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पत्थरचट्टा का सेवन पथरी सहित इन गंभीर बीमारियों में है फायदेमंद, जानें कैसे करें इस्तेमाल?

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Aug 22, 2025 06:47 pm IST,  Updated : Aug 22, 2025 06:57 pm IST
 पथरचट्टा में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर को कई बीमारियों से बचाव में मदद करते हैं। इसमें मौजूद रोगाणुरोधी, सूजनरोधी और एंटीसेप्टिक गुण पाचन समस्याओं, अल्सर, गठिया और मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में मदद करने के लिए जाने जाते हैं। तो, आज हम जानेंगे उन बीमारियों के बारे में जिनमें पथरचट्टा का सेवन फायदेमंद है। साथ ही जानेंगे पत्थरचट्टा के पत्ते कैसे खाएं।
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पथरचट्टा में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर को कई बीमारियों से बचाव में मदद करते हैं। इसमें मौजूद रोगाणुरोधी, सूजनरोधी और एंटीसेप्टिक गुण पाचन समस्याओं, अल्सर, गठिया और मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में मदद करने के लिए जाने जाते हैं। तो, आज हम जानेंगे उन बीमारियों के बारे में जिनमें पथरचट्टा का सेवन फायदेमंद है। साथ ही जानेंगे पत्थरचट्टा के पत्ते कैसे खाएं।
पत्थरचट्टा का पौधा पेशाब से जुड़ी समस्याओं जैसे पेशाब में जलन, रुक-रुक कर पेशाब आना, और मूत्र मार्ग के संक्रमण (UTI) में फायदेमंद होता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
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पत्थरचट्टा का पौधा पेशाब से जुड़ी समस्याओं जैसे पेशाब में जलन, रुक-रुक कर पेशाब आना, और मूत्र मार्ग के संक्रमण (UTI) में फायदेमंद होता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
किडनी की पथरी कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल से बनी होती है। पथरचट्टा पौधे का सैपोनिन कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल को तोड़ सकता है। इस पौधे में अल्कलाइन गुण होते हैं जो पित्ताशय की पथरी और किडनी की पथरी को बनने से रोकने में मदद कर सकते हैं और फिर किडनी को स्वस्थ रखने में मददगार है।
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किडनी की पथरी कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल से बनी होती है। पथरचट्टा पौधे का सैपोनिन कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल को तोड़ सकता है। इस पौधे में अल्कलाइन गुण होते हैं जो पित्ताशय की पथरी और किडनी की पथरी को बनने से रोकने में मदद कर सकते हैं और फिर किडनी को स्वस्थ रखने में मददगार है।
पथरचट्टा का उपयोग डायबिटीज में किया जा सकता है। पथरचट्टा में फिनाइल एल्काइल ईथर नामक बायोएक्टिव कंपाउंड होता है जो कि इंसुलिन के प्रोडक्शन को उत्तेजित कर सकता है, जिससे शुगर का स्तर और कम हो सकता है।
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पथरचट्टा का उपयोग डायबिटीज में किया जा सकता है। पथरचट्टा में फिनाइल एल्काइल ईथर नामक बायोएक्टिव कंपाउंड होता है जो कि इंसुलिन के प्रोडक्शन को उत्तेजित कर सकता है, जिससे शुगर का स्तर और कम हो सकता है।
पत्थरचट्टा के पत्तों को उबाल लें और इसमें नमक मिला लें और फिर इसके रस को छान लें। फिर इसे एक कप में डालें और आराम से बैठकर इसका सेवन करें। इसके अलावा आप इनकी पत्तियों को पीसकर इनका अर्क निकालकर भी इनका सेवन कर सकते हैं। इस प्रकार से पत्थरचट्टा के पत्तों का सेवन सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है।
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पत्थरचट्टा के पत्तों को उबाल लें और इसमें नमक मिला लें और फिर इसके रस को छान लें। फिर इसे एक कप में डालें और आराम से बैठकर इसका सेवन करें। इसके अलावा आप इनकी पत्तियों को पीसकर इनका अर्क निकालकर भी इनका सेवन कर सकते हैं। इस प्रकार से पत्थरचट्टा के पत्तों का सेवन सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है।
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