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तस्वीरों में देखें 'नरक का दरवाजा', यहां 54 साल से धधक रही है आग

Published : Jun 09, 2025 05:06 pm IST,  Updated : Jun 09, 2025 05:06 pm IST
तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया का एक रहस्यमयी और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश है। हालांकि, यह देश आमतौर पर अपनी गैस और तेल की संपत्ति के लिए जाना जाता है, लेकिन दुनिया भर में इसकी एक सबसे रहस्यमय और खौफनाक पहचान है Gateway To Hell.
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तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया का एक रहस्यमयी और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश है। हालांकि, यह देश आमतौर पर अपनी गैस और तेल की संपत्ति के लिए जाना जाता है, लेकिन दुनिया भर में इसकी एक सबसे रहस्यमय और खौफनाक पहचान है Gateway To Hell.
"नर्क का द्वार" दरवाजा गैस क्रेटर को कहा जाता है। यह एक विशाल प्राकृतिक गैस से भरा गड्ढा है जो कई दशकों से लगातार जल रहा है। इसका व्यास लगभग 70 मीटर और गहराई करीब 20 मीटर है। रात के अंधेरे में यह जलता हुआ गड्ढा सचमुच नर्क के मुंह जैसा दिखाई देता है, और इसी कारण इसे "गेटवे टू हेल" कहा जाता है।
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"नर्क का द्वार" दरवाजा गैस क्रेटर को कहा जाता है। यह एक विशाल प्राकृतिक गैस से भरा गड्ढा है जो कई दशकों से लगातार जल रहा है। इसका व्यास लगभग 70 मीटर और गहराई करीब 20 मीटर है। रात के अंधेरे में यह जलता हुआ गड्ढा सचमुच नर्क के मुंह जैसा दिखाई देता है, और इसी कारण इसे "गेटवे टू हेल" कहा जाता है।
1971 में सोवियत भूवैज्ञानिक तुर्कमेनिस्तान के रेगिस्तानी क्षेत्र में गैस की खोज कर रहे थे। इस दौरान उनकी खुदाई के दौरान जमीन धंस गई और एक बड़ा गड्ढा बन गया। गड्ढे के नीचे प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार था, जिससे जहरीली गैसें निकलने लगीं। वैज्ञानिकों ने पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए इस गैस को जलाने का निर्णय लिया, उम्मीद थी कि कुछ ही हफ्तों में गैस खत्म हो जाएगी। लेकिन आज, 50 साल से भी अधिक समय के बाद आग लगातार जल रही है।
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1971 में सोवियत भूवैज्ञानिक तुर्कमेनिस्तान के रेगिस्तानी क्षेत्र में गैस की खोज कर रहे थे। इस दौरान उनकी खुदाई के दौरान जमीन धंस गई और एक बड़ा गड्ढा बन गया। गड्ढे के नीचे प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार था, जिससे जहरीली गैसें निकलने लगीं। वैज्ञानिकों ने पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए इस गैस को जलाने का निर्णय लिया, उम्मीद थी कि कुछ ही हफ्तों में गैस खत्म हो जाएगी। लेकिन आज, 50 साल से भी अधिक समय के बाद आग लगातार जल रही है।
हालांकि यह स्थान किसी आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हुआ है, फिर भी हर साल हजारों लोग इसे देखने आते हैं। रात के समय जब चारों ओर अंधेरा होता है और यह गड्ढा प्रज्वलित रहता है, तो इसका दृश्य बेहद रोमांचक और डरावना होता है। यह अनुभव किसी दूसरी दुनिया में होने जैसा लगता है।
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हालांकि यह स्थान किसी आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हुआ है, फिर भी हर साल हजारों लोग इसे देखने आते हैं। रात के समय जब चारों ओर अंधेरा होता है और यह गड्ढा प्रज्वलित रहता है, तो इसका दृश्य बेहद रोमांचक और डरावना होता है। यह अनुभव किसी दूसरी दुनिया में होने जैसा लगता है।
तुर्कमेनिस्तान की सरकार इस गैस क्रेटर को बंद करने पर विचार कर चुकी है, क्योंकि यह देश के गैस संसाधनों की बर्बादी और पर्यावरणीय खतरे को बढ़ा सकता है। 2022 में राष्ट्रपति गुरबांगुली बर्डीमुहामेदोव ने इसके बंद करने का आदेश भी दिया था।
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तुर्कमेनिस्तान की सरकार इस गैस क्रेटर को बंद करने पर विचार कर चुकी है, क्योंकि यह देश के गैस संसाधनों की बर्बादी और पर्यावरणीय खतरे को बढ़ा सकता है। 2022 में राष्ट्रपति गुरबांगुली बर्डीमुहामेदोव ने इसके बंद करने का आदेश भी दिया था।
"नर्क का द्वार" तुर्कमेनिस्तान का एक अद्भुत लेकिन डरावना अजूबा है, जो प्राकृतिक संसाधनों के साथ मानव द्वारा की गई एक भूल का परिणाम है। यह ना केवल विज्ञान और भूगर्भीय गतिविधियों का उदाहरण है, बल्कि यह पर्यावरण और संसाधनों के प्रबंधन के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद भी दिलाता है।
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"नर्क का द्वार" तुर्कमेनिस्तान का एक अद्भुत लेकिन डरावना अजूबा है, जो प्राकृतिक संसाधनों के साथ मानव द्वारा की गई एक भूल का परिणाम है। यह ना केवल विज्ञान और भूगर्भीय गतिविधियों का उदाहरण है, बल्कि यह पर्यावरण और संसाधनों के प्रबंधन के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद भी दिलाता है।
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