इस बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण पर दुनिया की नजर है क्योंकि यह केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे उसकी बढ़ती परमाणु क्षमता, समुद्री सैन्य ताकत और अमेरिका को दिए गए रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं प्रशांत क्षेत्र के छोटे देशों के लिए यह कदम उनके परमाणु परीक्षणों से जुड़े पुराने दर्द को फिर से ताजा करने वाला साबित हुआ है। यही कारण है कि इस परीक्षण ने सैन्य रणनीति के साथ-साथ कूटनीतिक और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। (AP से इनपुट्स के साथ)

ये भी पढ़ें: चीन को यूरोप के इस देश ने दिया करारा जवाब, कहा- 'ड्रैगन हमें न बताए कि हम किससे रिश्ते बनाएं'

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Explainers से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।