नयी दिल्ली: 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए बहुप्रतीक्षित अनुबंध पर शीघ्र मुहर लगाए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी 23 सितंबर को भारत फ्रांस के साथ राफेल डील पूरी कर लेगा। इस सौदे पर 7.87 अरब यूरो (करीब 59 हजार करोड़ रुपये) की लागत आएगी। इस सौदे के अंतर्गत 36 राफेल लड़ाकू विमान भारत को मिलेंगे। फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां वेस ली ड्रियान डील पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत आएंगे।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि सख्त कीमत मोलभाव के जरिए भारत 59 करोड़ यूरो यानी करीब 4500 करोड़ रुपये से अधिक बचाने में सफल हुआ है। यह वार्ता इस साल जनवरी में शुरू हुई थी। यद्यपि सौदे को पहले ही अंतिम रूप दिया जा सकता था लेकिन कीमत और ऑफसेट जैसे मुद्दों की वजह से समय लगा क्योंकि भारत बेहतर अनुबंध चाहता था। पिछले साल के उत्तराद्र्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद फ्रांस ने 50 फीसदी ऑफसेट प्रावधान पर सहमति जता दी।
इसका मतलब है कि ऑफसेट के जरिए भारतीय कंपनियों के लिए कम से कम तीन अरब यूरो के व्यापार और भारत में हजारों नौकरियों का सृजन होगा। फ्रांसीसी सूत्रों ने बताया कि फ्रांस से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अनुबंध पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत आ सकता है। लड़ाकू विमानों की आपूर्ति 2019 में शुरू होने का अनुमान है। सौदे का हिस्सा हथियार प्रणाली में अत्याधुनिक, दृश्यता सीमा से इतर मिसाइल मेटीअर भी है।
फ्रांस के साथ बहुप्रतीक्षित राफेल सौदे पर बातचीत कर रहे दल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को रक्षा मंत्रालय ने पिछले महीने मंजूरी दे दी थी। फाइल उसके बाद समीक्षा और मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई थी। सूत्रों ने बताया कि उसके बाद आईजीए पर काम शुरू हुआ।
पिछले साल अप्रैल में अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात की घोषणा की थी कि भारत सरकार के स्तर पर अनुबंध के जरिए 36 राफेल विमानों की खरीद करेगा। घोषणा के तुरंत बाद रक्षा मंत्रालय ने उस अलग प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था जो 126 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए चल रही थी। राफेल विमानों का निर्माण फ्रांसीसी रक्षा कंपनी डसॉल्ट एविएशन करती है।