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क्या वाकई में रेबीज में कुत्ते की तरह भौंकने लगता है इंसान? न्यूरोलॉजिस्ट से जानें पूरा सच

 Written By: Ritu Raj
 Published : Apr 10, 2026 06:25 pm IST,  Updated : Apr 10, 2026 06:57 pm IST

रेबीज संक्रमित कुत्‍ते के काटने से फैलने वाली बीमारी है। लेकिन इन दिनों एक वायरल वीडियों ने लोगों को डरा दिया। वायरल वीडियो में एक लड़का कुत्ते की तरह भौंकता नज़र आ रहा है। ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि क्या रेबीज होने पर इंसान कुत्ते की तरह भौंकने लगता है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल चावला ने इस वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया

क्या रेबीज में कुत्ते की तरह भौंकने लगता है इंसान?- India TV Hindi
क्या रेबीज में कुत्ते की तरह भौंकने लगता है इंसान? Image Source : FREEPIK

रेबीज एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो इस बीमारी से संक्रमित कुत्तों की लार से फैलता है। यह सीधे इंसान के नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। रेबीज आमतौर पर संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या उनके लार के खुले घाव या आंखों/मुंह के संपर्क में आने से फैलता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। मिर्जापुर के एक लड़के का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह कुत्ते के काटने के चार महीने बाद 'कुत्ते की तरह भौंकता' नजर आ रहा है। इस वीडियो ने रेबीज के लक्षणों और लड़के को हुई बीमारी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

न्यूरोलॉजिस्ट ने बताई सच्चाई

ऐसे में 9 अप्रैल को इंस्टाग्राम पर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल चावला ने इस वायरल वीडियो पर रिएक्ट किया है। एम्स नई दिल्ली से प्रशिक्षित न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल चावला ने वीडियो का खंडन करते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति को संक्रमित कुत्ते के काटने के बाद रेबीज हो भी जाता है, तो वह खुद कुत्ते की तरह भौंकना शुरू नहीं कर देता है। उन्होंने कहा रेबीज मस्तिष्क के स्टेम को प्रभावित करता है और गले की मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन पैदा करता है। इन ऐंठनों के कारण पानी पीना भी बेहद दर्दनाक हो जाता है। मरीज को कुछ भी निगलने में काफी दिक्कत होती है, जिससे रेबीज का एक लक्षण, जिसे हाइड्रोफोबिया कहा जाता है, विकसित हो जाता है।

कभी-कभी गले या स्वरयंत्र में होने वाली ये ऐंठन असामान्य आवाज पैदा करती हैं। लेकिन ये आवाज भौंकने से बिल्कुल अलग होती हैं। वायरल हो रहे वीडियो में बच्चे का व्यवहार रेबीज के लक्षण नहीं दर्शाता। ऐसे लक्षण किसी फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑडर जिसे पहले हिस्टीरिया कहा जाता था के कारण हो सकता हैं, जो कुत्ते के काटने के बाद डर से पैदा होता है। ऐसे मामलों में तुरंत रेबीज का नाम देने की बजाय इसे न्यूरोलॉजिकल और साइकैट्रिक मूल्यांकन करने की जरूरत होती है। 

सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बहुत तेजी से फैलती है। इसीलिए इसे शेयर करने से पहले मेडिकल फैक्ट्स की पुष्टि करना बेहद महत्वपूर्ण है। गलत जानकारी लोगों के बीच घबराहट और भ्रम पैदा कर सकती है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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