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वड़ताल धाम का ऐसा VIDEO देखा क्या आपने? भगवान के सामने 500 किलो आम का लगाया गया महाभोग

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 17, 2026 08:41 am IST,  Updated : May 17, 2026 08:47 am IST

मंदिर परिसर में फैली केसर आम की महक वहां आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह रही थी। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, भगवान का अनूठा स्वरूप देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।

500 किलो आम का महाभोग - India TV Hindi
500 किलो आम का महाभोग Image Source : REPORTER INPUT

गुजरात के वड़ताल से आस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर आपकी आंखें भी ठहर जाएंगी। गर्मी का मौसम है और बाजारों में आम की बहार है। लेकिन क्या आपने कभी भगवान के दरबार में 'आमों का पहाड़' देखा है? जी हां, गुजरात के सुप्रसिद्ध स्वामीनारायण संप्रदाय के महातीर्थ 'वड़ताल धाम' में साक्षात देवों को रिझाने के लिए 'अन्नकूट' सजाया गया। जहां भगवान के सामने पूरे 500 किलो 'केसर आम' का महाभोग लगाया गया।

सनातन परंपरा में ऋतु के अनुसार, भगवान को ताजे फलों का भोग लगाने की सदियों पुरानी रीत है। इसी रीत को निभाते हुए एकादशी के दिन 2500 कीलो तरबूज का भोग लगाया गया था, वहीं अब देवों के 'राजीपे' यानी उनकी प्रसन्नता के लिए यह अनोखा 'मैंगो अन्नकूट' सजाया गया।

यहां देखें वीडियो-

भगवान के प्रति अटूट आस्था की यह खूबसूरत मिसाल भक्त स्नेहल भाई प्रमोद भाई पटेल और उनके परिवार द्वारा पेश की गई। उनकी भक्ति के चलते भगवान स्वामीनारायण के चरणों में 500 किलो शुद्ध और चुनिंदा केसर आम अर्पित किए गए।

आम रस और कटे आम भी परोसा गया

भगवान के सामने सिर्फ आम का ढेर ही नहीं, बल्की आम रस और कलात्मक तरीके से कटे हुए आमों को भी परोसा गया। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, भगवान का यह अनूठा और दिव्य स्वरूप देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। पीले रंग के रसीले आमों के बीच विराजे भगवान के दर्शन के लिए दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं का तांता लग गया। हर कोई इस अलौकिक दृश्य को अपनी आंखों और कैमरों में कैद करने के लिए बेताब दिखा। 

​इस अद्भुत 'मैंगो अन्नकूट' के आयोजन पर वड़ताल मंदिर के चेयरमैन डॉक्टर संत वल्लभदासजी स्वामी और मुख्य कोठारी देवप्रकाश दासजी स्वामी ने यजमान परिवार को आशीर्वाद दिया और उनके उत्तम जीवन की प्रार्थना की। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य भक्ति के साथ-साथ प्रकृति के उपहारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था। वड़ताल मंदिर में मौसम के अनुसार, भोग लगाए जाते हैं, जिसकी तैयारियां मंदिर के ही स्वयंसेवक करते हैं।

(रिपोर्ट- नचिकेत मेहता)

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