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विषाक्तता, बिजली का झटका लगने से मध्य प्रदेश में 13 बाघों की मौत

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 16, 2016 04:36 pm IST,  Updated : Oct 16, 2016 04:36 pm IST

भोपाल: मध्य प्रदेश के दो राष्ट्रीय उद्यानों में पिछले एक साल में विषाक्तता, बिजली का झटका लगने और दूसरे कारणों से कम से कम 13 बाघ मर चुके हैं। राज्य वन विभाग ने एक आरटीआई

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भोपाल: मध्य प्रदेश के दो राष्ट्रीय उद्यानों में पिछले एक साल में विषाक्तता, बिजली का झटका लगने और दूसरे कारणों से कम से कम 13 बाघ मर चुके हैं। राज्य वन विभाग ने एक आरटीआई का जवाब देते हुए बताया कि पेंच राष्ट्रीय उद्यान में नौ बाघों की मौत हो गयी जबकि बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में चार बाघ मारे गए।

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पेंच उद्यान को मोगली के घर के तौर पर जाना जाता है जो अंग्रेज लेखक रूडयार्ड किपलिंग के फिक्शन उपन्यास द जंगल बुक का मुख्य किरदार है। राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों में बाघों के शिकार के मामलों की जांच की मांग को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करने वाले वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सूचना का अधिकार आवेदन देकर पिछले एक साल में मारे गए बाघों के ब्यौरे मांगे थे।

वन विभाग ने विषाक्तता, बिजली का झटका लगना, बीमारी, दूसरे बाघों से लड़ाई और कुएं में डूबने को बाघों के मारे जाने की वजह बताया है। मध्य प्रदेश में छह बाघ अभयारण्य हैं जिनमें कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना, बोरी-सतपुरा, संजय-दुबरी और पेंच शामिल हैं जहां करीब 257 बाघ हैं। 2010 में देश में बाघों की आबादी 1,706 थी और 2014 में यह बढ़कर 2,226 हो गयी।

बाघों की आबादी के लिहाज से कर्नाटक और उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर आता है।

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