1. Hindi News
  2. हरियाणा
  3. गुरुग्राम: बेटे ने बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ा, रोना सुनकर पड़ोसी परेशान, अब मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

गुरुग्राम: बेटे ने बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ा, रोना सुनकर पड़ोसी परेशान, अब मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

 Edited By: Shakti Singh
 Published : May 31, 2025 11:53 pm IST,  Updated : May 31, 2025 11:53 pm IST

96 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी 86 साल की पत्नी इलाज के अभाव में कराहते रहते हैं। उनके रोने की आवाज से सोसायटी में रहने वाले लोग भी परेशान हो चुके हैं। ऐसे में मानवाधिकार आयोग ने प्रशासन से बुजुर्ग की देखरेख करने के लिए कहा है।

Human Rights Commission- India TV Hindi
मानवाधिकार आयोग (फाइल फोटो) Image Source : FILE PHOTO

हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने 96 वर्षीय एक व्यक्ति और उसकी पत्नी की दयनीय स्थिति पर संज्ञान लेते हुए गुरुग्राम के अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिए हैं। इस बुजुर्ग दंपति को उनके बेटे ने अकेला छोड़ दिया है। 96 साल के बुजुर्ग अपनी 86 वर्षीय पत्नी के साथ गुरुग्राम की सोसाइटी के एक फ्लैट में रहते हैं। सोसाइटी के निवासियों और प्रतिनिधियों की गई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मानवाधिकार आयोग ने गुरुग्राम जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों को बुजुर्ग दंपति की देखरेख के आदेश दिए हैं।

मानवाधिकार आयोग ने तत्काल बुजुर्ग दंपति की चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ नागरिकों को गंभीर उपेक्षा की स्थिति में छोड़ दिया गया है, उन्हें उचित चिकित्सा देखरेख के बिना केवल दो अप्रशिक्षित महिला परिचारिकाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है। 

सोसायटी वाले हुए परेशान

शिकायत के मुताबिक बुजुर्ग व्यक्ति को अक्सर दर्द से तड़पते और रोते हुए सुना जाता है, जिससे न केवल उसकी पत्नी को बल्कि आस-पास के अन्य वरिष्ठ नागरिकों को भी गंभीर भावनात्मक आघात पहुंचता है। इसमें कहा गया कि दंपति के बेटे और स्थानीय अधिकारियों से बार-बार अपील करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण ‘‘उनके बुनियादी मानवाधिकारों और सम्मान को बनाए रखने के लिए’’ आयोग से हस्तक्षेप का अनुरोध करना पड़ा। 

मानवाधिकार अध्यक्ष बोले- यह मौलिक अधिकार का उल्लंघन

एचएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने दपंति द्वारा लम्बे समय से झेली जा रही मानसिक और शारीरिक पीड़ा पर गहरी चिंता व्यक्त की तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त सम्मान के साथ जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करार दिया। न्यायमूर्ति बत्रा ने 29 मई के अपने आदेश में कहा कि अपार्टमेंट से दिन-रात आती कराह और निराशा की उदासीन आवाजों को महज ‘निजी मामला’ मानकर नजरंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब बुजुर्ग दंपति को उचित देखभाल और सम्मान से वंचित किया जाता है, तो समाज और राज्य की साझा जिम्मेदारी है कि वे हस्तक्षेप करें। 

तीन जुलाई को होगी अगली सुनवाई

न्यायमूर्ति बत्रा ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों, विशेषकर धारा 20 को रेखांकित किया, जो राज्य को वरिष्ठ नागरिकों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए बाध्य करता है, जिसमें आरक्षित अस्पताल के बिस्तर, अलग कतार और रियायती उपचार शामिल हैं। आयोग ने गुरुग्राम प्रशासन को बुजुर्ग दंपति के उपचार, देखभाल या पुनर्वास को लेकर एक स्थिति रिपोर्ट और दीर्घकालिक कार्य योजना तीन जुलाई, 2025 को अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। (इनपुट- पीटीआई भाषा)

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। हरियाणा से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।