रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर की वो हड्डी होती है जिसपर पूरी बॉडी टिकी होती है। रीढ़ की हड्डी शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमारी रीढ़ को सहारा देती है और शरीर के अन्य हिस्सों को संतुलित रखने में मदद करती है। यह न केवल हमारे शरीर का आधार है, बल्कि तंत्रिका तंत्र का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि यह मस्तिष्क और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संदेशों को पहुंचाता है। लेकिन कई बार खेलने कूदने, गिरने और किसी अन्य दुर्गघटना की वजह से रीढ़ की हड्डी में चोट या इसकी नसें दब जाती है। जिसकी वजह से कई तरह की दिक्कत हो सकती है। रीढ़ की नस दबने से न्यूरोलॉजिकल समस्या पैदा हो सकती है। यह स्थिति तब होती है जब रीढ़ की हड्डी के किसी हिस्से से जुड़ी नसें दब जाती हैं या उनमें दबाव बढ़ जाता है, जिससे दर्द, कमजोरी, और अन्य लक्षण हो सकते हैं। इसे आमतौर पर स्पाइन कॉम्प्रेशन या न्यूरोपैथी कहा जाता है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं रीढ़ की हड्डी दबने से क्या होता है और इससे छुटकारा पाने के लिए क्या करें।
रीढ़ की नसें दबने से होने वाली समस्याएं
दर्द
रीढ़ की हड्डी की नस दबने पर अक्सर पीठ, गर्दन या कंधे में दर्द होता है। यह दर्द कभी हल्का तो कभी तेज हो सकता है, और कुछ मामलों में यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी दर्द का कारण बन सकता है।
सिरदर्द और चक्कर आना
यदि नसें गर्दन में दब रही हैं तो सिर में दर्द और चक्कर आ सकते हैं।
तंत्रिका संबंधी समस्याएं
नस दबने से पैरों या हाथों में झनझनाहट, सुन्नता, और कमजोरी महसूस हो सकती है।
मांसपेशियों में कमजोरी
दबाव के कारण नसों की कार्यक्षमता कम हो सकती है, जिससे शरीर के किसी हिस्से में मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है।
नियंत्रण की समस्या
यदि दबाव अधिक समय तक बना रहे, तो चलने में समस्या या पेशाब करने में भी दिक्कत हो सकती है।
रीढ़ की समस्या से छुटकारा पाने के उपाय
रीढ़ की समस्या से छुटकारा पाने के लिए करें योगासन
पुष्ट आसन
इस योगासन को करने के लिए घुटनों को एक साथ रखते हुए अपनी एड़ी पर बैठ जाएं। अपनी बाहों को ऊपर उठाएं और गहरी सांस लें। सांस छोड़ते हुए, धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और अपने शरीर को अपनी जांघों पर टिका दें। इस स्थिति में 5 मिनट तक रहें। फिर धीरे धीरे नॉर्मल पोजीशन में आ जाएं।
भुजंगासन
यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है और पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करता है। इसके लिए पेट के बल लेटें। हाथों को कंधे के नीचे रखें। धीरे-धीरे अपने कंधों और सिर को ऊपर उठाएं, ध्यान रखें कि रीढ़ के निचले हिस्से पर दबाव न पड़े। 20-30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें और फिर आराम करें।
सेतुबंधासन
यह आसन कमर, रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके लिए पीठ के बल लेटें, घुटनों को मोड़े और पैरों को कूल्हों की चौड़ाई पर रखें। हाथों को शरीर के पास रखें। सांस छोड़ते हुए अपने कूल्हों को ऊपर उठाएं और कुछ सेकंड के लिए उस स्थिति में रहें। धीरे-धीरे नीचे आकर विश्राम करें।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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