सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा शर्मा केस पर स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले को सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख दी गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई में तीन जज की बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली भी इस बेंच का हिस्सा हैं। सुप्रीम कोर्ट में 23 मई (शनिवार) को शाम 6.23 बजे यह मामला दर्ज किया गया। इसमें ट्विशा की उसके ससुराल में हुई अप्राकृतिक मौत में कथित संस्थागत भेदभाव और प्रक्रिया में गड़बड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार को इसी मामले पर सुनवाई होनी है। हालांकि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ट्विशा की सास और पूर्व जज राजबाला सिंह की अग्रिम जमानत के मामले में सुनवाई करेगा, जिसके खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने याचिका लगाई है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में इस केस से जुड़े संस्थागत भेदभाव और न्याय प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों पर सुनवाई करेगा।
ट्विशा के जीजा ने लगाए थे आरोप
ट्विशा की मौत के बाद से उसका पति समर्थ फरार चल रहा था। वह शुक्रवार (22 मई) को जबलपुर हाईकोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा था। इस दौरान पूरे समय वकीलों ने उसे घेरकर रखा था। मीडियो को भी समर्थ की कवरेज करने से रोक दिया गया था और धक्का-मुक्की की खबरें आई थीं। ट्विशा का पक्ष रखने वाले वकीलों ने भी आरोप लगाए कि उनके साथ बदसलूकी की गई। वहीं, ट्विशा के जीजा ने आरोप लगाया कि पूरा सिस्टम समर्थ सिंह के समर्थन में दिख रहा है। उन्होंने कहा कि सुबह से ही समर्थ सिंह जबलपुर में है लेकिन ना पुलिस को दिख रहा था और ना ही उसपर SIT की नजर पड़ी। कोर्ट से हमें बाहर निकाल दिया गया है। समर्थ सिंह को किससे जान का खतरा है। उसके खिलाफ तो लुक आउट नोटिस जारी है। उसपर 30 हजार का ईनाम भी घोषित किया गया है फिर भी समर्थ को पकड़ा नहीं जा रहा है।
एडवोकेट ने क्या कहा?
एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, “हमें कल शाम जबलपुर में डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज के कोर्ट नंबर 32 में आरोपी बैठा मिला। जब मैंने उसके साथ मौजूद लोगों से पूछताछ की, तो पहले तो उन्होंने उसे जानने से मना कर दिया और फिर भागने की कोशिश की। हमने उसे रोका और ठीक से सरेंडर करने को कहा, लेकिन इसके बजाय वह कई वकीलों की मदद से भाग गया, जिन्होंने मीडिया वालों और हमसे धक्का-मुक्की की। वे उसे दूसरी बिल्डिंग में ले गए और फिर एक चैंबर में, जहां हमारे साथ गाली-गलौज की गई, हाथापाई की गई और हमें धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया। मुझे सच में नहीं पता कि वे लोग सच में वकील थे या वकीलों के भेष में गुंडे थे, क्योंकि जिस तरह की गाली-गलौज और बर्ताव का हमें सामना करना पड़ा, वह चौंकाने वाला था।”
अनुराग श्रीवास्तव ने आगे कहा, "उसने सनग्लासेस पहने हुए थे और खुद को कपड़े से ढक रखा था, इसलिए कल उसके चेहरे के एक्सप्रेशन नहीं दिख रहे थे। लेकिन उसकी तरफ से हर कोशिश भागने की थी। हमें पहले बताया गया कि वह डिस्ट्रिक्ट जज के कोर्ट में गया था और जज ने कथित तौर पर उसे भोपाल में सरेंडर करने के लिए कहा था। मुझे बिल्कुल भी कन्फर्मेशन नहीं है कि ऐसा सच में हुआ था। लेकिन, उस समय की एक तस्वीर घूम रही है जिसमें वह कोर्ट रूम के अंदर वकीलों के लिए रखी कुर्सियों पर बैठा दिख रहा है। मेरा सवाल है- वह कटघरे में रखे जाने के बजाय वहां कैसे बैठा था? और अगर यह सच है कि डिस्ट्रिक्ट जज ने उसका सरेंडर लेने से मना कर दिया था, तो उसे कस्टडी में रखना चाहिए था, कटघरे में खड़ा करना चाहिए था, और लोकल पुलिस को सौंप देना चाहिए था। जब मैं कोर्ट रूम में घुसा और कोर्ट स्टाफ से बात की, तो मैंने उसे अकेला बैठा देखा। लाइट बंद थी, जबकि एसी और पंखे चल रहे थे। मुझे लगा कि शायद डिस्ट्रिक्ट जज ने उसे कस्टडी में रखा है, इसलिए मैंने उनसे जज को फोन करने को कहा। उन्होंने मुझे बताया कि जज पहले ही घर जा चुके हैं। जब मैंने पूछा कि उन्होंने उसे किस अधिकार से वहां रखा है, तो अफरा-तफरी मच गई। उसके बाद जो कुछ भी हुआ, वह कल मीडिया में सबने देखा।”
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