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आप भी कर रहे हैं बच्चे की प्लानिंग तो एक्सपर्ट से जानें कपल्स को थैलेसीमिया टेस्ट क्यों कराना चाहिए?

 Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
 Published : Apr 30, 2026 06:11 pm IST,  Updated : Apr 30, 2026 06:11 pm IST

Thalassemia Test Before Pregnancy: अगर आप भी बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं, तो थैलेसीमिया टेस्ट कराना एक जरूरी कदम हो सकता है। यह एक जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है, जो माता-पिता से बच्चे में जा सकता है।

थैलेसीमिया टेस्ट- India TV Hindi
थैलेसीमिया टेस्ट Image Source : UNSPLASH

अगर आप फैमिली प्लानिंग के बारे में सोच रहे हैं, तो सिर्फ लाइफस्टाइल और न्यूट्रिशन ही नहीं, बल्कि कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट भी उतने ही अहम होते हैं। इन्हीं में से एक है थैलेसीमिया टेस्ट, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। दिल्ली में स्थित एक्शन कैंसर हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांटेशन और सेलुलर थेरेपी, डॉ. महक अग्रवाल के मुताबिक, शादी से पहले या प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले कपल्स को यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए, ताकि होने वाले बच्चे में किसी गंभीर जेनेटिक बीमारी का खतरा समय रहते समझा जा सके।

थैलेसीमिया क्या है?

थैलेसीमिया एक जेनेटिक खून की बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है। इस बीमारी में शरीर हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, जो खून के जरिए शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब हीमोग्लोबिन कम होता है, तो बच्चे को कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना और बार-बार खून चढ़ाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह बीमारी जन्म से होती है और लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ती है।

कपल्स के लिए टेस्ट क्यों जरूरी है?

थैलेसीमिया के संदर्भ में “कैरियर” वह व्यक्ति होता है, जिसके शरीर में इस बीमारी का जीन मौजूद रहता है, लेकिन उसे कोई गंभीर लक्षण दिखाई नहीं देते और वह सामान्य जीवन जीता है। ज्यादातर लोगों को पता भी नहीं होता कि वे कैरियर हैं। समस्या तब बढ़ती है, जब शादी के बाद पति-पत्नी दोनों कैरियर निकलते हैं। ऐसे में हर प्रेग्नेंसी में बच्चे को थैलेसीमिया होने का खतरा करीब 25% तक होता है, जबकि 50% संभावना यह रहती है कि बच्चा भी कैरियर बने। इसलिए बिना जांच के बच्चा प्लान करना जोखिम भरा हो सकता है। डॉक्टरों की सलाह है कि शादी से पहले या प्रेग्नेंसी की योजना बनाते समय यह साधारण ब्लड टेस्ट जरूर कराना चाहिए, ताकि समय रहते सही फैसला लिया जा सके और बच्चे को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके।

बच्चा थैलेसीमिया से पीड़ित है तो क्या होता है?

यदि बच्चा थैलेसीमिया से पीड़ित होता है, तो उसे हर 2 से 4 सप्ताह में खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही शरीर में आयरन की अधिकता को नियंत्रित करने के लिए नियमित दवाएं भी लेनी पड़ती हैं। कुछ गंभीर मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट को स्थायी इलाज माना जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया जटिल और काफी महंगी होती है।

किसे करानी चाहिए जांच?

थैलेसीमिया की जांच उन सभी लोगों के लिए जरूरी है जो शादी करने वाले हैं। खासकर यदि परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही हो या बार-बार खून की कमी की समस्या होती हो, तो यह जांच और भी जरूरी हो जाती है। यह एक छोटी और सरल जांच है, जो भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा सकती है। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है

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