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कहीं आपके घर में भी रसोई और और बाथरूम तो नहीं हैं सटे हुए? जानिए इसका वास्तु में असर और बचाव के आसान तरीके

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Jul 08, 2026 05:38 pm IST,  Updated : Jul 08, 2026 05:38 pm IST
वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और बनावट को बहुत महत्व दिया गया है। वास्तु नियमों का पालन करने से घर में पॉजिटिविटी और सुख-समृद्धि बनी रहने की मान्यता है। वहीं, कुछ वास्तु संबंधी गलतियां नकारात्मक प्रभाव बढ़ा सकती हैं। इन्हीं में से एक किचन और बाथरूम का एक-दूसरे के बिल्कुल पास होना है। अगर घर में ऐसी स्थिति है तो कुछ आसान उपाय अपनाकर इसके प्रभाव को कम करने की कोशिश की जा सकती है।
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वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और बनावट को बहुत महत्व दिया गया है। वास्तु नियमों का पालन करने से घर में पॉजिटिविटी और सुख-समृद्धि बनी रहने की मान्यता है। वहीं, कुछ वास्तु संबंधी गलतियां नकारात्मक प्रभाव बढ़ा सकती हैं। इन्हीं में से एक किचन और बाथरूम का एक-दूसरे के बिल्कुल पास होना है। अगर घर में ऐसी स्थिति है तो कुछ आसान उपाय अपनाकर इसके प्रभाव को कम करने की कोशिश की जा सकती है।
किचन-बाथरूम न हों साथ: वास्तु शास्त्र की माने तो घर में किचन और बाथरूम एक-दूसरे से सटाकर नहीं बनाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। अगर पहले से ऐसा निर्माण है तो बाथरूम का दरवाजा इस्तेमाल के बाद हमेशा बंद रखें। ऐसा करने से किचन तक नकारात्मक प्रभाव पहुंचने की संभावना कम मानी जाती है।
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किचन-बाथरूम न हों साथ: वास्तु शास्त्र की माने तो घर में किचन और बाथरूम एक-दूसरे से सटाकर नहीं बनाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। अगर पहले से ऐसा निर्माण है तो बाथरूम का दरवाजा इस्तेमाल के बाद हमेशा बंद रखें। ऐसा करने से किचन तक नकारात्मक प्रभाव पहुंचने की संभावना कम मानी जाती है।
मुख्य द्वार पर सही पौधे:घर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास कांटेदार या दूध निकलने वाले पौधे लगाने से बचना चाहिए। ये घर के वातावरण को नकारात्मक बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। घर के आगे कांटेदार पौधे होते हैं तो दुश्मन बढ़ने लगते हैं। पारिवारिक जीवन में मतभेद बढ़ने लगते हैं और घर के लोगों की सेहत खराब रहती है।
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मुख्य द्वार पर सही पौधे:घर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास कांटेदार या दूध निकलने वाले पौधे लगाने से बचना चाहिए। ये घर के वातावरण को नकारात्मक बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। घर के आगे कांटेदार पौधे होते हैं तो दुश्मन बढ़ने लगते हैं। पारिवारिक जीवन में मतभेद बढ़ने लगते हैं और घर के लोगों की सेहत खराब रहती है।
आग और पानी रखें अलग: रसोई में गैस स्टोव और सिंक या पानी से जुड़े अन्य स्थानों को एक-दूसरे के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार अग्नि और जल दो विपरीत तत्व हैं, इसलिए इनके बीच उचित दूरी बनाए रखना बेहतर माना जाता है।
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आग और पानी रखें अलग: रसोई में गैस स्टोव और सिंक या पानी से जुड़े अन्य स्थानों को एक-दूसरे के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार अग्नि और जल दो विपरीत तत्व हैं, इसलिए इनके बीच उचित दूरी बनाए रखना बेहतर माना जाता है।
डस्टबिन: वास्तु शास्त्र की माने तो घर के आगे कूड़ेदान नहीं होना चाहिए। ये घर वालों के लिए कष्टकारी माना जाता है। इसके कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है। जो घर के लोगों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन लाने और उनकी सेहत खराब करने में जिम्मेदार माना जाता है।
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डस्टबिन: वास्तु शास्त्र की माने तो घर के आगे कूड़ेदान नहीं होना चाहिए। ये घर वालों के लिए कष्टकारी माना जाता है। इसके कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है। जो घर के लोगों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन लाने और उनकी सेहत खराब करने में जिम्मेदार माना जाता है।
साफ-सफाई का रखें ध्यान: घर में नियमित रूप से साफ-सफाई करना भी वास्तु का महत्वपूर्ण नियम माना जाता है। मकड़ी के जाले, कबाड़ और बेकार सामान को समय-समय पर हटाते रहने से घर का वातावरण स्वच्छ और व्यवस्थित रहता है। मान्यता है कि साफ-सुथरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर बना रहता है।
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साफ-सफाई का रखें ध्यान: घर में नियमित रूप से साफ-सफाई करना भी वास्तु का महत्वपूर्ण नियम माना जाता है। मकड़ी के जाले, कबाड़ और बेकार सामान को समय-समय पर हटाते रहने से घर का वातावरण स्वच्छ और व्यवस्थित रहता है। मान्यता है कि साफ-सुथरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर बना रहता है।
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